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IIIT के अध्ययन में भारतीयों के मस्तिष्क को लेकर चौंकाने वाला खुलासा

News18Hindi
Updated: October 29, 2019, 6:31 PM IST
IIIT के अध्ययन में भारतीयों के मस्तिष्क को लेकर चौंकाने वाला खुलासा
हैदराबाद आईआईआईटी के एक अध्ययन से पता चला है कि भारतीयों का मस्तिष्क पश्चिमी देशों के लोगों से छोटा होता है.

मेडिकल जनरल 'रिसर्च न्यूरोलॉजी इंडिया' (Research Neurology India) में खुलासा किया गया है कि हैदराबाद आईआईआईटी ने मस्तिष्क से संबंधित होने वाली बीमारी में ईलाज में मदद के लिए ब्रैन की मैपिंग करके एलटस तैयार किया गया है.

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  • Last Updated: October 29, 2019, 6:31 PM IST
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अल्जाइमर (Alzheimer) और मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों (brain disease) के एक अध्ययन के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. दरअसल मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों को लेकर हैदाराबाद आईआईआईटी (IIIT) में एक रिसर्च चल रहा था. रिसर्च से इस बात का खुलासा हुआ कि भारतीय नागरिकों के दिमाग का साइज पश्चिमी देशों और पूर्वी देशों के निवासियों से तुलनात्मक रूप में छोटा होता है. इतना ही नहीं बल्कि भारतीयों का मस्तिष्क पूर्वी और पश्चिमी देशों के नागरिकों की अपेक्षा लंबाई, चौड़ाई और घनत्व में भी छोटा होता है.

दी हिंदू में छपी एक खबर के हवाले से यह चौंकाने वाला खुलासा हाल में प्रकाशित मेडिकल जनरल 'रिसर्च न्यूरोलॉजी इंडिया' (Research Neurology India) में किया गया है. खबर के अनुसार हैदराबाद आईआईआईटी द्वारा मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों को लेकर एक रिसर्च चल रहा था. जिसमें भारतीय लोगों के मस्तिष्क की मैपिंग करके एक एटलस तैयार किया गया है. ऐसा माना जा रहा है कि इस एटलस के जरिए मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों का ईलाज करने में मदद मिलेगी.

हैदराबाद आईआईआईटी ने मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों के ईलाज के लिए एक ब्रेन मैप तैयार किया है.


इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नॉलजी का शोध

आईटी शहर हैदराबाद स्थित इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नॉलजी के शोधकर्ताओं द्वारा एक रिसर्च किया गया है. रिसर्च प्रोजेक्ट से जुड़ी एक संस्थान सेंटर फॉर विजुअल इंफॉर्मेशन टेक्नॉलजी में काम करने वाली जयंती सिवास्वामी ने इस रिसर्च के बारे में विस्तार से जानकारी दी है. उन्होंने कहा है कि दिमाग से जुड़ी बीमारियों को मॉनिटर करने के लिए मॉन्ट्रियल न्यूरॉलजिकल इंस्टीट्यूट (MNI) टेम्पलेट का उपयोग एक मानक के तौर पर उपयोग किया जाता है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों पर नजर रखने के लिए टेम्पलेट को कोकेशियान मस्तिष्क को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. गौरतलब है कि कोकेशयान वंश के लोग अधिकतर पश्चिमी देशों में निवास करते हैं. ऐसे में ये टेम्पलेट भारतीय लोगों के दिमाग से जुड़ी बीमारियों को जांचने में पूरी तरह सक्षम नहीं है.

मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों पर नजर रखने के लिए टेम्पलेट को कोकेशियान मस्तिष्क को ध्यान में रखकर तैयार किया गया.

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अलग-अलग मस्तिष्क प्रकारों का स्कैन
वहीं रिसर्च से जुड़ी विशेषज्ञ जयंती सिवास्वामी का कहना है कि रिसर्च के दौरान कई बार अलग-अलग मस्तिष्क प्रकारों को स्कैन किया गया. जिससे पता चला है कि भारतीय लोगों का मस्तिष्क कोकेशयन रेज के मानक पर बने MNI की तुलना में छोटा होता है. इस लिए ऐसे में MNI के जरिए भारतीय ब्रेन की जांच करना मिसडाइगनोस की वजह बन सकता है.

MRI इमेज की तुलना
जयंती ने आगे कहा कि उन्होंने MRI इमेज को प्रीलोडेड MNI इमेज टेम्पलेट से जब तुलना किया, तो इस बात की जानकारी हुई. उन्होंने कहा कि हमारे पास इस शोध से जुड़े पुख्ता प्रमाण हैं. जिनसे इस बात की जरूरत महसूस होती है कि ब्रेन के स्ट्रक्चर और उससे जुड़ी बीमारियों के अध्ययन के लिए एक बड़े स्तर पर एटलस बनाया जाए. जिसके जरिए इस बात को समझा जा सके कि मस्तिष्क के साइज के अलग-अलग प्रकारों को ध्यान में रखकर शोध किए जाएं.

हैदराबाद आईआईआईटी की टीम ने भारतीयों के मस्तिष्क को ध्यान में रखकर ब्रैन मैपिंग करके एटलस तैयार किया है.


जयंती ने आगे कहा कि ब्रेन साइज को लेकर अब जक जितने भी टेम्पलेट डिवेलप किए गए हैं, उनमें चीनी और कोरियाई ब्रेन टेम्पलेट्स भी शामिल हैं. बावजूद इसके अभी तक भारतीय विशेष को ध्यान में रखकर कोई ऑथेंटिक टेम्पलेट इससे पहले डिवेलप नहीं किया गया था. हैदराबाद आईआईआईटी की टीम ने इस दिशा में पहला प्रयास किया है. ताकि इंडियन ब्रेन स्पेसिफिक एटलस डिवेलप किया जा सके और भारतीयों में होने वाली मस्तिष्क से संबंधित बीमारियों का सही ईलाज हो सके.

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First published: October 29, 2019, 6:21 PM IST
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