क्या बसने के लिए मंगल की जगह शुक्र ग्रह को दी जानी चाहिए तरजीह?

क्या बसने के लिए मंगल की जगह शुक्र ग्रह को दी जानी चाहिए तरजीह?
कई वैज्ञानिकों का मत है कि मंगल के साथ ही शुक्र ग्रह पर भी जीवन की संभावनाएं तलाशना चाहिए. (तस्वीर JAXA)

क्या बसने के लिए मंगल की जगह शुक्र ग्रह को दी जानी चाहिए तरजीह? | Should we go to Venus instead of Mars what is the difference Viks

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वैज्ञानिक पृथ्वी से बाहर जीवन तलाशने की संभावनाएं (Possibilities of life) पता लगाने को बेचैन हैं. चांद (Moon) पर बेस कैम्प बनाने की तैयारी चल रही है तो वहीं मंगल ग्रह (Mars) पर जीवन कभी था या नहीं यह तो पता लगा ही रहे हैं. वहां आज इंसान के रहने लायक परिस्थिति कैसे बनाई जा सकती है यह खोज भी की जा रही है. नासा (NASA) और स्पेसएक्स जैसी कंपनियां इस पर जोरों से शोधकार्य कर रही हैं. लेकिन कई लोगों का मत है कि हमें मंगल की जगह शुक्रग्रह (Venus) पर जीवन की संभावनाएं तलाशना चाहिए या वहां रहने योग्य परिस्थितियों का निर्माण करना चाहिए. लेकिन क्या वाकई शुक्र ग्रह पर मंगल से आसान हालात हैं?

मंगल पर क्या है परेशानी
मंगल ग्रह पर हालात काफी मुश्किल हैं लेकिन सवाल कितनी मुश्किलों का नहीं बल्कि कैसी मुश्किलों का है. मंगल के वायुमंडल पर ऑक्सीजन और ग्रीनहाउस गैसों का टिकना लगभग नामुमकिन है.  इसकी वजह वहां के वायुमंडल पर चुंबकीय और इलेक्ट्रिक का प्रभाव है. वायुमंडल न होने से मंगल पर सूर्य की नुकसानदायक पराबैगनी किरणें और अन्य हानिकारक विकरण सतह पर सीधे आते हैं जो हमारे लिए काफी प्रतिकूल होते हैं.

और तापमान भी तो है
मंगल पर तापमान काफी कम रहता है. वहां औसत तापमान 6 डिग्री होता है. वहां की भूमध्यरेखा पर दिन में तापमान अधिकतम 20 डिग्री होता है वहीं पर रात को तापमान -100 डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंच जाता है. यह विशाल तापांतर मंगल पर रहना और कठिन बना देता है.



Mars
मंगल पर जीवन की अनुकूलता काफी कम है, लेकिन इस पर शोध चल रहा है


लेकिन फिर शुक्र क्यों
मंगल पर कठिन हालात को देखते हुए कई लोगों का कहना है कि हमें कहीं और जीवन की अनुकूलता ढूंढना चाहिए. शुक्रग्रह के बारे में विचार करने वालों लोगों का मानना है कि काफी समय पहले, यानि करीब 2 अरब साल पहले, शुक्रग्रह में जीवन के अनुकूल परिस्थितियां ज्यादा थीं. हमारे सौरमंडल में पृथ्वी के बाद किसी और ग्रह से सबसे ज्यादा.

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और ये हालात भी तो हैं
वैज्ञानिकों ने पाया है कि शुक्र की धरती तो पृथ्वी से मिलती जुलती है ही, वहां का वायुमंडल काफी सघन है और वह ग्रह के बाहर से आने वाली समस्याओं को वैसे ही रोक सकता है जैसे कि हमारी पृथ्वी का वायुमंडल करता है. इसके अलावा वहां भले ही आज मानव के रहने लायक हालात न हों, लेकिन कई वैज्ञानिकों का मानना है कि शुक्र ग्रह की स्थितियां मंगल की तुलना में जीवन के ज्यादा अनुकूल रह चुकी हैं और वहां जीवन रहा होगा इसकी भी ज्यादा संभावना है.

Earth
पृथ्वी जैसी मैग्नेटिक फील्ड मंगल और शुक्र दोनों में नहीं हैं.


तो फिर शुक्र पर ध्यान क्यों नहीं दे रहे वैज्ञानिकगण
इसकी कई वजह हैं, सबसे पहली वजह है वहां का तापमान सतह पर 465 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. इतना ज्यादा है की सीसा तक पिघल सकता है. वहां के वायुमंडल में 95 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा है. जिससे वहां सांस लेना नामुमकिन है. शुक्र ग्रह की सबसे खास बात है वहां सतह पर बहुत ही ज्यादा वायुदाब (Atmospheric Pressure) है जो पृथ्वी सतह से 92 गुना ज्यादा है. इसके अलावा इस ग्रह की मैग्नेटिक फील्ड भी नहीं है जिससे सूर्य से आने वाले हानिकारक विकिरण रुक जाएं

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सोवियत यूनियन ने साल 1970 से 1982 के बीच 8 अंतरिक्ष यान शुक्र ग्रह पर भेजे थे. इसके बाद भी वहां कोई ऐसे संकेत नहीं मिले जिससे पता लग सके कि वहां एस्ट्रोनॉट कुछ समय के लिए ही रह सकेंगें. फिलहाल शुक्रग्रह पर इंसान को भेजना मंगल ग्रह पर भेजने से भी ज्यादा खतरनाक है. लेकिन तकनीक में अनंत संभावनाएं हैं.
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