डोनाल्ड ट्रंप को बाल धोने के लिए आखिर कितना पानी चाहिए?

डोनाल्ड ट्रंप को बाल धोने के लिए आखिर कितना पानी चाहिए?
ट्रंप के कारण अमेरिका में शावर नियमों में ढील दी जा सकती है

अमेरिका में शावर (controversy over shower force in America) से प्रति मिनट साढ़े 9 लीटर पानी आता है. ट्रंप (President Donald Trump) को शिकायत है कि ये फोर्स बाल धोने के लिए काफी नहीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 14, 2020, 5:16 PM IST
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अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप का रुतबा इसी बात से समझा जा सकता है कि अब अमेरिका में शावर नियमों में ढील दी जा सकती है. बता दें कि वहां पानी की बर्बादी को रोकने के लिए बाथरूम में शावर प्रेशर फिक्शचर लगाया गया है. इससे नल से पानी सीमित मात्रा में आता है. ट्रंप को ये रास नहीं आता था. वे लगातार शिकायत करते रहे कि इससे उन्हें बाल धोने में परेशानी होती है. अब डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी शावर नियमों में बदलाव करने वाला है.

जानिए, क्या है पूरा मामला
ट्रंप ने कई बार सार्वजनिक तौर पर भी वॉटर फिक्शचर पर शिकायत की. वे खासकर अपने बालों को लेकर चिंतित दिखे और बताया कि बाथरूम में फोर्स से पानी न आने के कारण उन्हें परेशानी झेलनी पड़ती है और बाल धोने के लिए देर तक बाथरूम में वक्त बिताना होता है. ट्रंप ने कहा कि मुझे नहीं पता, ये बाकी लोगों के लिए कैसा है, लेकिन मैं तो अपने बाल परफेक्ट चाहता हूं.

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इसके बाद ही बुधवार को डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी ने शावर वॉटर प्रेशर के नियमों में नरमी बरतने की बात कही. हालांकि फिलहाल ये प्रस्ताव ही है और हो सकता है कि ट्रंप अगर दोबारा चुने जाएं तो ये अमल में लाया जा सके.



ट्रंप ने कई बार सार्वजनिक तौर पर भी वॉटर फिक्शचर पर शिकायत की है (Photo-pixabay)


क्यों बनाया गया पानी को लेकर नियम
भारत में नल खोलते ही पानी की तेज बौछार आती है. इसे नियंत्रित करने के लिए नल में जो सिस्टम होता है, वो भी पानी की धार को एकदम पतला नहीं कर देता. वहीं बहुत से पश्चिमी देशों में पानी की बर्बादी को रोकने के लिए बाथरूम में वॉटर फिक्शचर लगाया जाता है. ये एक तरह का सिस्टम है, जिससे नल से या शावर से सीमित मात्रा में पानी गिरता है. आमतौर पर ये इतना होता है कि कोई भी आसानी से नहा ले और पानी गैरजरूरी ढंग से बहता न रहे.

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कब बना था नियम
अमेरिका में भी पानी को लेकर ये नियम साल 1992 में लाया गया. तब जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश राष्ट्रपति थे. उनकी सरकार ने नहाने के दौरान पानी की बर्बादी को रोकने के लिए शावर फिक्शचर का नियम बनाया. इसके तहत प्रति मिनट लगभग 2.5 गैलन (9.5 लीटर) पानी की सीमा तय हुई. मकसद साफ था कि पानी की धार को सीमित करके उसकी बर्बादी रोकना. 28 सालों बाद ये नियम बदला जा सकता है.

नए नियम के तहत शावरहेड के हरेक छेद से एक मिनट में 2.5 गैलन पानी निकलेगा (Photo-pixabay)


क्या बदलेगा नए नियम से
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में ऊर्जा संरक्षण समूह के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एंड्रयू डीलक्सी कहते हैं कि नए नियम के तहत शावरहेड के हरेक छेद से एक मिनट में 2.5 गैलन पानी निकलेगा. इस तरह से अगर शावरहेड में कई छेद हों तो एक मिनट में 10 से 15 गैलन पानी निकलेगा. ये पानी की काफी तेज धार होगी. इस तरह से ये पानी की खुली बर्बादी है.

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अगर नया नियम आ जाता है तो घर के मालिक खुद तय कर सकेंगे कि उन्हें अपने लिए कैसा शावरहेड लेना है. साथ ही ये लोगों का पानी का बिल भी काफी बढ़ा सकता है. अभी जो स्टैंडर्ड सेट है, उससे हर परिवार साल में लगभग 500 डॉलर की बचत कर पाता है.

ट्रंप की क्यों हो रही आलोचना
ऊर्जा बचाने की मुहिम से जुड़े लोगों का मानना है कि आज तक आम लोगों को नल की धार कम होने जैसी कोई शिकायत नहीं थी. साल 2016 में Consumer Reports ने शावरहेड पर लोगों की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की और पाया कि लोगों को इससे कोई भी समस्या नहीं है. यानी शावर में पानी की कमी केवल ट्रंप की शिकायत है, जिसके कारण पानी की बर्बादी हो सकती है. बाल ठीक से न धो पाने की ट्रंप की शिकायत पर इसलिए भी आलोचना हो रही है क्योंकि लोग फिलहाल कोरोना से परेशान हैं और ऐसे में ट्रंप ये मुद्दा उठा रहे हैं.

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वैसे पानी बचाने के लिए अमेरिका काफी कवायद करता रहा है. जैसे वहां के मेरीलैंड स्टेट में टॉयलेट फ्लश करने पर भी टैक्स (tax on toilet flushing in Maryland) लगता है. अगर कोई तय की गई लिमिट से ज्यादा बार फ्लश करे तो उसे 375 रुपए महीने के देने होते हैं.
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