अपना शहर चुनें

States

2000 सालों तक क्यों बंद रहा सऊदी का शहर हेग्रा, अब क्यों खुला?

सऊदी के जॉर्डन में बसे शहर हेग्रा को अब खोला जा रहा है
सऊदी के जॉर्डन में बसे शहर हेग्रा को अब खोला जा रहा है

सऊदी के जॉर्डन में बसे शहर हेग्रा (Hegra city in Saudi Arab) में 111 कब्रें हैं, जिनपर अरबी में चेतावनी लिखी है कि कोई उन्हें न जगाए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 30, 2020, 1:44 PM IST
  • Share this:
सऊदी अरब लगभग 2000 सालों से बंद पड़े अपने शहर हेग्रा को खोलने की तैयारी कर रहा है. जॉर्डन जैसे चमक-दमक वाले शहर में होने के बाद भी ये शहर हजारों सालों तक क्यों बंद रहा है, ये एक बड़ी पहेली है. पूरे शहर में 111 कब्रें हैं, जिनपर उन्हें न छूने की चेतावनी लिखी हुई है.

कोरोना काल में देशों की अर्थव्यवस्थाएं चरमराई हैं. इसे दुरुस्त करने के लिए कई तरीके अपनाए जा रहे हैं. जैसे कई देश कोरोना का टीका आने के बाद अपने यहां पर्यटन को बढ़ावा देंगे. सऊदी भी उन्हीं में से है. इसी मद्देनजर वहां पर एक भूले-बिसरे शहर को खोलने की तैयारियां चालू हैं. जॉर्डन में बसा ये शहर हेग्रा असल में केवल कब्रों का शहर है. लेकिन इसका इतिहास काफी शानदार रहा.

इस शहर को पहले मादाइन सालेह के नाम से भी जाना जाता था




पेत्रा से जुड़े इस शहर में ईसा पूर्व चौथी सदी में बसाहट हुआ करती थी. यहां अरब का नाबाटियंस समुदाय रहता था, जो मूलतः बंजारा था. बंजारा प्रवृति के ये लोग घूम-घूमकर मसालों का व्यापार करते और रेगिस्तान में ही बहुत समृद्ध शहर बसा लिया. बाद में पहली ईस्वी में यहां रोमन शासकों का हमला हुआ और अरब की बसाहट लगभग खत्म हो गई. इसकी जगह रोमन सभ्यता और संस्कृति ने ले ली. अब भी हेग्रा की कब्रों पर रोमन कल्चर की छाप दिखती है.
ये भी पढ़ें: PAK की बढ़ी मुश्किल, सऊदी और यूएई के बाद बहरीन भी बना भारत का दोस्त

इस शहर को पहले मादाइन सालेह के नाम से भी जाना जाता था. तब व्यापार का बड़ा केंद्र ये शहर रोमन हमले के बाद भी व्यापार में फलता-फूलता रहा. बाद में व्यापार के लिए दूसरे केंद्र बनने लगे और हेग्रा धीरे-धीरे पिछड़ता चला गया. हालांकि ये आज भी रहस्य है कि आखिर क्यों पूरी तरह से ये शहर खत्म हो गया. और शहर की बाकी आबादी क्यों और कहां चली गई.

अब यहां पर रेगिस्तान में केवल 111 कब्रें हैं. इनपर अरबी में लिखा है- ऊपरवाला उन लोगों को न बख्शे, जो इन कब्रों को छुएं या छेड़छाड़ करें.

हेग्रा के लोग मसालों के साथ-साथ रेजिन जैसी चीजों का व्यापार भी करते थे


यूनेस्को ने इस शहर को वर्ल्ड हैरिटेज की श्रेणी में रखा. वो मानता है कि हजारों साल पहले यहां नाबाटियंस नामक की सभ्यता रहा करती थी. इस जगह कब्रों के अलावा कई नक्काशीदार चीजें भी टूटी-फूटी हालत में हैं, जो उस दौर के आधुनिक सौंदर्यबोध का सबूत हैं. साथ ही साथ रेगिस्तान होने के बाद भी यहां कई कुएंनुमा स्ट्रक्चर बने हुए हैं. मिडिल एज में ही ये शहर और यहां की आबादी खत्म हो गए. लेकिन पहले विश्व युद्ध के दौरान इस शहर का दोबारा इस्तेमाल हुआ. तब ऑटोमन एंपायर के शासकों ने यहां एक किला बनवाया था.

ये भी पढ़ें: क्यों अमेरिका की ये जेल हर राष्ट्रपति के कार्यकाल में बड़ा मुद्दा बन जाती है?   

इतने लंबे समय बाद सऊदी दोबारा शहर को खोलने जा रहा है. इसके पीछे क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की सोच है. उन्होंने साल 2016 में ही अपने यहां पर्यटन को बढ़ावा देने का एलान कर दिया था. Saudi Vision 2030 के तहत क्राउन प्रिंस ने सऊदी को न केवल पर्यटन, बल्कि व्यापार के लिए बड़ा केंद्र बनाने की तैयार की. इसके तहत देश को इस तरह से विकसित किया जाएगा कि अरब और एशियाई देशों के अलावा यूरोप और अफ्रीका से भी ये जुड़े. इसलिए ही हेग्रा को भी खोला जा रहा है.

सऊदी प्रिंस ने देश को पर्यटन में आगे ले जाने की योजना बनाई है


माना जा रहा है कि यूनेस्को हैरिटेज में शामिल हो चुका ये बेहद प्राचीन शहर दुनियाभर के सैलानिकों को अपनी ओर खींच सकेगा.

ये भी पढ़ें: Explained: हरे-भरे देश न्यूजीलैंड में क्यों लगने जा रही है क्लाइमेट इमरजेंसी?   

वैसे मजे की बात है कि जॉर्डन का ये शहर एक और शहर पेत्रा की ट्विन सिटी है. पेत्रा भी व्यापार में अग्रणी हुआ करता था. ये रेशम और मसाला व्यापार के रास्तों के लिए एक प्रमुख जंक्शन भी था. बाद में 363 ईस्वी में आए एक भूकंप से लगभग आधा शहर खत्म हो गया. इसके बाद व्यापारिक केंद्र होने के कारण यहां कई आक्रमण भी हुए और ये भी एक भूला हुआ शहर बन गया था.

साल 1812 में एक स्विस खोजकर्ता जोहान लुडविग बर्कहार्ट ने इसकी खोज की. यूनेस्को ने साल 1985 में इसे वर्ल्ड हैरिटेज घोषित किया. पहाड़ों की चट्टानों में बसा ये शहर भी अपने-आप एक अजूबा है. पहाड़ों के भीतर ही घर, मकान और पूजा स्थल बने हुए हैं. साथ ही यहां भी सैकड़ों कब्रें हैं. माना जाता है कि अब भी जमींदोज हो चुके शहर का आधा से भी कम हिस्सा सामने आया है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज