लाइव टीवी

अमीर सिंगल चीनी महिलाएं विदेशी स्पर्म से पैदा कर रही हैं बच्चे, नहीं करना चाहती शादी

News18Hindi
Updated: January 22, 2020, 5:07 PM IST
अमीर सिंगल चीनी महिलाएं विदेशी स्पर्म से पैदा कर रही हैं बच्चे, नहीं करना चाहती शादी
एक्सपर्ट्स का मानना है कि साल 2022 तक चीन का फर्टीलिटी बाजार 1.5 बिलियन डॉलर का हो जाएगा.

चीन (China) में बीते पांच सालों की दौरान शादी न करने का प्रचलन महिलाओं में बढ़ा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 22, 2020, 5:07 PM IST
  • Share this:
चीन की 39 वर्षीय अविवाहित महिला शियागुंझू के सामने बड़ी मुश्किल आ खड़ी हुई. वो अपना एक बच्चा तो चाहती थीं लेकिन शादी के बगैर. लेकिन चीन में अविवाहित महिलाओं को गर्भधारण के लिए स्पर्म बैंक के इस्तेमाल की सुविधा नहीं दी जाती है. शियागुंझू करियर के लिहाज से बेहद सफल हैं. चीन में आईवीएफ ट्रीटमेंट और स्पर्म बैंक के इस्तेमाल पर पाबंदी की वजह से उन्होंने अमेरिका का रुख किया. वहां से इलाज के जरिए उन्हें एक बच्चा हुआ, जो अभी एक साल का है. उनका बच्चा देखने में यूरोपीय लगता है. उसकी आंखें नीली हैं.

शियांगुझू अकेली महिला नहीं हैं जिन्होंने ऐसा कदम उठाया. चीन में ऐसी महिलाओं की बड़ी संख्या है जो करियर में सफल हैं और शादी नहीं करना चाहतीं. अब अगर ये महिलाएं आईवीएफ के जरिए प्रेगनेंट होना चाहती हैं तो देश में इसकी मनाही है. चीन में सामाजिक रूप से अविवाहित महिलाओं के गर्भधारण पर पाबंदी है. इसी वजह से अविवाहित महिला स्पर्म बैंक या आईवीएफ ट्रीटमेंट नहीं ले सकती.

शादी न करने का बढ़ा प्रचलन
बीते पांच सालों की दौरान चीन में शादी न करने का प्रचलन महिलाओं में बढ़ा है. एक चीनी समाजशास्त्री के मुताबिक पढ़ी-लिखी और करियर में सफल महिलाओं से शादी करने में पुरुषों को झिझक होती है. करियर में सफल महिला खुद भी ज्यादा सामाजिक बंधनों को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं. खुद शियागुंझू का मानना है कि पिता का होना जरूरी नहीं है. वो कहती हैं-आखिर लोग ऐसा क्यों सोचते हैं कि बच्चे बड़े होकर ये पूछेंगे ही कि उनके पिता का नाम क्या है?

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
एक्सपर्ट्स का मानना है कि साल 2022 तक चीन का फर्टीलिटी बाजार 1.5 बिलियन डॉलर का हो जाएगा. डेनमार्क के एक स्पर्म बैंक ने चीनी भाषा में एक वेबसाइट शुरू की है. इस बैंक ने चीनी लोगों से बातचीत करने के लिए चीनी भाषा बोलने वाला स्टाफ भी रखा है. बैंक का मानना है कि जल्दी ही चीन उनके लिए एक अच्छा निवेश साबित हो सकता है. अमेरिकी और यूरोपीय स्पर्म बैंकों का कहना है कि उनके यहां चीन के क्लाइंट्स की संख्या तेजी के साथ बढ़ रही है. लेकिन यूरोपीय देशों में ये इलाज कराना चीनी लोगों के लिए बहुत महंगा है.

china 1एक आंकड़े के मुताबिक यूरोपीय देशों से आईवीएफ की सुविधा का इस्तेमाल करना चीनी महिलाओं के लिए करीब 20 लाख रुपये के आस-पास पड़ता है. एक बार प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद महिलाओं को उस देश की कई बार यात्रा करनी पड़ती है. अगर महिला खर्च वहन कर सकती है तो वो पूरे समय उस देश में रह सकती है. लेकिन इन सबके बीच खर्च काफी ज्यादा आता है.

क्या मानता है नेशनल हेल्थ डिपार्टमेंट
चीन के नेशनल हेल्थ डिपार्टमेंट का मानना है कि स्पर्म बैंक का इस्तेमाल बांझपन के इलाज और जेनेटिक बीमारियों से बचने के लिए होना चाहिए. इस धारणा की वजह से अविवाहित महिलाएं स्पर्म बैंकों का इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं. चीन के एक फर्टीलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टर का कहना है कि हम इन महिलाओं की मदद करना चाहते हैं लेकिन हम पर राजनीतिक प्रतिबंध हैं. हालांकि वो इस प्रतिबंध को सही नहीं मानते.

प्रतीकात्मक तस्वीर


एक चीनी सामाजिक कार्यकर्ता एलन झांग का कहना है कि अगर हम ये सुविधाएं अपने देश में ही शुरू कर दें तो ये हमारे लिए फायदेमंद रहेगा. एलन ने अब तक सरकार को करीब 60 लेटर लिखे हैं. उन्होंने चीनी सरकार से अपील की है कि अविवाहित महिलाओं को भी स्पर्म बैंक का इस्तेमाल कर बच्चे पैदा करने की छूट मिलनी चाहिए. उनके मुताबिक अगर कोई महिला शादी नहीं करना चाहती तो ये उसकी मर्जी है. सरकार को इसका सम्मान करना चाहिए.

ये भी पढ़ें:

क्या ज्योतिषी के कहने पर रात में महिलाओं के कपड़े पहना करते थे एनटीआर
जब भारत हज यात्रियों के लिए जारी करता था स्पेशल 'हज रुपया'
करीम लाला और हाजी मस्तान जैसे अंडरवर्ल्ड डॉन ने कैसे बनाए थे नेताओं से कनेक्शन
क्यों हो रहा है शिरडी के साईं बाबा के जन्मस्थान पर विवाद, मंदिर कर सकता है इस तरह विरोध
तब भारतीय क्रिकेट टीम ट्रेन से चलती थी, मामूली होटलों में रुकती थी और मैच खेलने का मिलता था एक रुपयाइटली के एक और खूबसूरत कस्बे में केवल 70 रुपए में बिक रहे हैं बंगले
अब ठीक हो सकेंगे किसी भी तरह के कैंसर रोगी, नई रिसर्च से जगी आस


 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 22, 2020, 3:35 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर