US Election Result 2020: क्या बाइडन की जीत के बाद भी ट्रंप राष्ट्रपति बने रहेंगे?

हो सकता है कि जो बाइडन जीतें लेकिन तब भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही रहें- फोटो (flickr)
हो सकता है कि जो बाइडन जीतें लेकिन तब भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही रहें- फोटो (flickr)

इस बार अमेरिकी चुनाव के नतीजे (American presidential election result) केवल मतगणना पर आधारित नहीं होंगे, बल्कि इसमें कई बातें काम करेंगी. हो सकता है कि जो बिडेन (Joe Biden) जीतें लेकिन तब भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ही रहें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 6, 2020, 10:00 AM IST
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अमेरिका वो देश है, जिसने 'बनाना रिपब्लिक' टर्म दिया था, यानी वे देश जो राजनैतिक तौर पर अस्थिर हों. अब हालिया राष्ट्रपति चुनाव को देखते हुए अमेरिका खुद इस श्रेणी में खड़ा दिख रहा है. यहां पर वोटों की गणना के बीच ही मौजूदा राष्ट्रपति और रिपब्लिकन्स के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को विजेता घोषित कर दिया. विपक्षी पार्टी पर फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए ट्रंप ने कई बार कह दिया कि वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और राष्ट्रपति बने रहेंगे. जानिए, ट्रंप के दावों का आधार क्या है.

क्यों है अमेरिका का चुनाव अहम 
वैसे तो हर बार ही अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव पर दुनियाभर की नजरें होती हैं लेकिन इस बार छोटे-बड़े देश इसे बेहद गंभीरता से ले रहे हैं. असल में देशों की विदेश नीति पर इसका काफी असर होगा कि सत्ता में कौन आ रहा है. फिलहाल कई देशों के बीच तनाव गहराया हुआ है. चीन लगभग सारे देशों पर आक्रामक है. ऐसे में ट्रंप या बाइडन का आना देशों के राजनैतिक समीकरण में फेरबदल करेगा. यही वजह है कि ये चुनाव काफी अहम माना जा रहा है.

ट्रंप या बिडेन का आना देशों के राजनैतिक समीकरण में फेरबदल करेगा- सांकेतिक फोटो

चुनावों की गणना फिलहाल जारी है


न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, जो बाइडन को अब तक 253 इलेक्टोरल वोट मिल चुके हैं. अब उन्हें बहुमत के लिए 17 वोटों की जरूरत है. वहीं ट्रंप को अब तक 214 इलेक्टोरल वोट मिल चुके हैं और बहुमत के लिए उन्हें 56 वोटों की जरूरत होगी. आंकड़े ये बता रहे हैं कि बाइडन राष्ट्रपति पद के ज्यादा करीब हैं. हालांकि पासा पलट भी सकता है.

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ट्रंप जता रहे अविश्वास
इसकी वजह हैं ट्रंप, जो लगातार मतों की गिनती पर संदेह जता रहे हैं. वे दावा कर रहे हैं कि मेल-इन-बैलेट में बड़ी हेराफेरी हुई है. इस बात को इससे भी बल मिला है कि ये वोट पूरी तरह से डेमोक्रेट्स के पक्ष में हैं. लिहाजा ट्रंप इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट की मदद ले सकते हैं. वे जता चुके हैं कि कोर्ट ही अब फैसला करेगी. ट्रंप का मानना है कि कोर्ट की जांच के बाद वे ही विजेता होंगे.

पोस्टल बैलेट की ओर डेमोक्रेट्स का रुझान आंकड़ों में भी दिख रहा है- सांकेतिक फोटो (cnbc)


ये हैं आंकड़े 
पोस्टल बैलेट की ओर डेमोक्रेट्स का रुझान आंकड़ों में भी दिख रहा है. अमेरिका में लगभग 240 मिलियन वोटर हैं, इनमें से 91 मिलियन वोटरों ने 1 नवंबर तक वोट कर दिया था. सर्वे ये भी बता रहा है कि डेमोक्रेट्स की ओर रुझान रखने वाले लगभग 60% वोटरों ने वोट का यही सिस्टम चुना.

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मामला कोर्ट जा सकता है 
दूसरी तरफ ट्रंप समर्थक लगातार इस सिस्टम को सदी का सबसे बड़ा धोखा कह रहे हैं. वैसे कुछ दम इस बात में है भी. जैसे अगर कोई वोटर अगर एड्रेस दे या फिर अपना दस्तखत अलग तरीके से कर दे तो मामला संदिग्ध की श्रेणी में रखा जा सकता है. यानी कुल मिलाकर ट्रंप ऐसे वोटों को आधार बनाते हुए बाइडन की पार्टी को कोर्ट ले जा सकते हैं.

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पहले से कोर्ट रहा सक्रिय
हाल ही में अमेरिकी सीनेट में सुप्रीम कोर्ट के नए जज के लिए वोट हुआ, जिसमें ट्रंप की नामित एमी कोनी बैरेट जीतीं. ये ट्रंप की करीबी हैं. इसे भी ट्रंप का पक्ष मजबूत होता दिख रहा है. वैसे भी अमेरिका में राजनीति के मामले में सुप्रीम कोर्ट का दायरा काफी बढ़ा हुआ है. वो हमेशा से इसमें दखल दे पाई है. इसकी वजह ये है कि वहां पर चुनावों को लेकर कोई खास या पक्का नियम नहीं है.

अमेरिका के संविधान में चुनाव के बाद ट्रांसफर ऑफ पावर को लेकर अनिश्चचितता है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


यही वजह है कि अमेरिका में चुनाव से जुड़े विवाद लगातार कोर्ट जाते रहे हैं. इसका जिक्र एक किताब Election Meltdown: Dirty Tricks, Distrust, and the Threat to American Democracy में है. इसे देखते हुए ये अनुमान लगाया जा रहा है कि इस साल के चुनावी नतीजे भी आराम से पक्के नहीं होने वाले, बल्कि कोर्ट के जरिए ही रुकेंगे.

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सत्ता के हस्तांतरण पर भी सवाल
अगर ट्रंप हार जाएं तो भी पद पर बने रह सकते हैं, ऐसे कयास भी लगाए जा रहे हैं. इसकी वजह है अमेरिका का संविधान जिसमें चुनाव के बाद ट्रांसफर ऑफ पावर को लेकर अनिश्चचितता है. दरअसल अमेरिकी संविधान में सत्ता के शांतिपूर्वक हस्तांतरण की बात नहीं करता है, बल्कि वो इसका अनुमान लगा लेता है कि ऐसा ही होगा. ऐसे में अगर कोई प्रेसिडेंट हार के बाद भी सत्ता जीती पार्टी को देने से इनकार कर दे तो इसके लिए अमेरिकी संविधान में कोई अलग बात नहीं कही गई है.
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