नार्थ ईस्ट चुनावों में कैसे छोटे दलों ने सबको चौंकाया

उत्तर पूर्व के तीन राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में किस तरह एकदम नए छोटे दलों ने बदल दी सियासी तस्वीर

News18Hindi
Updated: March 7, 2018, 9:58 AM IST
नार्थ ईस्ट चुनावों में कैसे छोटे दलों ने सबको चौंकाया
उत्तर पूर्व के तीन राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में किस तरह एकदम नए छोटे दलों ने बदल दी सियासी तस्वीर
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Updated: March 7, 2018, 9:58 AM IST
उत्तर पूर्व यानि नार्थ ईस्ट के तीन राज्यों मेघालय, त्रिपुरा और नगालैंड में हुए चुनावों के नतीजे अगर चौंकाने वाले और उलटफेर करने वाले रहे हैं तो उतना ही चौंकाने वाला रहा है इन तीनों राज्यों में ऐसी छोटी पार्टियों का उभरना, जो पिछले विधानसभा चुनावों में या तो किसी गिनती में नहीं थीं या फिर उनका अस्तित्व ही नहीं था. इन सियासी दलों में ज्यादातर क्षेत्रीय पार्टियां ही रही हैं. इनमें कुछ ऐसी भी थीं, जिन्हें बमुश्किल दो - एक साल पहले ही बनाया गया था.

मेघालय
उत्तर पूर्व के राज्य मेघालय की आबादी करीब 32 लाख की है. 1972 में अलग राज्य बना. यहां अब तक नौ विधानसभाओं में 14 बार कांग्रेस सरकार बना चुकी है, जबकि आल पार्टी हिल लीडर्स कांफ्रेंस (एपीएचएलसी) ने चार बार सरकार बनाई है. अब ये पार्टी गायब हो चुकी है. यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी तीन बार सरकार बना चुकी है. नेशनल पीपुल्स पार्टी पहली बार एनडीए के तले सरकार बनाने जा रही है. यहां विधानसभा की 60 सीटें हैं.

कुल पार्टियां

इस राज्य में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों को लेकर एक दर्जन से ज्यादा पार्टियां हैं. इस विधानसभा चुनाव में ही करीब 11 दलों ने सक्रिय तौर पर चुनाव लड़ा.
छोटी पार्टियां, जिन्होंने चौंकाया

नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) - वर्ष 2013 में पीए संगमा ने ये पार्टी बनाई थी. इसे एनडीए से जोड़ा था. ये ऐसी पार्टी भी है, जिसे खर्चा नहीं बताने के कारण चुनाव आयोग ने सबसे पहले निलंबित भी किया. अब दल के मुखिया कोनराड संगमा हैं, जो मुख्यमंत्री बन रहे हैं. 2013 के विधानसभा चुनावों में एनपीपी के केवल दो विधायक थे. इस बार उसने 52 सीटों पर चुनाव लड़ा, 19 पर जीत हासिल की. कुल 323,500 वोट मिले. यानि 20.6 फीसदी. वो राज्य में कांग्रेस के बाद दूसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरी.
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एनपीपी अब यूनाइडेट डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी), पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ), हिल स्टेट पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (एचएसपीडीपी), बीजेपी और निर्दलीय के साथ मिलकर सरकार बना रही है.

पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ)
पीडीएफ की स्थापना कुछ महीने पहले हुई. ये मुख्य तौर पर मेघालय की क्षेत्रीय पार्टी है. जिसे पीएन शेयम और एल मेवाफियंग ने मिलकर बनाया. फ्रंट ने आठ सीटों पर चुनाव लड़ा, दो पर जीत हासिल की. कुल 128413 वोट मिले. जो कुल पड़े वोटों का 8.2 फीसदी हैं.

यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ)
यूडीएफ मेघालय की पुरानी पार्टी है. एनडीए का हिस्सा है. क्षेत्रीय पार्टी है. 27 सीटों पर चुनाव लड़ा. छह पर जीत मिली. कुल 182491 वोट मिले, जो 11.6 फीसदी हैं. उसे दो सीटों का नुकसान हुआ.

हिल स्टेट पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (एचएसपीडीपी)
राज्य की पुरानी पार्टी है लेकिन कभी मजबूत नहीं रही.15 सीटों पर चुनाव लड़ा. दो सीटें हासिल हुईं. एक सीट का फायदा हुआ. एचएसपीडीपी को कुल 84,011 वोट मिले (5.3 फीसदी). एनडीए में शामिल.

कुन हीनवर्तेप नेशनल अवेकनिंग मूवमेंट (केएचएनएएम)
पार्टी हाल ही में बनी. छह सीटों पर चुनाव लड़ा. एक पर जीत मिली. कुल 14164 वोट यानि 0.9 फीसदी वोट मिले.



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नगालैंड
नगालैंड 1963 में बना. यहां विधानसभा की कुल 60 सीटें हैं. जिसमें 59 पर चुनाव लड़ा गया. यहां ऐसी पार्टी सरकार बनाने जा रही है, जो कमोवेश पांच महीना पुरानी है. हालांकि वो चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर नहीं उभरी है. चुनावों में दस से ज्यादा सियासी दलों ने शिरकत की.

नगालैंड डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी)
ये पार्टी अक्टूबर 2017 में बनी है यानि मुश्किल से पांच महीने पहले. ये क्षेत्रीय पार्टी है. हालांकि पहले इसका नाम डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी था. ये पार्टी राज्य की सत्ताधारी पार्टी नेशनल डेमोक्रेटिव फ्रंट (एनडीएफ) के विद्रोहियों ने मिलकर बनाई. जनवरी में इसने बीजेपी से गठबंधन किया. पार्टी के अध्यक्ष चिंगवांग कोनयक हैं. लेकिन मुख्यमंत्री पद के दावेदार नेफयू रियो हैं. जिन्होंने जनवरी में ही ये पार्टी ज्वाइन की. एनडीपीपी ने 40 सीटों पर चुनाव लड़ा. 17 सीटें जीतीं. कुल 253090 (25.2 फीसदी) वोट मिले.

नगालैंड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एनडीएफ)
ये पार्टी 2002 में बनी. कई बार सत्ता में रह चुकी है. वर्ष 2017 में जब यहां उठापटक हुआ तो टीआर जेहलियांग के नेतृत्व में एनडीएफ ने सरकार बनाई. पिछली विधानसभा में एनडीएफ के पास 46 विधायक थे. लेकिन पार्टी में लगातार विद्रोह और असंतोष का सिलसिला चलता रहा. एनडीएफ ने 58 सीटों पर चुनाव लड़ा. 27 पर जीत हासिल कर सबसे बड़ी पार्टी बनी. उसे 389912 यानि 38.8 वोट (38.8 फीसदी) वोट मिले.

नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी)
ये पीए संगमा की बनाई पार्टी है, ये पांच साल पहले बनी थी, जिसने मेघालय के साथ नगालैंड में 25 सीटों पर चुनाव लड़ा था. दो जीत हासिल की. 69506 वोट (6.9 फीसदी) मिले.



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त्रिपुरा
इस राज्य की स्थापना 1972 में हुई. ये देश के सबसे छोटे राज्यों में है. यहां पिछले 25 बरसों से लेफ्ट फ्रंट का शासन था लेकिन इस बार बीजेपी यहां सरकार बना रही है. इस राज्य में एक दर्जन से ज्यादा दलों ने चुनाव में शिरकत की. यहां भी कुछ छोटे दलों ने कमाल किया है तो कुछ दलों ने बड़े दलों की गणित बिगाड़ी है. यहां 60 विधानसभा सीटों में 59 पर चुनाव हुए

इंडीजीनियस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी)
आईपीएफटी त्रिपुरा का पुराना दल था लेकिन फिर इसका विलय हुआ और वर्ष 2001 में इसका इंडीजीनियस नेशनल पार्टी ऑफ त्रिपुरा में विलय हो गया. लेकिन वर्ष 2009 में फिर ये आईएनपीटी से अलग हो गया. इसके नेता एन सी देबरमा हैं. चुनावों से पहले इसका बीजेपी के साथ गठबंधन हुआ. इसने 9 सीटों पर चुनाव लड़ा और आठ पर जीत हासिल की. इसे 173,603 वोट मिले यानि 7.5 फीसदी

त्रिपुरा के चुनाव में इस बार कई छोटी पार्टियों ने शिरकत की, जिन्होंने वोट काटने का काम बखूबी किया. इसमें आरएसपी, एआईएफबी, आईएनपीटी, टीपीपी, अमरा बंगाली, टीएमसी, सोशलिस्ट यूनियन सेंटर ऑफ इंडिया (एनएसपीटी) जैसी पार्टियां शामिल हैं.



 
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