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डायनासोर के महाविनाश के बाद सांपों की विविधता का हुए था विस्फोट- शोध

डायनासोर के महाविनाश के बाद सांपों की विविधता का हुए था विस्फोट- शोध

डायनासोर के महाविनाश के बाद पृथ्वी पर सांपो (Snakes) की प्रजाति में तेजी से विविधता  देखने को मिली. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

डायनासोर के महाविनाश के बाद पृथ्वी पर सांपो (Snakes) की प्रजाति में तेजी से विविधता देखने को मिली. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

6.6 करोड़ साल पहले महाविनाश (Mass Extinction) में डायनासोर (Dinosaurs) सहित कई प्रजातियों के खत्म होने के बाद सांपों (Snakes) की विविधता में बहुत तेजी देखने को मिली थी. इसकी वजह सांपों की बहुत सी खूबियां थीं.

    दुनिया में पृथ्वी पर जीवन के इतिहास (History of Life) में लोगों कि डायनासोर (Dinosaurs) और उनके अंत के बारे में ज्यादा चर्चाएं होती हैं. डायनासोर विषय पर भी अध्ययन बहुत हुए हैं, लेकिन 6.6 करोड़ साल पहले उनका विनाश करने वाली घटना के बाद जीवन का विकास कैसा रहा इस पर हुए शोधों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता है. लेकिन एक नए अध्ययन ने डायनासोर युग के बाद के समय पर एक रोचक जानाकरी निकाली है. उस महाविनाश के बाद सांपों (Snakes) में बहुत सारी विविध प्रजातियां अस्तित्व में आई थीं और जैवविविधता की कमी को सांपों के इस जनसंख्या विस्फोट ने काफी हद तक पूरा कर दिया था.

    सांपों की जनसंख्या में विस्फोट
    डायनासोर के विनाश के बाद पक्षियों, स्तनपायी जीवों और पैर रहित सरीसृपों की जनसंख्या में एक तरह का विस्फोट हो गया था. इस अद्ययनके शोधकर्ताओं का कहना है कि इस सेनोजोइक युग में स्तनपायी जीवों की इतनी ज्यादा विविधता थी कि इसे स्तनपायी जीवों का युग कहा जाता है. लेकिन यह भी सच है कि इस युग में जितने स्तनपायी जीवों की प्रजातियां हुई उतनी ही सांपों की भी प्रजातियां देखने को मिली. इसलिए इसे सर्पों का युग भी कहा जा सकता है.

    बहुत से अनसुलझे सवाल
    आज दुनिया में सांपों की करीब चार हजार प्रजातियां  हैं. लेकिन इतनी विविधता कहां से, कब और क्यों आई, ऐसे सवालों के जवाब वैज्ञानिक आज भी तलाश रहे हैं. समस्या ये है कि सांपों का जीवाश्म रिकॉर्ड बहुत कम मिलते हैं और जो आज जिंदा है  वे इतने शर्मीले और छिपकर रहने वाले होते हैं कि उनके बारे में जानकारी जमा करना बहुत मुश्किल होता है.

    इस वजह से अनिश्चितताएं
    एक समस्या और यह भी है कि वैज्ञानिकों ने शोध के मामलों में इंसानों की तरह गर्म खून वाले जीवों को ज्यादा तरजीह दी है. यही वजह है कि जानकारी के अभाव में सांपों के विकास के मॉडलों में इतनी ज्यादा अनिश्चितताएं हैं. लेकिन इस अध्ययन में नए मॉडल ने जानकारी की इस कमी को पूरा करने की पूरी कोशिश की है.

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    सांपों में यह विविधता डायनासोर (Dniosaurs) के विनाश के बाद ही आई थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    बहुत कम आंकड़े
    इस अध्ययन में 882 जिंदा सर्प प्रजातियों के प्रकाशित अध्ययन के आकंड़ों की तुलना संग्रहलायों में जमा नमूनों से की है. यह पहली बार सांपों के उद्भव विश्लेषण में इस तरह से आंकड़ों को अध्ययन में शामिल किया गया है. इसमें आंकड़े में सांपों की सभी बताई जा चुकी प्रजातियों की चौथाई भी शामिल नहीं थी.

    बहुत जल्दी आती गई विविधता
    यह पड़ताल बताती है कि पारिस्थितिकी अवसरों के मिलते ही जानवरों के वंशज जल्दी ही विविधता को प्राप्त होते गए. इसी का नतीजा यह रहा कि विविधता में एक विस्फोट हो गया जिसके बाद पारिस्थितिकी तंत्र जैवविविधता से तर बतर हो गया, विविधता की गति में कमी आ गई.

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    सांपों (Snakes) में इतनी तेजी से विविधता की वजह उनकी हालात के मुताबिक ढलने की क्षमता के कारण आई थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    सांपों का खानपान
    नए मॉडल के मुताबिक पुरातन सांपो के खान पान की प्रवृत्ति में बदलाव आ गया. यहां तक कि आज के सभी सांपों के पूर्वज पहले भी कीड़े मकोड़े ही खाया करते थे. डायनासोर के काल के समय आए महाविनाश के बाद सांपों के खानपान में विविधता शुरू हो सकी. इस मॉडल के मुताबिक आज के अधिकांश सांप छिपकली खाने वाला पूर्वजों से हुई है.

    नए शोध इस बात पर एक मत हैं कि सांपों की प्रजातियों में विविधता डानासोर के विनाश के बाद ही हुआ था. लेकिन उनमें नए पारिस्थितिकी हालात में ढलने की बहुत अधिक क्षमता थी. उन्होंने अपने खान में काफी विविधता पैदा की. इसी गुण ने इनकी प्रजातियों में काफी विविधता पैदा कर दी. यह अध्ययन पीएलओएस बायोलॉजी में प्रकाशित हुआ है.

    Tags: Dinosaurs, Earth, Research, Science

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