बहुत फायदेमंद है तेजी से चार्ज होने वाली नई बैटरी, जानिए कैसे करती है यह काम

बहुत फायदेमंद है तेजी से चार्ज होने वाली नई बैटरी, जानिए कैसे करती है यह काम
शोधकर्ताओं ने ऐसी बैटरी (Batteries) बनाई है जिसमें लीथियम (Lithium) की जगह सोडियम (Sodium) का उपयोग होता है और यह तेजी से चार्ज करती है.

शोधकर्ताओं ने ऐसी बैटरी (Batteries) बनाई है जिसमें लीथियम (Lithium) की जगह सोडियम (Sodium) का उपयोग होता है और यह तेजी से चार्ज करती है.

  • Share this:
  • fb
  • twitter
  • linkedin
नई दिल्ली: क्या आपके लैपटॉप (Laptop) या मोबाइल की बैटरी (Battery) चार्ज करने में बहुत ज्यादा समय लगाती है? क्या कुछ सालों में उसका परफॉर्मेंस (performance) कम होने लगता है? ऐसी ही समस्याओं का समाधान एक नई प्रोटोटाइप बैटरी से मिला है जिसमें लीथियम (Lithium) जैसे पदार्थ के उपयोग की जरूरत नहीं पड़ती.

क्या है यह बैटरी
बैटरी में लीथियम की जगह सोडियम का उपयोग कर लंदन इंपीरियल कॉले के वैज्ञानिकों ने एक तेजी से चार्ज होने वाले प्रोटोटाइप बैटरी बनाई है. यह नई पद्धति दीर्घकालिक बैटरी के लिए नए रास्ते खोल सकती है. शोधकर्ताओं ने लीथियम के विकल्प के तौर पर सोडियम को चुना क्योंकि यह लीथियम से ज्यादा मात्रा में मिल जाता है और उससे अधिक आसानी से उपलब्ध भी हो जाता है.

और भी हैं फायदे



लीथियम को उत्खनन महंगा है और सोडियम पर्यावरण को नुकसान भी नहीं पहुंचाता है. इस प्रोटोटाइप में कई ऐसे पदार्थों का उपयोग किया गया है जो उन भारी धातुओं की जगह इस्तेमाल में लाए जा सकते हैं जिनका लीथियम की तरह ही सघन उत्खनन होता है.



क्या कहते हैं शोधकर्ता
प्रमुख शोधकर्ता और इंपीरियल के प्रोसेसेबल इलेक्ट्रनिक केंद्र एवं कैमिस्ट्री विभाग के डॉ फ्लोरेन ग्लोक्लोफर ने कहा कि बहुत से लोग को लीथियम आयन आधारित बैटरी के व्यापक उपयोग और उनके पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों की चिंता है. ये नई सोडियम आयन बैटरी इन चिंताओं को दूर कर सकती हैं.

mobile
परंपरागत लीथियम बैटरी चार्ज करने में समय लगाती है.


इस वजह से भी है यह ज्यादा उपयुक्त
डॉ फ्लोरेन ने कहा, “बहुत से लोगों के अनुभव में आया है कि जैसे जैसे उपकरण पुराना होता जाता है लीथियम बैटरी अपनी क्षमता खो देती हैं. लेकिन हमारी प्रोटो टाइप बैटरी ने 500 बार चार्ज करने के बाद भी अपनी क्षमता नहीं गंवाई. इससे साफ है कि व्यावसायिक तौर पर इसके उत्पादन में कोई परेशानी नहीं होगी.

कैसे किया गया सोडियम का उपयोग
सोडियम आयन लीथियम आयन से ज्यादा अहम हैं लेकिन वैज्ञानिकों के लिए चुनौती यह थी कि वे सोडियम आयन को स्टोर करने वाले इलेक्ट्रोड सामग्री को ढूंढ पाएं. नए मॉडल के लिए वैज्ञानिकों ने इलेक्ट्रोड के लिए एक ऑर्गेनिक पदार्थ का प्रयोग किया जिसे मैक्रोसाइक्लिक कहा जाता है.  ये पदार्थ केवल हाइड्रोजन और कार्बन से बने होते हैं जिनमें एक रिंग के आकार की संरचना होती है जिसके केंद्र में छेद होता है.

कैसे काम होता है इसमें
मैक्रोसाइक्लिक अणुओं के केंद्र में  हमेशा ही जगह होती है चाहे उनका घनत्व कितना ही ज्यादा क्यों न हो. इस जगह पर सोडियम आयन आसानी से आ जाते हैं और इससे पदार्थ में कुछ खराबी भी नहीं होती. इस रिंग संरचना के कारण इलेक्ट्रॉन रिंग के आसपास फैलाए जा सकता है. जितने ज्याद वे फैलेंगे उतना ही उनके बैटरी के तत्वों से प्रतिक्रिया करने की संभावना कम होगी. इसकी वजह से बैटरी में स्थायित्व ज्यादा होगा और वह हर बार चार्ज करने या डिसचार्ज करने से अपनी क्षमता नहीं गंवाएगी.

सोडियम आयन वाली बैटरी तेजी से चार्ज और डिसचार्ज होती है.


तेजी से चार्ज करने की क्षमता
इन मैक्रोसाइक्लिक अणुओं की वजह से दो इलेक्ट्रॉन एक साथ लिए जा सकते है जिससे चार्जिंग तेज से होगी. यह प्रोटोटाइप बैटरी तेजी से चार्ज और डिसचार्ज हो सकती है, लेकिन फिर भी वह कई बार चार्ज और डिसचार्ज होने के बाद भी स्थायी रहेगी.

इस बैटरी की पॉवर क्षमता परंपरागत लीथियम बैटरी से कम है, लेकिन शोधकर्तो अपनी इलेक्ट्रोड सामग्री में सुधार कर रहे हैं. जिससे उसकी क्षमता बढ़ जाए और सोडियम आयन बैटरी को भविष्य में बाजार में उतारा जा सके.

यह भी पढ़ें:

खगोलविदों ने देखा अजूबा, प्रकाश से भी तेज गति से पदार्थ फेंक रहा है ब्लैक होल

कैसे धरती से टकराई बड़ी चट्टान और महाविनाश से खत्म हो गए डानासोर- शोध ने बताया

NASA के रोवर उपकरण को मिला है शेरलॉक होम्स का नाम, सीवी रमन से भी है इसका नाता

सूर्य के निकटतम तारे के पास पृथ्वी जैसे ग्रह की हुई पुष्टि, जानिए क्यों है खास

दो गैलेक्सी के टकराने से शुरू हुई थी हमारे सौरमंडल के बनने की प्रक्रिया
First published: May 30, 2020, 5:40 PM IST
अगली ख़बर

फोटो

corona virus btn
corona virus btn
Loading