सौरमंडल और अंतरतारकीय अंतरिक्ष के बीच की सीमा का बना नक्शा है बहुत खास

अंतरतारकीय अंतरिक्ष (Interstellar Space) और सौरमंडल के बीच की सीमा का नक्शा बहुत उपयोगी साबित होगा. . (तस्वीर: NASA/JPL-Caltech)

NASA के आंकड़ों का उपयोग कर वैज्ञानिकों ने सौरमंडल (Solar System) और उसके बाहर के अंतरतारकीय अंतरिक्ष (Interstellar Space) के बीच की सीमा का त्रिआयामी नक्शा बनाया है.

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    हाल के कुछ सालों में हमरे खगोलविज्ञानिकों को उन्नत किस्म के टेलीस्कोप उपलब्ध होने लगे हैं. इससे हमारे वैज्ञानिकों को अंतिरक्ष की बेहतर जानकारी मिल रही है. वे ना केवल ज्यादा दूरी के पिंडों को खोज पा रहे हैं, बल्कि वे खोजे गए पिंडों का भी विस्तार से अवलोकन कर पा रहे हैं. इसी वजह से वे ब्रह्माण्ड के कई हिस्सों का नक्शा बनाने में भी सफल हुए हैं. अब हमारे वैज्ञानिकों ने पहली बार हमारे सौरमंडल (Solar System) और उसके बाहर के अंतरिक्ष (Interstellar Space) की सीमा का त्रिआयामी नक्शा (3D Map) बनाने में सफलता पाई है.

    नासा के सैटेलाइट के आंकड़े
    वैज्ञानिकों ने नासा के आईबीईएक्स सैटेलाइट के आंकड़ों का उपयोग कर हेलियोस्फियर का पहली बार नक्शा तैयार किया है. इससे शोधकर्ताओं को सौर पवनों और अंतरतारकीय पवनों के बीच की अंतरक्रिया की जानकारी मिल सकेगी. यह अध्ययन एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है.

    लंबे समय से चल रहा था काम
    लॉस एलोमोस नेशनल लैबोरेटरी के वैज्ञानिक और शोधपत्र के प्रमुख लेखक डैन रेजिनफेल्ड ने बताया कि लंबे समय से भौतिकी के मॉडल्स इस सीमा पर सिद्धांततः काम कर रहे थे. लेकिन यह पहली बार है कि शोधकर्ता इसे नापने में सफल हो सके और इसका त्रिआयामी मैप बना सके.

    सूर्य से अंतरतारकीय अंतरिक्ष तक
    हेलियोस्फिर वह बुलबुला है जो सौर पवन बनाती हैं, जो सूर्य से निकलने वाली प्रोटोन, इलेक्ट्रॉन और एल्फा कणों की धारा है. सौरपवनों का विस्तार अंतरतारकीय अंतरिक्ष तक है और ये पृथ्वी को अंतरतारकीय विकिरणों से बचाने का काम भी करती हैं. रेजिनफेल्ड और उनकी टीम के दूसरे वैज्ञानिकों ने नासा के अर्थ ऑर्बिटिंग इंटरस्टैलर बाउंड्री एक्प्लोरर (IBEX) सैटेलाइट के आंकड़ों का उपयोग किया जो हेलियोशीथ से आने वाले कणों की पहचान करने का काम करता है.

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    शोधकर्ताओं ने सौरमंडल (Solar System) के बाहर जाने वाली सौर पवनों के अध्ययन से इस सीमा की जानकारी निकाली. प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


    हेलियोपॉज है वह खास क्षेत्र
    हेलियोशीथ सौरमंडल और अंतरतारकीय अंतरिक्ष के बीच की सीमा को कहते हैं. टीम इसी जोन की कगार, जिसे हेलियोपॉज कहते हैं, का नक्शा बनाने में कामयाब हो सकी. ये वही क्षेत्र है जहां सौर पवन अंतरतारकीय अंतरिक्ष से सूर्य की ओर आते समय अंतरतारकीय पवनों से टकराती है. इसके लिए शोधकर्ताओं ने उसी तकनीक का उपयोग किया जिसमें चमगादड़ सोनार का उपयोग करती हैं.

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    सौरपवनों का ही उपयोग
    रेजिनफेल्ड ने बताया कि जिस तरह से चमगादड़ सोनार की तरंगें हर दिशा में भेजती हैं और वापस आने वाली तरंगों से आसपास के इलाके के मानसिक नक्शा बनाती है उसी तरह शोधकर्ताओं ने हेलियोस्फियर की नक्शा बनाने के लिए सौर पवनों का उपयोग किया जो हर दिशा में जाती हैं.

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    यह सीमा हेलियोस्फियर के ठीक बाहर अंतरतारकीय अंतरिक्ष (Interstellar Space) में मौजूद है.
    (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


    खास परमाणु मापन से पहचान
    इसके लिए शोधकर्ताओं ने IBEX सैटेलाइट के ऊर्जावान तटस्थ परमाणु (ENA) के मापन का उपयोग किया जो सौर पवनों के कण और अंतरतारकीय पवनों के टकराव की वजह से बने थे. इन संकेतों की तीव्रता सौरपवनों के हेलियोशीथ से टकराव की तीव्रता पर निर्भर करती है. जब तरंगे शीथ से टकराती है तो ENA की संख्या बढ़ जाती है जिसे IBEX पहचान लेता है.

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    शोधकर्ताओं ने बताया कि  सौर पवन के संकेत एक खास पैटर्न बनाती हैं. IBEX उसी पैटर्न को वापसी के  ENA संकेतों में देख पाता है. इन्हीं संकेतों के आधार पर एक निश्चित दिशा में हेलियोस्फियर की दूरी पता लगाई जाती है. इसी के आधार पर त्रिआयामी नक्शा बनाया गया.

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