उल्कापिंडों के अध्ययन से सौरमंडल के इतिहास की मिली जानकारी

उल्कापिंड (Meteorites) के अध्ययन से हमारे सौरमंडल (Solar System) के इतिहास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है.

उल्कापिंड (Meteorites) के अध्ययन से हमारे सौरमंडल (Solar System) के इतिहास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है.

क्षुद्रग्रह (Asteroids) से निकले उल्कापिंडों (Meteorites) के चुंबकत्व (Magnetism) का अध्ययन कर शोधकर्ताओं ने हमारे सौरमंडल (Solar System) के इतिहास के बारे में कुछ रोचक जानकारी निकाली है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 6, 2020, 1:16 PM IST
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हमारे सौरमंडल (Solar System)की उत्पत्ति में वैज्ञानिकों और खगोलविदों को विशेष रुचि है. यदि सौरमंडल के इतिहास (History) की सटीक जानकारी मिल जाए तो न केवल पृथ्वी (Earth) की कई समस्याएं हल हो सकेगीं, बल्कि पृथ्वी के बाहर जीवन तलाशना भी आसान हो जाएगा. ताजा शोध में वैज्ञानिकों ने उल्कापिंडों (Meteorites) के मैग्नेटिज्म (Magnetism) का अध्ययन कर सौरमंडल के इतिहास (History of Solar System) की कुछ जानकारी हासिल करने में सफलता पाई है.

खास किस्म के उल्कापिंड

मैग्नेटिज्म का उपयोग कर रोटेस्टर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह पड़ताल की. इससे वे यह पता लगाने में सफल रहे कि सौरमंडल के अंदर कार्बोनेसियस कोन्ड्राइट क्षुद्रग्रह पहली बार कब आए थे जो पानी और अमीनो एसिड से समृद्ध रहते हैं. इस विश्लेषण से शोधकर्ताओं को सौरमंडल की उत्पत्ति के बारे में जानने में मदद मिलेगी.

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उल्कापिंड (Meteorites) का चुंबकत्व (Magnetism) बहुत से जानकारी का जरिया बना है.(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

बहुत काम की जानकारी मिलने की उम्मीद

इस विश्लेषण से यह भी पता चलेगा कि क्यों पृथ्वी जैसे ग्रहों पर जीवन पनप जाता है जबकि मंगल जैसे ग्रह में ऐसा कुछ नहीं है. रोचेस्चर में अर्थ और एनवायर्नमेंट विभाग में प्रोफेसर और रिसर्च फॉर आर्ट्स, साइंस एंड इंजीनियरिंग के डीन विलियम आर केनन एवं जॉन टार्डूनो ने बताया, “सौरमंडल के इतिहास की व्याख्या करने में खगोलविदों की खासी रुचि है. साथ ही बाह्यग्रहों की खोज में भी जिनसे यह पता लग सकत है कि दूसरे सौरमंडल में वैसी ही घटनाएं होती हैं जैसी हमारे सौरमंडल में हैं. यह दूसरे जीवन की संभावना वाले ग्रहों की खोज में एक और मुद्दा है.

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उल्कापिडों का चुंबकत्व

उल्का पिंडों के चुंबकत्व इस बारे में बेहतर जानकारी दे सकते हैं कि कोई पिंड कब बना था और वह सौरमंडल के इतिहास के शुरु में कहां पर स्थित था. टार्डूनो का ने कहा, “हमने बहुत साल पहले यह पता कर लिया था कि हम क्षुद्रग्रहों से निकले उल्कापिंड के मैग्नेटिज्म का पता लगा सकते हैं वे पहले कहां स्थित थे और जब इन उल्कापिंडों में मैग्नेटिक पदार्थ बना तब वे सूर्य से कितनी दूर थे.

इस उल्कापिंड ने दी जानकारी

वैज्ञानिकों ने एलेंडे उल्कापिंड से मिले मैग्नेटिक आंकड़ों का अध्ययन किया जो साल 1969 में पृथ्वी में मैक्सिको पर गिरा था. यह पृथ्वी पर पाया गया अब तक का सबसे बड़ा कार्बनेसियस कोन्ड्राइट उल्कापिंड है. इसमें कैल्शयम और एल्यूमिनियम के खजिन पाए गए थे जिनके बारे में माना जाता है कि वे हमारे सौरमंडल के पहले ठोस पदार्थ हैं.

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गुरू (Jupiter) और शनि (Saturn) का सौरमंडल के बहुत सारे पिंडों के निर्माण में भूमिका है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


इस सवाल का जवाब

पिंडों के निर्माण के समय और उनके स्थान का पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने शुरू में उल्कापिंड के उस विरोधाभास को सुलझाने का प्रयास किया जिससे वैज्ञानिक लंबे समय से परेशान थे. वह था कि उल्कापिडों को चुंबकत्व कब मिला. रोचेस्टर स्नातक छात्र और इस शोध के पहले लेखक टिम ओब्रायन ने पाया कि इससे पहले वैज्ञानिकों ने जो मैग्नेटिक संकेतों की पड़ताल की थी वे वास्तव में क्रोड़ से निकले थे. जबकि मैग्नेटिज्म आलेंदे के असामान्य मैग्नेटिक खनिजों का गुण हैं.

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एक अन्य शोध के साथ मिलाकर किए गए सिम्यूलेशन्स ने बताया कि सौर पवनों का सौरमंडल के सभी पिंडों पर असर हुआ जिसने उन्हें चुंबकीय कर दिया. वैज्ञानिकों को पता चला कि जिस  क्षुद्रग्रह से कार्बनेसियस कॉन्ड्राइट उल्कापिंड टूटा ता वह क्षुद्रग्रह की पट्टी में 45620 लाख साल पहले आया था. यह हमारे सौरमंडल के इतिहास के पहले 50 लाख साल का समय था. इससे शोधकर्ताओं का यह भी पता चला कि क्षुद्रग्रहों पर गुरु और शनि जैसे भारी ग्रह का बहुत असर रहा है. इनकी क्षुद्रग्रह और अन्य ग्रहों के निर्माण तक में भूमिका रही है.
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