अगर नौवां ग्रह है, तो कहीं और ही होना चाहिए उसे, जानिए क्या कहती है नई जानकारी

प्लैनेट नाइन (Planet Nine) के बारे में कहा जाता है कि उसका आकार नेप्चूयन के जैसे होना चाहिए. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

प्लैनेट नाइन (Planet Nine) के बारे में कहा जाता है कि उसका आकार नेप्चूयन के जैसे होना चाहिए. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

सौरमंडल (Solar System) में नौवें ग्रह (Planet Nine) के बारे में बताने वाले खगोलविदों (Astronomers) ने अपनी जानकारी को अपडेट करते हुए उसकी वर्तमान स्थान के अनुमान में बदलाव किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 28, 2021, 9:28 AM IST
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बहुत से वैज्ञानिकों का मानना है कि हमारे सौरमंडल (Solar System) का एक नौवां ग्रह (Planet Nine) भी है. इसके बारे में कई तरह के मत दिए गए हैं. पहले प्लूटो  को नौवें ग्रह का दर्जा दिया गया था, लेकिन बाद में उससे यह दर्जा छीन कर उसे बौना ग्रह करार दिया गया. लेकिन इस नौवे ग्रह, जिसकी हम बात कर रहे हैं माना जाता है कि बहुत विशाल ग्रह है और नेप्च्यून ग्रह (Neptune) के आगे उसकी कक्षा है जिसमें रहकर वह सूर्य का चक्कर लगाता है. ताजा अध्ययन में बताया गया है कि यह रहस्यमयी ग्रह वहां नहीं होगा जहां इसकी उम्मीद की जा रही थी.

नई जानकारी ने किए बदलाव

इस ग्रह की खोजबीन में लगे खगोलविदों का कहना है कि नई जानकारी को शामिल करने के बाद पता चला है कि इस नौवें ग्रह की कक्षा जितनी हाल ही में उम्मीद की गई थी उससे कहीं ज्यादा अंडाकार होनी चाहिए. इतना ही नहीं खगोलविदों ने इस ग्रह के आकार के बारे में किया गया पुराना अनुमान तक बदला है.

पांच साल पहले सामने आई थी इस ग्रह की अवधारणा
इस ग्रह के खोजबीन साल 2016 में तब और ज्यादा तेज हुई जब कैल्टैक के दो खगोलविद कोन्सटैन्टाइन बैटीजिन और माइकल ब्राउन ने द एस्ट्रोनॉमिकल जर्नल में अपना शोधपत्र प्रकाशित किया. उस शोधपत्र में उन्होंने सौरमंडल के इस अनखोजे ग्रह के बारे में बताया था. उन्होंने बताया था कि इस ग्रह के होने के प्रमाण नेप्च्यून ग्रह की कक्षा के बाहर मौजूद दूसरे पिंडों में हैं.

ईटीएनओ का महत्व

नेप्च्यून ग्रह की कक्षा के बाहर मौजूद इन पिंडों को एक्स्ट्रीम ट्रांस-नेप्च्यूनियन ऑब्जेक्टस (ETNOs) कहा जाता है. इन पिंडों की बहुत ही बड़ी कक्षा होती है. और अपनी कक्षा में रहने के दौरान ये कभी सूर्य के पास आते समय नेप्च्यून की कक्षा को पार नहीं करते है, जैसा कि धूमकेतु करते हैं. ये सूर्य के पास आते समय कभी 30 खगोलीय ईकाई से ज्यादा पास नहीं आते हैं. और इनकी अधिकतम दूरी 159 खगोलीय ईकाई से ज्यादा नहीं होती है.



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खगोलविदों को नेप्च्यून (Neptune) के बाहर के पिंडों में ग्रह योग्य पिंड नहीं मिल रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


सिम्यूलेशन से पता चला

बैटीजिन और ब्राउन ने पाया कि ये कक्षाएं उपसौर या पेरिहीलियन पर समान कोण बनाती हैं. उपसौर वह बिंदु होता है जो किसी कक्षा में सूर्य के सबसे पास होता है. खगोलविदों ने सिम्यूलेशन की शृंखला चलाई और पाया कि केवल विशाल ग्रह का गुरुत्व ही इन कक्षाओं को इस तरह प्रभावित कर सकता है.

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मददगार हो सकती है यह जानकारी

इस शोधपत्र के आने के बाद यह सिद्धांत बहुत विवाद में रहा. बहुत से खगोलविदों ने तो कहा कि नौवें ग्रह के अस्तित्व की संभावना नहीं है. फिलहाल वैज्ञानिकों को पास किसी भी पक्ष के लिए पुष्ट प्रमाण नहीं हैं. लेकिन नौवें ग्रह की पड़ताल में बैटीजिन और ब्राउन की नई जानकारी मददगार हो सकती है. दोनों का शोधपत्र एस्ट्रोफिजकल जर्लन लैटर्स में प्रकाशन के लिए स्वीकार हो गया है.

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सौरमंडल के ठीक बाहर ऊर्ट बादलों ने नेप्च्यून ग्रह (Neptune) के बाहर के ग्रहों को प्रभावित किया है. (फाइल फोटो)


अभी तक 19 पिंड मिले

खगोलविदों ने अब तक 19 ईटीएनओ का पता लगाया है जो नौवें ग्रह के दावेदार हैं. लेकिन इनके विशाल ग्रह के हाने के  बारे में भी पता नहीं चला है जबकि कई बहुत छोटे हैं. शोधकर्ताओं ने अपनी गणना को अपडेट करते हुए इस सवाल पर जोर दिया है कि क्या उनके सिम्यूलेशन में कुछ छूट तो नहीं रहा है. उनके सतत प्रयासों से इस सवाल का जवाब हां में मिला है.

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ऊर्ट बादलों की भूमिका

शोधकर्ताओं पाया कि उनकी गणनों में ऊर्ट बादलों को शामिल नहीं किया गया था. सौरमंडल से पृथ्वी सूर्य की दूरी के दो हजार से एक लाख गुना दूरी के बीच हैं. जबकि शोधकर्ताओं ने 10 हजार गुना दूरी से बाहर के पिंडों को सौरमंडल के प्रभाव से बाहर माना था. इससे नौवें ग्रह की स्थिति  में बहुत ज्यादा बदलाव आ गया.
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