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सैनिक बिना बोले कर सकेंगे बात, जानिए इस पर क्या कह रहा है अमेरिकी शोध

इस शोध से वैज्ञानिक ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं जिससे सैनिक (soldiers) बिना आवाज किए (Silently) बात कर सकेंगे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
इस शोध से वैज्ञानिक ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं जिससे सैनिक (soldiers) बिना आवाज किए (Silently) बात कर सकेंगे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

अमेरिका (USA) के आर्मी रिसर्च ऑफिस के समर्थन से हो रहे शोध में दिमाग (Brain) से निकलने वाले ऐसे संकेतों (Signals) को छांट लिए हैं जिनके जरिए सैनिक भविष्य में आपास में बिना बोले ही संचार (Communicate) कर सकेंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 29, 2020, 6:45 AM IST
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सेना (Army) को ताकतवर बनाने के लिये यूं तो बहुत सारे तकनीकी शोध (Technical Research) हो रहे हैं, लेकिन अमेरिकी सेना (US Army) बहुत सी यूनिवर्सिटी (Universities) के साथ मिलकर एक अनोखा शोध कर रही है. सैनिकों (Soliers) लिए टेलीपैथिक ब्रेन सिग्नल कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी (Telepathic Brain Signal communication Technology) नाम का यह शोध भविष्य में उन्हें बिना आवाज किए (Silently) संचार करने की क्षमता दे सकता है.

इन संकेतों की पहचान
अमेरिका के सैन्य शोध ऑफिस की ओर से अनुदानित इस नए शोध में शोधकर्ताओं ने सफलता पूर्वक दिमाग के उन संकेतों को अलग करने में सफलता हासिल की है जो व्यक्ति के बर्ताव या कार्य को प्रभावित करते हैं.  एक एल्गॉरिदम और जटिल गणित का उपयोग कर शोधकर्ताओं की टीम उन संकेतों की पहचान कर सके जो गति, बर्ताव से संबंध रखते हैं. इतना ही नहीं इसके बाद वे इन संकेतों को दिमाग के अन्य संकेतों से भी अलग करने में सफल रहे.

कितनी उपयोगी है यह उपलब्धि
दिमाग के इन संकेतों को छांटना उन कार्य आधारित संकेतों को कूट पता करने की दिशा में पहला कदम हो सकते हैं. दक्षिणी कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की अगुआई में हो रहे शोध कार्यक्रम में  लॉसएंजेलिस, बेर्केले, ड्यूक यूनिवर्सिटी और बहुत सी यूके यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता भी शामिल हैं.



क्या लक्ष्य था शोधकर्ताओं का
शोधकर्ताओं का लक्ष्य यह पता करना था कि क्या मशीन सैनिकों के दिमाग को फीडबैक दे सकती है या नहीं जिससे वे कुछ घटित होने से पहले हालात सुधारने के लिए कारगर कदम उठा सकें. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह ऐसी क्षमता होगी जो एक योद्धा के स्वास्थ्य की जंग में रक्षा कर सकेगा.

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यह तकनीक सैनिक (Soldier) की थकान (Fatigue) और तनाव (Stress) की जानकारी उसे महसूस होने से पहले ही दे देगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


कितना खर्च हो चुका है अब तक
अमेरिकी सेना इस शोध के लिए पिछले पांच सालों में 62 लाख डॉलर खर्च कर चुकी है. आर्मी रिसर्च ऑफिस के लिये एक प्रोग्राम मैनेजर के तौर पर काम करने वाले हामिद क्रिम का कहना है, “यहां हमं केवल संकेत नहीं नाप रहे हैं, बल्कि हम उनका मतलब भी निकाल रहे हैं.” शोधकर्ताओं ने बंदरों पर यह प्रयोग सफलतापूर्वक कर लिया है.

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यह फायदा होगा
क्रिम ने बताया कि तनाव और थकान वाले दिमाग के संकेत उस समय से पहले आने लगते हैं जब किसी को वास्तव में पता चलता है कि वह तनाव में है या थका है. इससे सैनिकों की टुकड़ियों को पता चल सकेगा कि उन्हें कब ब्रेक लेकर आराम करना है. क्रिम के अनुसार इस मामले में केवल कल्पना ही सीमा है.



बिना आवाज किए बातचीत संभव
इस शोध का एक और क्षमतावान नतीजा है बिना आवाज का संचार, शोधकर्ता दिमाग और कम्प्यूटर के बीच ऐसी संचार व्यवस्था विकसित कर सकते हैं जिससे सैनिक बिना आवाज किए युद्ध के मैदान में कम्प्यूटर के जरिए आपस में बात कर सकते हैं. इतना ही नहीं थिएटर में दो लोग बिना दूसरों का परेशान किए आपस में बातचीत कर सकते हैं.

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समय लग सकता है लेकिन अंतिम लक्ष्य यही
क्रिम का कहना है, “अभी इस पर और काम किया जाना बाकी है. क्योंकि किसी भी जंग में तैयार मशीन और इंसान के के बीच दिमाग के संकेतों बीच संचार अभी दशकों दूर की बात हो सकती है. आखिर में हमारा यही लक्ष्य है, ऐसा कम्प्यूटर बनाना तो दिमाग के साथ पूरी तरह से एक साथ दोतरफा संचार अवस्था (Full Duplex Mode)  में काम कर सकेगा.
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