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कुछ लोग अधिक, तो कुछ फैलाते ही नहीं हैं कोरोना संक्रमण, क्या कहता है इस पर शोध

Vikas Sharma | News18Hindi
Updated: May 20, 2020, 2:24 PM IST
कुछ लोग अधिक, तो कुछ फैलाते ही नहीं हैं कोरोना संक्रमण, क्या कहता है इस पर शोध
कोरोना वायरस का प्रसार समूह में ज्यादा होता है, जबकि ज्यादातर लोगों से यह नहीं फैल रहा है. (सांकेतिक तस्वीर)

वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस अध्ययन से बहुत फायदा होगा कि क्यों कोरोना (Corona virus) संक्रमण कुछ लोगों से ज्यादा फैलता है, जबकि कुछ से बिलकुल नहीं है.

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नई दिल्ली:  कोरोना वायरस (Corona virus) का दुनिया में फैलते हुए पांच महीने का समय हो गया है. इस बीच इस वायरस ने कई तरह तरह से शोधकर्ताओं का परेशान किया. पहले लक्षणों में कुछ विविधता दिखी, कभी यह म्यूटेट (Mutate) हुआ, तो कभी इसके संक्रमण (Infection) का प्रभाव एक सा नहीं रहा है. अब संक्रमण की कई कहानियां सामने आ रही हैं, लेकिन कुछ शोधकर्ताओं का ध्यान समूह में संक्रमण फैलने के अध्ययन पर है.

बहुत सी जगहों पर समूह में फैला है संक्रमण
चाहे अमेरिका में वॉशिंगटन के चर्च में दो दिन पहले संक्रमित हुए मरीज से 61 लोगों का कोविड-19 से बीमार होना है. या सिंगापुर की एक प्रवासी मजदूरों की डॉर्मीटरी 800 लोगों का संक्रमण हो जिसमें से 80 जापान के एक लाइव म्यूजिक कंसर्ट से संक्रमित हुए थे. ऐसे एक ही कार्यक्रम से संक्रमण की ढेरों कहानियां हैं. कई जगह तो एक ही व्यक्ति ने एक साथ बहुत से लोगों को संक्रमित किया है तो एक ही कार्यक्रम के कारण बहुत सारे अलग-अलग समूह संक्रमित हुए हैं. इसके लिए वैज्ञानिक सुपरस्प्रैडिंग (Superspreading) शब्द का उपयोग करते हैं.

बहुत काम का हो सकता है यह अध्ययन



वैसे तो आमतौर पर संक्रमित बीमारियां समूह में ही फैलती हैं, लेकिन सार्स कोव-2 उन लोगों में ज्यादा फैलता दिखा जो एक दूसरे के ज्यादा करीब थे जबकि बाकी लोगों में ऐसा नहीं दिखा. साइंसमैग में प्रकाशित खबर के मुताबिक वैज्ञानिकों का मानना है कि यह एक ‘उत्साहजनक खोज’ है क्योंकि इससे पता चलता है कि यदि सामूहिक कार्यक्रमों में लोगों की भीड़ लगने से रोक दिया जाए, तो इससे संक्रमण काबू में आ सकता है और बाकी अन्य बाहरी गतिविधियों को इजाजत दी जा सकती है. ऐसे में संपूर्ण लॉकडाउन की जरूरत नहीं होगी.



एक मरीज से फैलने वाले संक्रमण पर ही ध्यान
आमतौर पर सार्स कोव-2 पर जितना भी शोध हो रहा है, उनमें से शोधकर्ताओं का ध्यान एक मरीज से संक्रमित हुए नए संक्रमण का औसत, जिसे वैज्ञानिक R कहते हैं, पर ही है. पाया यह गया है कि कुछ लोग अन्य लोगों को ज्यादा संक्रमित कर रहे हैं, जबकि कुछ एक भी व्यक्ति संक्रमित नहीं हो पा रहा है और दूसरा मामला ज्यादा दिखाई दे रहा है यानि कि ज्यादातर लोग संक्रमण नहीं फैला रहै हैं. सोशल डिस्टेंसिंग के बिना R का मान तीन है तो वहीं बहुत से मामलों में यह शून्य है.

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कोरोना वायरस के बर्ताव ने वैज्ञानिकों को हैरान कर रखा है. (सांकेतिक तस्वीर)


अन्य कोरोना संक्रमण में क्या थी सामूहिक प्रसार की भूमिका
इस विषय पर अध्ययन कर रहे  कैलीफोर्निया यूनिवर्सिटी के जैमि लॉयड स्मिथ का भी मानना है कि प्रसार का कारक (dispersion factor) का मान, जिसे वैज्ञानिक k से प्रदर्शित करते हैं, कम होने से संक्रमण कम लोगों में फैलता है. साल 2005 में स्मिथ और उनके साथियों ने सार्स बीमारी के लिए k के विभिन्न मानों का अध्ययन किया था. तब स्मिथ की टीम ने सुपरस्प्रैडिंग के k का मान 0.16 निकाला था. जबकि साल 2012 में मर्स के मामले में यह 0.12 था. वहीं 1998 में फैले फ्यू में यह मान 1 था. यानि तब समूह संक्रमण कम था.

पहले धीमी थी संक्रमण की गति
बहुत से वैज्ञानिकों ने अलग-अलग स्थितियों का अध्ययन कर R और k के मान निकाले हैं. उन्हें अलग-अलग नतीजे मिले हैं. जनवरी में चीन में हुए शोध के मुताबिक सार्स और मर्स के मुकाबले k के मान ज्यादा थे. लेकिन हाल ही में हुए एक शोध में पाया गया कि करीब 10 प्रतिशत मामलों ने 80 प्रतिशत संक्रमण फैलाया.

सार्स कोव-2 संक्रमण की गति भ्रमित करने वाली है
लेकिन हकीकत यह है कि सार्स कोव-2 के संक्रमण की गति बहुत ही भ्रमित करने वाली रही है. जब यह वायरस चीन से फैला तब उतनी जल्दी नहीं फैला. लेकिन कई देशों में आने के कुछ समय बाद ही इसके प्रसार में तेजी आई. फ्रांस और अमेरिका इसके उदाहरण माने जा सकते हैं. भारत में यह पहले यह बहुत जी धीमा था, लेकिन बाद में यह तेज हुआ. भारत में पहले छह मई तक जो संख्या 50 हजार तक ही थी, वह 19 मई तक एक लाख पार कर गई.

Corona virus
फिलहास कोरोना वायरस की कोई दवा या वैक्सैीन का पता नहीं चल सका है.
(सांकेतिक चित्र)


यह अब भी शोध का विषय ही है कि कोरना वायरस अन्य वायरस के मुकाबले समूह में तेजी से संक्रमित होता है. शोधकर्ता पा रहे हैं कि कुछ लोग ज्यादा संक्रमण फैला रहे हैं, कुछ जगह से संक्रमण ज्यादा फैल रहा है (जैसे मांस का बाजार). वहीं एक मरीज कुछ ही समय में तेज संक्रमण फैलाने लायक रहता है. कई देशों में इस तरह के अध्ययन हो ही नहीं रहे हैं. लेकिन इस तरह का अध्ययन संक्रमण को काबू करने में अहम भूमिका निभा सकता है.

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First published: May 20, 2020, 2:21 PM IST
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