जब ऑपरेशन ब्लू स्टार के टीम लीडर बोले- उन्हें तोड़ सकते हो, पर झुका नहीं सकते

लेफ्टीनेंट जनरल (Lieutenant General ) कुलदीप सिंह बराड) ने अपनी किताब ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार का सच’ में इस किस्से का जिक्र किया है.

लेफ्टीनेंट जनरल (Lieutenant General ) कुलदीप सिंह बराड) ने अपनी किताब ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार का सच’ में इस किस्से का जिक्र किया है.

ऑपरेशन ब्लू स्टार (Operation Blue Star) को लीड करने वाले लेफ्टीनेंट जनरल केएस बराड ने एक किताब लिखी है. इस किताब का नाम ऑपरेशन ब्लू स्टार का सच है. इसी किताब (Book) में लेफ्टीनेंट जनरल ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं.

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नई दिल्ली. आज 5 जून ऑपरेशन ब्लू स्टार (Operation Blue Star) की बरसी है. सेना (Army) द्वारा अपने ही घर में अंजाम दिया गया यह देश का अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन था. यह दावा खुद ऑपरेशन को लीड करने वाले लेफ्टीनेंट जनरल (Lieutenant General ) कुलदीप सिंह बराड (KS Brar) ने अपनी किताब ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार का सच’ में किया. ऑपरेशन को अंजाम देने के बाद उन्होंने लिखा, “आप उन्हें तोड़ सकते हो, मगर झुका नहीं सकते.” साथ ही किताब में देश के लिए सिक्खों (Sikh) की कुर्बानियों को भी याद दिलाया.

सिक्खों की ये खूबियां बताईं लेफ्टीनेंट जनरल बराड ने

अपनी किताब ऑपरेशन ब्लू स्टार का सच को लिखते हुए लेफ्टीनेंट जनरल केएस बराड ने एक जगह लिखा, “मेरा इस किताब को लिखने का मकसद ऑपरेशन ब्लू स्टार के सच को सामने लाना है. लेकिन एक बार मुझे लगा कि कहीं इस किताब के जरिए मैं फिर उनके ज़ख्मों को कुरेद ना दूं. लेकिन मुझे उम्मीद थी कि ऐसा नहीं होगा, क्योंकि अगर सच को सही तरीके से सामने लाया जाए और कुछ पुरानी गलत धारणाएं टूट जाएं तो इससे अच्छा कुछ नहीं हो सकता.”

तो सिक्ख हमेशा देश की ताकत बने रहेंगे
लेफ्टीनेंट जनरल केएस बराड ने सिक्खों के बारे में जो बड़ी बात कही, वो ये है, “सिक्खों ने राष्ट्र पर बहुत उपकार किए हैं, खासकर 1965 और 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध. यदि इस जाति के साथ बहुत ही सावधानीपूर्वक व्यवहार किया जाए तो यह हमेशा ही हमारे देश की सबसे बड़ी शक्ति बनी रहेगी.

तब आपा खोने लगते हैं सिक्ख

लैफिन ग्रफिन ने भी अपनी किताब महाराजा ‘रणजीत सिंह तथा सिक्ख’ में लिखा है, सिक्ख हर समय एक जैसे ही होते हैं- शांति में, लड़ाई में, बैरक में या मैदानों में, हमेशा एक से. सदा हंसमुख, अच्छे मूड में, धैर्यवान, बढ़िया घुड़सवार, परिश्रमी सैनिक, गोली खाते समय भी उतने ही स्थिर, जितना धावा बोलते समय उत्सुक. मगर जब उनका अपना स्वाभिमान या स्त्री जाति की इज्जत दांव पर लगी हो तो वे आपा खोने लगते हैं और बैखोफ हो, कत्ल करने से भी नहीं डरते.



आप उन्हें तोड़ सकते हैं झुका नहीं सकते

किताब में लिखा है, वे अपनी बेइज्जती बरदाश्त नहीं कर सकते, बदला लेने के मौके की तलाश में रहते हैं और इससे निकलने वाले परिणामों की भी वे परवाह नहीं करते. जब वे उत्तेजित हों तो उनमे दस हाथियों जितना बल होता है, उन्हें रोक पाना मुश्किल होता है. जोश की आग भड़क जाने पर अपना दिमागी संतुलन कायम नहीं रख पाते और अपने द्वारा किए जाने वाले व्यवहार के परिणाम की परवाह भी नही करते. आप उन्हें तोड़ सकते हो, मगर झुका नहीं सकते.

...तो वो सबकुछ भूल जाते हैं

किताब में आगे लिखा है, जब वे अपनी रौ में हों तो उन्हें सिर्फ समझदारी, हमदर्दी भरे व्यवहार तथा प्रेरणा से ही काबू किया जा सकता है. उनके खिलाफ उठाया गया कोई भी दमनकारी कदम उनके स्वभाव को और भी कठोर बना देता है. यदि समझदारी से उन्हें समझाया जाए तो वे बहुत आसानी से माफ भी कर देते हैं सब कुछ भूल जाते हैं और जो एक पल पहले दुश्मन हों, उनके साथ खड़े होने को तैयार हो जाते हैं.”

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