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वो वर्ल्ड लीडर, जिन्होंने जनता का भरोसा बढ़ाने के लिए कोरोना वैक्सीन ली

अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन  दिसंबर में फाइजर का टीका लिया (Photo- news18 English via Reuters)
अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन दिसंबर में फाइजर का टीका लिया (Photo- news18 English via Reuters)

अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन (Joe Biden) से लेकर पोप फ्रांसिस (Pope Francis) ने भी कोरोना का टीका (coronavirus vaccine) लिया. ऐसा वे एंटी-वैक्सर्स का यकीन जीतने के लिए कर रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 17, 2021, 11:24 AM IST
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देश में कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान शुरू हो चुका है. शनिवार को इस अभियान के तहत हेल्थ और फ्रंटलाइन वर्कर्स को पहली डोज दी गई. देश में प्राथमिकता के आधार पर कोरोना टीकाकरण हो रहा है. इधर दुनिया के कई देशों में नेताओं ने सबसे पहले कोरोना की वैक्सीन ली. इसकी वजह ये रही कि वे अपने लोगों को वैक्सीन के सुरक्षित होने पर भरोसा दिला सकें.

अमेरिका में शुरुआत
इस सूची में सबसे पहला नाम आता है अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन का. बाइडन ने दिसंबर में फाइजर का टीका लिया, वो भी लाइव. 78 साल के बाइडन कोरोना संक्रमण के लिए हाई-रिस्क ग्रुप में हैं लेकिन टीकाकरण की वजह केवल ये नहीं थी, बल्कि इसके पीछे देशवासियों को टीके के लिए आश्वस्त करना था.

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क्या था उद्देश्य


इनके बाद बारी आई, अमेरिका की उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस की. बाइडन के हफ्तेभर बाद ही हैरिस ने मॉडर्ना का टीका लगवाया. इसका भी प्रसारण हुआ. बता दें कि वैक्सीन लगाते हुए लाइव करने के पीछे वैक्सीन से डरे हुए लोगों का डर खत्म करने का उद्देश्य रहा. असल में बहुत से ऐसे लोग भी हैं, जो चाहते हैं कि वैक्सीन लगाने की बाध्यता न हो. ऐसे लोगों को एंटी-वैक्सर्स (anti-vaxxers) कहते हैं.

covid 19 vaccine
बहुत से ऐसे लोग भी हैं, जो चाहते हैं कि वैक्सीन न लगे- सांकेतिक फोटो (pixabay)


क्यों हैं लोग वैक्सीन के खिलाफ
ये लोग वैक्सीन होने के बाद भी खुद या अपने बच्चों या परिवार को उसका टीका नहीं दिलवाना चाहते. ऐसे लोगों को तादाद लगातार बढ़ रही है. यहां तक कि पिछले ही साल वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने वैक्सीन के खिलाफ बढ़ती सोच को दुनिया के 10 सबसे बड़े खतरों में गिना था. एंटी-वैक्सर्स मानते हैं कि वैक्सीन की दुनिया को जरूरत ही नहीं है, बल्कि सारी खतरनाक बीमारियों को इंसानी शरीर ऐसे ही हरा सकता है.

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क्या कहता है सर्वे
गैलप (Gallup) का ताजा सर्वे बताता है कि लगभग 42 प्रतिशत अमेरिकी कोरोना का टीका नहीं लेना चाहते. यहां तक कि अगर वैक्सीन फ्री और तुरंत दी जाए तो भी उन्हें घर पर रहना मंजूर है, बजाए टीका लेने के. 26 प्रतिशत लोग तब तक इंतजार करना चाहते हैं, जब तक कि ये साबित न हो जाए कि वैक्सीन पूरी तरह से सेफ है.

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महारानी एलिजाबेथ भी आगे
इधर ब्रिटेन में महारानी एलिजाबेथ और उनके पति प्रिंस फिलिप ने भी दिसंबर में कोरोना का टीका लिया. बता दें कि क्वीन लगभग 94 साल की हैं, जबकि उनके पति की उम्र 99 साल है. यानी दोनों ही संक्रमण के लिए काफी संवेदनशील हैं. AFP के मुताबिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए क्वीन और उनके पति को शाही डॉक्टर ने ही विंडसर कासल में आकर टीका लगाया.

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इजरायल तेजी से टीकाकरण करने वाले देशों की सूची में सबसे ऊपर बना हुआ है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


इजराइल टीकाकरण में सबसे आगे
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी 20 दिसंबर को कोरोना का टीका लेते हुए उसका लाइव टेलीकास्ट करवाया. उन्हें फाइजर की वैक्सीन लगाई गई, जिसके बाद पूरे देश में टीकाकरण शुरू हो गया. इजरायल अभी सबसे तेजी से टीकाकरण करने वाले देशों की सूची में सबसे ऊपर बना हुआ है. सऊदी अरब के किंग सलमान भी कोरोना का टीका ले चुके हैं. हालांकि सऊदी में टीकाकरण शुरू होने के तीन हफ्तों बाद किंग ने टीकाकरण करवाया.

धार्मिक नेता भी अपने पर यकीन रखने वालों में टीकाकरण की दर बढ़ाने के लिए आगे आए. इस कड़ी में पोप फ्रांसिस और पोप बेनेडिक्ट ने कोरोना का टीका लगवाया. पोप फ्रांसिस लगातार लोगों से टीकाकरण की अपील करते हुए इसे उनकी नैतिक जिम्मेदारी बता रहे हैं. दरअसल यूरोप में ही वैक्सीन के खिलाफ सोच सबसे ज्यादा है. ऐसे में राजनेताओं के अलावा धार्मिक नेताओं की अपील भी सकारात्मक असर डाल सकती है.

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इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विदोदो भी उन वर्ल्ड लीडर्स की सूची में हैं, जिन्होंने अपने देशवासियों का यकीन बढ़ाने के लिए टीकाकरण करवाया. इंडोनेशियाई राष्ट्रपति ने चीन की सिनोवैक वैक्सीन ली. रूसी मीडिया स्पूतनिक ने बताया कि इंडोनेशिया में भी चीन की वैक्सीन का तीसरा फेज ट्रायल हुआ, जिसमें इफिकेसी रेट लगभग 65 फीसदी बताई गई. इसके बाद इसी वैक्सीन को इंडोनेशिया में अप्रूवल मिल गया.
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