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जन्मदिन विशेष: गांधी परिवार की बहू से यूपीए अध्यक्ष तक, दिलचस्प है सोनिया गांधी का सफरनामा

News18Hindi
Updated: December 9, 2019, 9:15 AM IST
जन्मदिन विशेष: गांधी परिवार की बहू से यूपीए अध्यक्ष तक, दिलचस्प है सोनिया गांधी का सफरनामा
साल 1997 में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता लेने वालीं सोनिया ने 1998 में कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाला और 1999 में उत्तर प्रदेश के अमेठी लोकसभा क्षेत्र से पहली बार सांसद चुनी गईं.

कांग्रेस (Congress) के कुछ बुजुर्ग नेताओं की मानें तो सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) जब सूती साड़ी पहनती हैं तो उन्हें उनमें इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) की झलक दिखाई देती है. आज उनका 73वां जन्मदिन है.

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  • Last Updated: December 9, 2019, 9:15 AM IST
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सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) का आज 73वां जन्मदिन है. वो चौंकाने वाले निर्णय करने के लिए जानी जाती हैं. यह भी कहा जाता है कि 1984 में इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) की हत्या के बाद कांग्रेस के नेताओं ने जब राजीव गांधी से प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने का आग्रह किया था, तो सोनिया ने अपने पति से प्रधानमंत्री नहीं बनने का आग्रह किया था. दरअसल सोनिया अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित थीं.

सात साल बाद 1991 में राजीव की हत्या होने के बाद जब कांग्रेस नेताओं ने सोनिया गांधी से पार्टी की कमान संभालने का अनुरोध किया तो उन्होंने उनकी गुजारिश ठुकरा दी. इसके सात साल बाद 1998 में जब कांग्रेस पार्टी केंद्र में बेहद कमजोर थी और उसके पास महज चार राज्यों की सत्ता बची थी. कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने अपनी अलग क्षेत्रीय पार्टी बना ली थी. तब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी के आवास जाकर उनसे पार्टी की कमान संभालने का अनुरोध किया, तब जाकर वह यह जिम्मेदारी संभालने पर राजी हुईं.

भारत की सबसे शक्तिशाली महिला
साल 2004 के लोकसभा चुनाव के वक्त कांग्रेस बेहद कमजोर थी, तब सोनिया गांधी ने पार्टी को जीत दिलाकर केंद्र की सत्ता पर काबिज कराया. यह ऐसा वक्त था जब मीडिया का एक हिस्सा सोनिया को भारत की सबसे शक्तिशाली महिला करार दे रहा था.



साल 2004 में भाजपा की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार को हराने के बाद जब कांग्रेस सत्ता संभालने को तैयार हुई तो सभी को यकीन था कि सोनिया गांधी ही प्रधानमंत्री पद पर विराजेंगी. लेकिन एक बार फिर उन्होंने मीडिया को चौंकाने वाला बयान देते हुए साफ किया कि मनमोहन सिंह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार में प्रधानमंत्री होंगे. आज कांग्रेस के नेता अध्यक्ष के तौर पर सोनिया गांधी के 19 साल के कार्यकाल पर गर्व करते हैं और कहते हैं कि उन्होंने पार्टी में एकता और मजबूती कायम कर अपनी छाप छोड़ी है .

सोनिया गांधी ने हाल के दिनों में अस्वस्थ रहने के कारण राजनीति से थोड़ी दूरी बना ली है. कुछ वक्त पहले उन्हें अस्पताल में भी भर्ती कराना पड़ा था. सोनिया ने ऐसे समय में कांग्रेस की सक्रिय राजनीति से विदा ली, जब वह पार्टी में शीर्ष स्तर की नेता हैं. उनका सबसे धारदार हथियार उनकी चुप्पी थी. वह बहुत कम बोलती हैं. सार्वजनिक तौर पर तो कभी-कभार ही बोलती हैं, लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस में उनका प्रभाव जबर्दस्त रहा.पार्टी के बुजुर्ग नेता देखते हैं इंदिरा गांधी की छवि
कांग्रेस के कुछ बुजुर्ग नेताओं की मानें तो सोनिया गांधी जब सूती साड़ी पहनती हैं तो उन्हें उनमें इंदिरा गांधी की झलक दिखाई देती है. उन्होंने पिछले कई सालों से हिंदी में ही भाषण दिया है और अपने इतालवी मूल को लेकर विपक्षी भाजपा की ओर से किए जाने वाले हमलों का करारा जवाब दिया है.

सोनिया की अगुवाई में कांग्रेस ने 2004 से 2014 तक लगातार दो बार केंद्र में सरकार बनाई और कुछ राज्यों की सत्ता पर काबिज होने में भी कामयाब रही. समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ सफल चुनावी गठबंधन करके उन्होंने यह उपलब्धियां हासिल की.

यूपीए-1 और यूपीए-2 की गठबंधन सरकार गैर-भाजपा ताकतों को एक साथ लाने की सोनिया की काबिलियत के सबसे अच्छे उदाहरण हैं. हालांकि कांग्रेस को अकेले दम पर केंद्र की सत्ता में लाने का सोनिया का लक्ष्य अब तक पूरा नहीं हुआ है. पंचमढ़ी में कांग्रेस के महाधिवेशन के दौरान उन्होंने कहा था कि कांग्रेस केंद्र में अकेले दम पर सत्ता में आएगी.

Sonia gandhi, maharashtra

कांग्रेस की सदस्यता लेने के एक साल बाद ही संभाल ली अध्यक्ष की कुर्सी
सोनिया का जन्म नौ दिसंबर 1946 को इटली के लुसियाना, विसेंजा में हुआ था. इंग्लैंड में पढ़ाई के दौरान वह राजीव गांधी से मिलीं. भाषा की छात्र रहीं सोनिया और तत्कालीन प्रधानमंत्री के बेटे राजीव ने 1968 में शादी कर ली.

साल 1997 में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता लेने वालीं सोनिया ने 1998 में कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाला और 1999 में उत्तर प्रदेश के अमेठी लोकसभा क्षेत्र से पहली बार सांसद चुनी गईं. इसके बाद वह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनीं. बाद में राहुल को अमेठी से चुनाव लड़वाने की खातिर उन्होंने अपने लिए रायबरेली सीट चुनी और वहां से 2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की.
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First published: December 9, 2019, 8:40 AM IST
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