वैज्ञानिकों ने निकाली बिना काले धुएं वाली आग, जो साफ करेगी पानी पर फैले तेल को

वैज्ञानिकों ने निकाली बिना काले धुएं वाली आग, जो साफ करेगी पानी पर फैले तेल को
यह एक खास तरह की घूमती ज्वाला है जिससे प्रदूषण बहुत ही कम होता है. (Image: Uni of Wisconsin)

कालिख रहित (Soot free) ज्वाला (Flame) बनाने में शोधकर्ताओं को दो साल बाद सफलता मिली जो पहले संयोग (Coincidence) से बनी थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 15, 2020, 6:44 PM IST
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समुद्री यात्रा (Sea voyage) के दौरान कई बार ऐसी दुर्घटनाएं (Accidents) देखने को मिलती हैं जिनमें समुद्र में दूर दूर तक तेल फैल (Oil Spilling) जाता है. इससे पर्यावरण (Environment) को बहुत नुकसान पहुंचता है. कुछ साल पहले शोधकर्ताओं ने ऐसे हालात में फैलने वाले तेल को साफ करने के कारगर तरीके खोजने के दौरान एक प्रक्रिया से ऐसी ज्वाला (Flame) बनी थी जिससे तेल तो जलता था, लेकिन उससे काला धुआं (Soot) नहीं निकलता था. अब शोधकर्ताओं ने वैसी ही ज्वाला पैदा करने के हालात बनाने में सफलता पाई है.

संयोग से पैदा हुई थी तब ऐसी ज्वाला
 ब्लू वर्ल फ्लेम (Blue Whirl Flame) नाम की यह प्रक्रिया बिना काला धुंआ निकाले अपने सामने आने वाले सारे तेल का जला देती है और इससे काला धुंआ भी नहीं निकला था. शोधकर्ताओं ने यह साफ ज्वाला आग के भंवर (fire whirls) के प्रयोग के दौरान संयोग से पैदा की थी.

2016 में बनी थी इस तरह की ज्वाला
न्यू साइंसेस की रिपोर्ट के अनुसार इस प्रक्रिया का पहली बार साल 2016 में होना बताया गया था.  उस समय शोधकर्ता एक बंद उपकरण में पानी में तैरने वाले तरल ईंधन को जलाने की कोशश कर रहे थे. जिससे अंदर आने वाली हवा से भंवर बन सके. इसके बाद आग का एक भंवर बना जो कुछ सेंटीमीटर लंबी घूमती हुई नीली ज्वाला में बदल में गया.


कालिख नहीं निकलती इससेइस ज्वाला के रंग से साफ जाहिर था कि आग से कोई काला धुआं (Soot) नहीं निकल रहा है. इससे यह पता चला कि इस तरह की ज्वालाओं का समुद्र में फैले हुए तेल को साफ तरीके से जलाने में उपोयग हो सकता है और इससे पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा उत्पादन भी हो सकता है.प्राकृतिक आवास नष्ट किए, इसलिए महामारी वाले संक्रमण आए इंसान के नजदीक-शोधकैसा होता है इस ज्वाला का स्वरूपन्यू साइंसिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक मैरीलैंड यूनिवर्सिटी के जोसेफ चुंग और जियाओं झांग और उनके साथियों ने उन प्रयोगात्मक हालातों का एक कम्प्यूटर सिम्यूलेशन बनाया है जो मूल नीले भंवर की ज्वाला (Blue Whirl Flame) पैदा करता है. शोधकर्ताओं ने पाया कि नीला भंवर वास्तव में तिन अलग-अलग किस्म की ज्वालाओं का मिलने से बनता है. जिसमें बाहरी ज्वाला में ईंधन के मुकाबले ऑक्सीजन ज्यादा होती है, और दो आंतरिक ज्वाला में ईंधन ऑक्सीजन के मुकाबले ज्यादा होता है.


पैदा किए जा सकते हैं ऐसी ज्वाला बनने के हालात
इस शोध के नतीजे साइंस एडवास्ड जर्नल में प्रकाशित हुए हैं. चिंग का कहना है कि ज्वाला के तत्व के प्रकार जाने से उन नियंत्रित हालातों को पैदा किया जा सकता है जिसमें आग भंवर की स्थिति तक नहीं पहुंच पाएगी. झांग का कहना है कि नीला भंवर खुद यह दर्शाता है कि जलाने का तरीका ही बहुत हद तक प्रदूषण को रोक सकता है. इसी वजह से शोधकर्ता इस सक्षम और साफ दहन (combustion) का अध्ययन करने के लिए प्रेरित हुए.

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क्यों अहम मानी जा रहा है यह अध्ययन
झांग ने यह भी बताया कि काला धुआं या कालिख का नीले भवंर में बहुत कम उत्पादन होता है, जबकि आम पीली ज्वाला में ज्यादा. शोधकर्ताओं का मानना है कि इस पूरी प्रक्रिया को दोहरा पाने की संभावनाओं का अध्ययन करने में भी बहुत से लोगों की दिलचस्पी हैं. अगर इस प्रक्रिया को सरल तरीके से लागू करने में सफलता मिलती है तो यह प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में बहुत ही बड़ा कदम साबित हो सकता है. साथ ही यह प्रक्रिया कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी बहुत कारगर साबित हो सकती है. इस बारे में शोधकर्ताओं को भी सफलता का पूरा विश्वास है.
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