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भविष्य में क्यों बेहद लोकप्रिय हो सकते हैं स्प्रिंग वाले स्क्रू?

वैज्ञानिक साउंड स्क्रू को भविष्य की क्रांति की तरह देख रहे हैं- सांकेतिक फोटो (pxfuel)

वैज्ञानिक साउंड स्क्रू को भविष्य की क्रांति की तरह देख रहे हैं- सांकेतिक फोटो (pxfuel)

साउंड स्क्रू (Sound Screw could be a tool to soundproofing) , जिनमें स्प्रिंग लगा होता है, ये आसपड़ोस से आने वाले शोर को लगभग 9 डेसिबल तक घटा देते हैं. स्वीडिश वैज्ञानिक इसे घनी बस्तियों में काफी कारगर खोज की तरह देख रहे हैं.

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    कल्पना करें कि आप कुछ लिख-पढ़ रहे हों या फिर लंबे काम के बाद सोने की तैयारी में हों, ऐसे में पड़ोस में तेज संगीत बजने लगे. या फिर दो लोग आपस में बुरी तरह से लड़ने-झगड़ने लगें, जिसकी आवाज आपको परेशान कर दे. जाहिर तौर पर ये शोर काम पर असर डालता है. इसी समस्या को दूर करने के लिए स्क्रिंग वाले स्क्रू आ रहे हैं, जो आस-पड़ोस से आती आवाज को काफी हद तक हल्का कर देंगे. वैज्ञानिक इसे भविष्य की क्रांति की तरह देख रहे हैं.

    देखा जा रहा है क्रांति की तरह 
    हर कोई अपना घर लंबा-चौड़ा नहीं बनवा सकता कि आवाज आर-पार न जाए. यही देखते हुए स्वीडिश वैज्ञानिकों ने ऐसा विकल्प खोजा जो किफायती भी है और कारगर भी. स्प्रिंग वाले इस स्क्रू को साउंड स्क्रू या फिर Revolutionary Sound Absorbing Screw भी कहा जा रहा है. स्वीडन की माल्मो यूनिवर्सिटी ने ये प्रयोग किया.

    कैसा है ये स्क्रू 
    इस साउंड स्क्रू के तले पर छल्लेदार सेक्शन होगा, बीच में कॉइल स्प्रिंग और ऊपर की ओर चपटा सिर होगा. ये दीवार में लगने के बाद आवाज से आती तरंगों को अवशोषित कर लेगा. इससे होगा ये कि न तो शोर और न ही कोई कंपन घर के भीतर आएगा. जैसे रेलवे स्टेशन के पास घरों में लगातार रेलगाड़ी की आवाज और कंपन होता रहता है, वे घर अब साउंड स्क्रू से इससे छुटकारा पा सकेंगे.

    sound screw to decrease sound pollution
    ब्रिटेन की साउंड रिसर्च लैबोरेटरी में इस स्क्रू की जांच हो चुकी - सांकेतिक फोटो (pxfuel)


    इतनी कम होती है आवाज 
    ब्रिटेन की साउंड रिसर्च लैबोरेटरी में इसकी जांच हो चुकी और सफलता भी मिल चुकी है. इसके अलावा डेनमार्क की टेक्निकल यूनिवर्सिटी और स्वीडन में भी इसकी जांच में सफलता मिली. इस दौरान दिखा कि साउंड स्क्रू लगाने पर बाहर से आती आवाज लगभग 9 डेसिबल तक कम हो जाती है.

    वैसे तो साउंड स्क्रू पर अब भी कई स्तर के प्रयोग हो रहे हैं लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही ये आम लोगों के इस्तेमाल के लिए आ सकेगा. इससे पहले ये बड़ी इमारतों या घनी बस्तियों में प्रायोगिक तौर पर इस्तेमाल होगा ताकि पक्का किया जा सके कि ये कितना सफल हो सकता है.

    देश में ध्वनि प्रदूषण पर काफी शिकायत 
    वैसे भारत में भी ध्वनि प्रदूषण को लेकर आम से लेकर खास लोग समय-समय पर शिकायत करते रहे हैं. खासकर शादी-ब्याह या फिर धार्मिक आयोजनों के दौरान रिहायशी इलाकों में काफी शोर होता है और इस तरह की शिकायतें आती हैं. इसके अलावा बच्चों की परीक्षाओं के दौरान भी अक्सर शादियों के मौसम में ऊंची आवाज पर गाने बजते हैं, जिससे पढ़ाई में बाधा आती है. इस बात को लेकर भी कई राज्यों ने सख्त नियम बनाए, हालांकि कुछ खास फायदा नहीं हो सका.

    sound screw to decrease sound pollution
    केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने अलग-अलग इलाकों के लिए आवाज के अलग पैमाने रखे- सांकेतिक फोटो


    क्या है ध्वनि प्रदूषण रोकने का कानून 
    कानून की बात करें तो ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) 2000 के अंतर्गत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने अलग-अलग इलाकों के लिए आवाज के अलग पैमाने रखे. जैसे आवासीय क्षेत्र के लिए 55 डेसिबल दिन में और 45 डेसिबल तक आवाज रात में सामान्य है. इससे ऊपर जाने पर ध्वनि शोर की श्रेणी में आती है, जिसकी शिकायत कर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

    इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत शोर मचाने वाली गाड़ियों पर भी ध्वनि प्रदूषण के लिए जुर्माने और सजा का प्रावधान है. ध्वनि प्रदूषण को डेसिबल में मापा जाता है. वैज्ञानिक मानते हैं कि आवाज का स्तर 80 डेसिबल से ज्यादा हो और कई घंटों तक रहे तो ये खतरनाक हो सकता है. इन्हीं सारे कारणों को देखते हुए स्वीडन में ये साउंड स्क्रू बनाया गया.

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