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Explained: आखिर कहां से आ रहा है तालिबान के पास मोटा धन?

Explained: आखिर कहां से आ रहा है तालिबान के पास मोटा धन?

तालिबान ने साल 1996 से 2001 तक अफगानिस्तान पर राज किया- सांकेतिक फोटो (Photo- news18 English via Reuters)

तालिबान ने साल 1996 से 2001 तक अफगानिस्तान पर राज किया- सांकेतिक फोटो (Photo- news18 English via Reuters)

लगभग 20 सालों तक शांत रहने के बाद भी तालिबान (Taliban property in Afghanistan) के पास भारी संपत्ति है. माना जाता है कि इसके पीछे ड्रग तस्करी और टैक्स का बड़ा हाथ है. साथ ही कई देश खुफिया तौर पर तालिबान की मदद करते हैं.

    अमेरिकी सैनिकों की वापसी के साथ अफगानिस्तान के शहरों पर एक-एक करके तालिबान का कब्जा हो रहा है. साथ ही ये सवाल भी आ रहा है कि आखिर 20 सालों तक, जब अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान के चप्पे-चप्पे में रहे, तब भी तालिबान के पास कैसे इतना धन बाकी रहा कि वो 2 दशक बाद फिर उठ खड़ा हुआ? माना जा रहा है कि तालिबान के पास अलग-अलग स्त्रोतों से लगातार भारी रकम (Taliban source of income in Afghanistan) आती रही.

    तालिबान के पास कितनी दौलत है 
    मार्च 2020 में तालिबान के पास कथित तौर पर 1.6 खरब डॉलर की संपत्ति थी. ये किसी छोटे देश की कुल आय से भी ज्यादा है. इस बारे में तालिबानी धर्मगुरु मुल्ला मोहम्मद उमर के बेटे मुल्ला याकूब ने बताया था. नाटो की रिपोर्ट में इसका जिक्र भी था, जो रेडियो फ्री यूरोप में आ चुका है.

    इतनी रकम तालिबान के पास आई कहां से?
    तालिबान ने साल 1996 से 2001 तक अफगानिस्तान पर राज किया. इस दौरान उसे वैसे तो कई जगहों से आय होती है लेकिन इसका बड़ा स्त्रोत है ड्रग्स. यूनाइटेड नेशन्स वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2020 में बताया गया कि अफगानिस्तान में पैदा होती अफीम दुनियाभर की अफीम का लगभग 84% है. तालिबान के कब्जे में इस अफीम उत्पादन का बड़ा हिस्सा है. अफगानी किसान भी अपने खेतों में जो अफीम उगाते हैं, उसका बड़ा भाग उन्हें तालिबान को देना पड़ता है, जो उन्हीं के जरिए दूसरे देशों में जाता है.

    taliban source of income
    अफगानिस्तान में वसूली और टैक्स भी तालिबान की इनकम का जरिया रहा- सांकेतिक फोटो


    अफगानिस्तान में खनिजों का भंडार है
    इसमें कॉपर, गोल्ड के अलावा जिंक भी शामिल है. तालिबानियों ने खनिज उद्योग पर कब्जा कर रखा है और इससे हर साल लगभग 464 मिलियन डॉलर की कमाई करता है. नाटो ने खुद इसका जिक्र किया था. अगर खनन एरिया किसी और का है तो उसे भी तालिबान को एक निश्चित रकम सौंपनी होती है.

    वसूली और टैक्स भी तालिबान की इनकम का जरिया 
    टैक्स के नाम पर जबरन वसूली की जाती है और इसकी रसीद भी दी जाती है. माइनिंग उद्योग ही नहीं, मीडिया, संचार, डेवलपमेंट प्रोजेक्ट से लेकर अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं तक से तालिबान जबरन वसूली करता है. इसके अलावा इस्लामी प्रणाली से उश्र और जकात के हिसाब से फसलों पर भी तालिबान 10 फीसदी से अधिक टैक्स वसूलता है. इससे तालिबान को सालाना करीब 16 करोड़ डॉलर की रकम मिलती है.

    taliban source of income
    तालिबान को गल्फ देशों समेत रूस भी कथित तौर पर फंडिंग करता रहा- सांकेतिक फोटो


    तालिबान को गुप्त रूप से दुनियाभर से चैरिटी मिल रही
    द कनवर्सेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक इन डोनेशनों से करीब 20 करोड़ डॉलर तक तालिबान को मिलते हैं. इन्हें अमेरिका आतंकी फंडिंग समूह कहता है. गुप्त डोनेशन के अलावा, अरब, पाकिस्तान, ईरान और अन्य फारस देशों से प्राइवेट डोनेशन के तौर पर तालिबान को 4 से 6 करोड़ डॉलर तक पैसा मिल जाता है.

    रियल इस्टेट और एक्सपोर्ट में भी तालिबानी सक्रियता
    एक्सपोर्ट से जहां उसे 240 मिलियन डॉलर की कमाई होती है, वहीं रियल इस्टेट से उसे सालाना लगभग 80 मिलियन डॉलर मिलते हैं. अफगानिस्तान के अलावा तालिबान की संपत्ति पाकिस्तान में भी है. ये बात मुल्ला याकूब समेत पाकिस्तानी मीडिया भी स्वीकार कर चुका.

    गुप्त दान से आती रकम का कोई लेखा-जोखा नहीं 
    इस्लामिक चरमपंथी समुदाय तालिबान की कमाई के स्त्रोत के बारे पक्की जानकारी नहीं लेकिन लगातार कहा जाता है कि उसके पास गुप्त दान करने वाले कई देश हैं. बीबीसी की एक रिपोर्ट में CIA के हवाले से बताया गया था कि साल 2008 में तालिबान ने गल्फ देशों से 106 मिलियन डॉलर मिले. इनके अलावा रूस, ईरान और सऊदी अरब भी तालिबान की प्रॉपर्टी बढ़ाने में मदद कर रहे हैं.

    Tags: Afghanistan, Taliban rise in Afghanistan, Talibani Punishment, Terror Funding

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