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कोरोना वायरस से जंग में दक्षिण कोरिया सबसे आगे, काम कर रहा ये तरीका

News18Hindi
Updated: March 22, 2020, 11:29 AM IST
कोरोना वायरस से जंग में दक्षिण कोरिया सबसे आगे, काम कर रहा ये तरीका
दक्षिण कोरिया इस वायरस से जंग जीतता दिख रहा है

साउथ कोरिया (South Korea) में जगह-जगह कोरोना वायरस (coronavirus) की जांच के पॉइंट्स बना दिए गए हैं, जहां लोग खुद जाकर जांच करा रहे हैं. जांच और इलाज की प्रक्रिया मुफ्त है.

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  • Last Updated: March 22, 2020, 11:29 AM IST
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वर्ल्थ हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (World Health Organization) के अनुसार अबतक 188 देश कोरोना वायरस (coronavirus) की चपेट में हैं. इस दौरान आ रहे कई आंकड़े चौंकाने वाले हैं. जैसे इटली (Italy) में कोविड-19 (COVID-19) के कारण हो रही मौतें चीन (China) को भी पीछे छोड़ चुकी हैं. वहीं दक्षिण कोरिया (South Korea) इस वायरस से जंग जीतता दिख रहा है. जानें, क्या है इसकी वजह.

कोरोना वायरस को सदी की सबसे बड़ी कैजुएलिटी कहा जा रहा है. इस बारे में साल 2006 में ही सचेत कर चुके वैज्ञानिक Larry Brilliant का मानना है कि इससे करोड़ों लोगों की जान जा सकती है अगर वक्त न संभलें. वक्त रहते संभलना क्या है, फिलहाल इसका सबक दक्षिण कोरिया से लिया जा सकता है. हफ्तेभर पहले ही संक्रमण के मामले में चीन और इटली के बाद खड़ा ये देश लगातार इसपर नियंत्रण पा रहा है. इस बारे में John Hopkins University के मेडिकल शोधकर्ता बताते हैं कि इस हफ्ते दक्षिण कोरिया में संक्रमण के कारण हुई डेथ रेट 0.97% रही, जबकि इटली में 7.94% और चीन और हांगकांग में 3.98% मौतें रिकॉर्ड हुईं. यहां तक कि यूएस में भी मौत का प्रतिशत लगातार बढ़ता दिख रहा है, जो इस सप्ताह 1.68 प्रतिशत दिखा.

International Vaccine Institute के डायरेक्टर जनरल Jerome Kim ने इस बारे में बताया कि कैसे साउथ कोरिया अपने यहां कोरोना संक्रमण पर इतनी तेजी से नियंत्रण पा सका है. इसकी एक वजह ये है कि वहां पर बायोटेक इंडस्ट्रूी काफी बेहतर ढंग से काम कर रही है, जिसका नेतृत्व कई वैज्ञानिक मिलकर कर रहे हैं.

वहां के वैज्ञानिकों का बीमारी के लिए अप्रोच थोड़ा अलग रहा




जब चीन के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस का जीन सिक्वेंस जारी किया, तभी से दुनियाभर के वैज्ञानिक खोज में जुट गए. साउथ कोरिया भी इनमें से एक था. लेकिन वहां के वैज्ञानिकों का बीमारी के लिए अप्रोच थोड़ा अलग रहा. सीधे वैक्सीन तैयार करने या फिर दवा खोजने की जगह वहां पर वैज्ञानिकों ने टेस्ट की तैयारी शुरू कर दी. इनके अनुसार ही बायोटेक कंपनियों ने टेस्ट किट तैयार कीं और अब ये देश एक रोज में लगभग 20 हजार या उससे भी ज्यादा की आबादी का कोरोना वायरस टेस्ट कर सकता है.

Kim के अनुसार दक्षिण कोरिया में जगह-जगह टेस्ट सेंटर खोले गए हैं, जहां लोग खुद पहुंच सकते हैं. जांच की पूरी प्रक्रिया मुफ्त है. और जैसे ही किसी के कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि होती है, तुरंत आइसोलेशन और इलाज शुरू हो जाता है.

यहां तक कि फरवरी की शुरुआत में ही सरकार ने उन सभी लोगों की आईडी, क्रेडिट-डेबिट कार्ड की रसीद और दूसरे प्राइवेट डाटा निकाल लिया जो वायरस से संक्रमित पाए गए और उनके जरिए उनके संपर्क में आए सभी लोगों की पहचान की जाने लगी. इससे इस बात पर भी ट्रैक रखा जा सका है कि कोरिया में वायरस के फैलने की रफ्तार कितनी है और इसे कैसे नियंत्रित किया जा सकता है.
प्राइवेट डाटा लेने के मामले में हालांकि कई लोगों ने आपत्ति जताई लेकिन इसका दूसरा पक्ष भी रहा. वैज्ञानिक खुद मानते हैं कि किसी व्यक्ति या शहर से सुरक्षा से ज्यादा जरूरी देश की सुरक्षा है.

किसी के कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि होती है, तुरंत आइसोलेशन और इलाज शुरू हो जाता है


कोरोना का तेजी से फैलता कहर किसी युद्ध की तरह देखा और उसी तरह से ट्रीट किया जा रहा है, जिसमें ये भी बहुत जरूरी है कि हम किस तरह से पहली लड़ाई जीतते हैं. बता दें कि साउथ कोरिया में अबतक कुल 8,897 मामले आ चुके हैं, लेकिन पिछले एक हफ्ते से यहां नए मामले आने की रफ्तार तेजी से घटी है. यहां के वैज्ञानिक भी अब जांच किट के निर्देश देने के बाद वैक्सीन की खोज में जुटे हुए हैं.

लाइलाज माने जा रहे वायरस के इलाज की दिशा में WHO समेत दुनियाभर के वैज्ञानिक लगे हुए हैं. इसी बीच फरवरी के आखिर में चीन के वैज्ञानिकों को वायरस की इमेज और जीन सीक्वेंस निकालने में सफलता मिली. Shenzhen National Clinical Medical Research Center for Infectious Diseases के साथ Southern University of Science and Technology ने मिलकर कोरोना के मामले में ये सबसे पहली प्रामाणिक सफलता पाई थी. वायरस की इस पहली तस्वीर को 'BetaCoV/Shenzhen/SZTH-003/2020'नाम दिया गया. ये स्टडी मेडिकल जर्नल bioRxiv में प्रकाशित हुई. जीन सीक्वेंस सामने आने के बाद से लगातार बीमारी का टीका खोजा जा रहा है.

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First published: March 22, 2020, 11:29 AM IST
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