दक्षिण कोरिया चंद्रमा पर भेजेगा अपना पहला Mission, जानिए इसके बारे में सब कुछ

दक्षिण कोरिया (South Korea) का यह अंतरिक्ष अनुसंधान (space research) में पहला लेकिन बड़ा कदम साबित होगा. (तस्वीर: Pixabay)
दक्षिण कोरिया (South Korea) का यह अंतरिक्ष अनुसंधान (space research) में पहला लेकिन बड़ा कदम साबित होगा. (तस्वीर: Pixabay)

दक्षिण कोरिया (South Korea) ने अपने चंद्र अभियान (Moon mission) की घोषणा कर अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Research) के क्षेत्र में बड़ा कदम आ उठाया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 30, 2020, 6:21 PM IST
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अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Reserch) के क्षेत्र में अब एक और देश का नाम जुड़ने जा रहा है. इस बार दक्षिण कोरिया (South Korea) ने घोषणा की है वह दो साल में चंद्रमा (Moon) के लिए एक ऑर्बिटर (Orbiter) भेजेगा. यह ऑर्बिटर पांच महीने के भीतर का सफर कर चंद्रमा की सतह पर उतर जाएगा.  इस अभियान में दक्षिण कोरिया के अमेरिकी साझेदारों की अहम भूमिका होगी जिसमें नासा (NASA) और स्पेस एक्स (SpaceX) भी शामिल है. इसे दुनिया की स्पेस रेस में एक और देश के प्रवेश के तौर पर देखा जा रहा है.

हो गई आधिकारिक घोषणा
दक्षिण कोरिया के स्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट (KARI) ने घोषणा की है कि वह अपने देशा का पहले चंद्र अभियान साल 2022 के में प्रक्षेपित करने की दिशा में  काम कर रहा है. एक आधिकारिक घोषणा के अनुसार यह चंद्रमा के लिए पहला ऑर्बिटर होगा और इसे साल 2022 के उत्तरार्ध में प्रक्षेपित किया जाएगा. कई लोगों को लग सकता है कि कोरिया का यह कार्यक्रम नया है लेकिन वास्तव में इस प्रजोक्ट का कई बार टाला जा चुका है. यह अपने लूनार ऑर्बिटर कार्यक्रम पर साल 2016 से काम कर रहा है.

कब पहुंचेगा यह चंद्रमा पर
यह अंतरिक्ष यान 16 दिसंबर 2022 को चंद्रमा की सतहपर उतरेगा और एक साल का अभियान चलाएगा. कोरिया एसोस्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट (KARI) के अनुसार इस कार्यक्रम का विस्तार भी किया जा सकता है. इस कार्यक्रम  के दौरान यह ऑर्बिटर बहुत सारे काम करेगा जिसमें चंद्रमा के परछाई वाले इलाकों की तस्वीरें लेना शामिल है जो वह नासा के शौडोकैम के जरिए लेगा.



धीमी गति से चल रहा था प्रोजोक्ट
दक्षिण कोरिया का यह प्रजोक्ट तकनीकी और वित्तीय कारणों से धीमी गति से चलता रहा है. इससे पहले इस अभियान का प्रक्षेपण  इसी साल दिसंबर में होना तय हुआ था. इस कार्यक्रम में तभी बदलाव तय हो गया था जब इस यह तय किया गया कि अभियान की मूल यात्रा के रास्ते में बदलाव कर अब निम्न ऊर्जा प्रक्षेपपथ (Low energy Trajectory) का उपयोग अंतरिक्ष यान के ईंधन कारगरता को बढ़ाने के लिए किया जाएगा.



ईंधन कम समय ज्यादा
नए प्रक्षेपपथ का डिजाइन के कारण अंतरिक्षयान कम ईंधन तो खर्च करेगा लेकिन उसकी वजह से यान को चंद्रमा तक पहुंचने में समय अधिक लगेगा. इस अभियान में नासा की साझेदारी है. जिसने इसी साल जुलाई में डिजाइन की स्वीकृति दी है. उम्मीद की जा रही है कि इसका प्रक्षेपण एक अगस्त 2022 को हो जाएगा. कारी KARI के अमेरिकी साझेदारों में नासा के जेट प्रपल्शन लैबोरेटरी शामिल है. इस यानका प्रक्षेपण अमेरिकी कंपनी स्पेसएक्स के फाल्कन -9 रॉकेट का उपयोग होगा.

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क्या है इसका मकसद
इस ऑर्बिटर का नाम कोरिया पाथफाइंडर लूनार ऑर्बिटर है (KPLO) है. नासा के मुताबिक इस अभियान का उद्देश्य कोरिया की स्वदेशी चंद्र अन्वेषण तकनीकें विकसित करना है. वैज्ञानिक प्रयोगों के अलावा यह ऑर्बिटर चंद्रमा के वातावरण, वहां की भौगोलिक स्थिति, और अन्य स्रोतों के बारे में भी पड़ताल करेगा जिसमें भविष्य के अभियानों के लिए लैंडिंग के लिए उपयुक्त जगह तलाशना भी शामिल है.

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दक्षिण कोरिया (South Korea) का यह चंद्र अभियान (Moon Mission) साल 2016 से तैयार हो रहा है.


यान की खासियतें
यह अंतरिक्ष यान घनाकार है जिसमें दो सौर पैनल होंगे और एक पैराबोलिक एन्टीना होगा. इसका कुल वजन 550 किलोग्राम है और इसका संचार, टेलीमैट्री और कमांड के लिए एस बैंड से होगा. वही पेलोड डेटा डाउनलिंक लिए एक्स बैंड का उपयोग किया जाएगा. यान को ऊर्जा 760 वाट और 28 वोल्ट के सौर पैनलों और रीचार्ज की जा सकने वाली बैटरियों के जरिए दी जाएगी.

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इस साल बहुत सी अंतरिक्ष गतिविधियां ऐसी हुई हैं जो लंबे समय तक याद की जाएंगी. मंगल के लिए अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का खास रोवर प्रक्षेपण, चीन और यूएई की मंगल के लिए अभियान, अंतरिक्ष प्रक्षेपण में निजी क्षेत्र का प्रवेश कुछ खास घटनाएं हैं जिनकी वजह से आने वाले सालों में अंतरिक्ष अनुसंधान को तेज गति मिलने वाली है.
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