बाकी दुनिया के मुकाबले तीन गुना ज्यादा रफ्तार से गर्म हो रहा है दक्षिणी ध्रुव

पूरा दक्षिणी ध्रुव तीन गुना ज्यादा तेजी से गर्म हो रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

लंबे समय के आंकड़ों के अध्ययन से पता चला है कि दक्षिणी ध्रुव (Southern Pole) में पिछले तीस सालों में तापमान बाकी पृथ्वी के मुकाबले तीन गुना तेजी से बढ़ रहा है.

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    जलवायु परिवर्तन (Climate change) ने दुनिया पर कितना असर डाला है, यह एक बहस का विषय रहा है. पर्यावरणविद (Environmentalists) जहां कह रहे हैं कि दुनिया पर जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) ने बहुत ही ज्यादा नकारात्मक प्रभाव डाला है, वहीं कुछ लोगों को ऐसा नहीं लगता. लेकिन कई बार हमें प्रकृति (Nature) से ही संकेत मिल जाते हैं की हम कितने खतरे में हैं. हाल ही में हुए एक अध्ययन में पता चला है कि हमारी पृथ्वी का दक्षिणी ध्रुव (Southern Pole) बाकी दुनिया से तीन गुना ज्यादा तेजी से गर्म हो रहा है.

    कब से हो रहा है ऐसा
    इस शोध से पता चला है कि यह प्रक्रिया पिछले 30 सालों से चल रही है. नेचर क्लाइमेट चेंज जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में कहा गया है कि यह तापमान वृद्धि उष्णकटिबंधीय (Tropical) जलवायु में विविधता के कारण हो रहा है, लेकिन इसमें तेजी ग्रीनहाउस गैसों में इजाफा होने से आई है.

    दक्षिणी ध्रुव पर किया गया अध्ययन
    यह अध्ययन ओहियो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रेयान फोग्ट और विक्टोरिया यूनिवर्सिटी, वेलिंग्टन, न्यूजीलैंड में क्लाइमेट साइंस के रिसर्च फेलो काइली क्लेम की अगुआई में हुआ है. क्लेम  ने बताया कि अंटार्कटिका पिछले कई सालों से बहुत ही ज्यादा मौसमी बदलाव झेल रहा है. वैज्ञानकों को यह पहले से ही मालूम है कि वहां के बाहरी इलाके गर्म हो रहे हैं. लेकिन उन्हें लग रहा था की दक्षिणी ध्रुव, जिसका दुनिया से सीधा संपर्क नहीं हैं, ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव में नहीं आया होगा.

    तीस साल के आंकड़ों का किया अध्ययन
    पश्चिमी अंटार्कटिका और अंटार्कटिका प्रायद्वीप में 20वीं सदी के अंत आने तक बहुत गर्मी झेली जिसकी वजह से वहां की बर्फ की चादर पतली होना शुरू गई. वहीं दक्षिणी ध्रुव 1980 तक ठंडा होता रहा, लेकिन उसके बाद वह भी गर्म होने लगा. शोधकर्ताओं ने अंटार्कटिका के अंदरूनी हिस्सों में वार्मिंग प्रभाव को समझने के लिए दक्षिणी ध्रुव के मौसम स्टेशन के आंकड़ों और क्लाइमेट मॉडल्स का विश्लेषण किया.

    nature changes colour white snow mountains of antarctica turn to green
    अंटार्कटिका में सफेद रंग से घिरे पहाड़ अब हरे रंग में बदलते जा रहे हैं.


    किस दर से बढ़ा तापमान
    इस अध्ययन में साल 1989 और 2018 के बीच के समय को  शामिल किया गया. शोधकर्ताओं ने पाया है कि दक्षिणी ध्रुव पिछले तीस सालों में 1.8 डिग्री सेल्सियस गर्म हुआ है. यानि उसके गर्म होने की दर प्रति दशक की है. यह दर वैश्विक औसत से तीन गुना ज्यादा है.

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    क्या वजह रही इसकी
    वैज्ञानिकों का मानना है कि इसकी वजह पश्चिमी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासगर का बढ़ता तापमान है जिसकी वजह अंटार्कटिका के निकट दक्षिणी अटलांटिक से आने वाली हवाओं में बदलाव है.  इसके अलावा दक्षिणी ध्रुव की ओर आने वाली गर्म हवा का भी इसमें काफी योगदान है.

    Penguins
    इस बदलाव के कारण पेंंग्विन्स की सख्या तेजी से बढ़ रही है.


    अंटार्कटिका पर ज्यादा, दक्षिणी ध्रुव पर कम रहता है ध्यान
    दरअसल लोगों और वैज्ञानिकों का भी, ध्यान अंटार्कटिका पर ज्यादा रहता है. हाल ही में नासा ने सैटेलाइट की कुछ तस्वीरें जारी की थीं जिनसे पता चल रहा था कि अंटार्कटिका की बर्फ कितनी तेजी से पिघल रही है. वहीं सैटेलाइट की तस्वीरों से अंटार्कटिका की बर्फ का रंग भी बदलता दिखा. अंटार्कटिका के कई इलाकों में गर्मी बढ़ने के कारण वहां काई बनना शुरू हो गई है जिससे बर्फ का रंग हरा होने लगा है.

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    इसके अलावा वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का ध्यान अंटार्कटिका के ऊपर वायुमंडल में बन रहे ओजोन परत में बने छेद पर भी है. जब भी ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों की बात होती है तो ओजोन परत में हुए  इस छेद के बारे में जरूर जिक्र होता है. ऐसे में दक्षिणी ध्रुव की बात नहीं होती है. जबकि वह छेद दक्षिणी ध्रुव के ऊपर ही बना है.

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