अब अंतरिक्ष में भटकने पर मिलेगा रास्ता, स्पेस नेविगेशन की निकली नई तकनीक

तारों के बीच (Interstellar Space) अंतरिक्ष यानों के भटकने की संभावना बहुत ज्यादा होती है.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA ESA T. Brown S. Casertano and J. Anderson)

तारों के बीच (Interstellar Space) अंतरिक्ष यानों के भटकने की संभावना बहुत ज्यादा होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA ESA T. Brown S. Casertano and J. Anderson)

अंतरतारिकीय अंतरिक्ष (Interstellar Space) के लिए वैज्ञानिकों का बनाया तारों का नक्शा (Map of Stars) यात्रा संचालन (Space Navigation) सरल करेगा.

  • Share this:

अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Research) एक बहुत ही जटिल विषय है. इसमें कई चुनौतियां जिसमें सबसे प्रमुख अंतरिक्ष में जाना और वहां से सुरक्षित और जीवित वापस आना है. लेकिन हमारे वैज्ञानिक अंतरिक्ष अभियानों को बेहतर सुरक्षित और आसान बनाने के पूरा प्रयास कर रहे हैं. अब तो लंबी अंतरिक्ष यात्राओं पर भी काम होने लगा है. अंतरिक्ष सबसे बड़ी चुनौती खुद की वास्तविक स्थति (Exact Positioning) का पता रखना है जिससे हम भटक नहीं जाएं. अब वैज्ञानिकों ने इस स्पेस नेवीगेशन (Space Navigation) की समस्या का एक रास्ता निकाला है.

क्या है नेविगेशन की समस्या

नेविगेशन शब्द सबसे पहले नौसेना में उपयोग किया गया. पुराने जमाने में जब लोग जहाज से यात्रा करते थे तो उनके सामने सबसे बड़ी समस्या यह तय करना था कि उनकी स्थिति क्या है और वे यह कैसे तय करेंगे कि वे सही दिशा में जा रहे हैं. इन सभी बातों के लिए उन्होंने नौसंचालन या नेविगीशन का उपयोग किया है. आज सैटेलाइट और उनके जीपीएस सिस्टम ने समुद्री यात्राओं के संचालन की समस्या हल कर दी है, लेकिन अंतरिक्ष में खुद की स्थिति सुनिश्चित कर सही दिशा पहचानना एक बड़ी चुनौती है.

पैरेलेक्स पद्धति
यह नया प्रस्ताव अंतरिक्ष यात्रा संचालन की प्रक्रिया को बहुत सरल बनाने का  प्रयास है. इस पद्धति को arXiV.org में साझा किया गया है जिसमें तारों की मदद से यह काम किया गया है. इसमें एक पुरानी पद्धति पैरेलेक्स के सिद्धांत का उपयोग किया गया है. यदि आपने एक उंगली को नाक के आगे रखेंगे और एक बार में एक ही आंख से उसे देखेंगे तो ऊंगली दूसरी जगह दिखेगी.  यह बदली हुई स्थिति दिखने का कारण आंख का अलग अलग स्थान पर होना है.

पहले पृथ्वी से तारों का बनाया नक्शा

यह तकनीक दूर की वस्तुओं की दूरी मापने के लिए उपयोग में लाई जाती थी. पहले वैज्ञानिक इसी तकनीक से तारों की दूरी मापा करते थे. नई पद्धति में कहा गया है कि अंतरिक्ष यान के प्रक्षेपण से पहले उसमें आसपास के खगोलीय क्षेत्र के सभी तारों का नक्शा होना जाहिए जसमें उन तारों की सटीक स्थिति का विवरण हो.



Space, Space Exploration, Space Navigation, Map of Stars, Interstellar missions, Interstellar Space,
शोधकर्ताओं का कहना है कि हमारी मिल्की वे गैलेक्सी (Milky Way) की ही अंतरिक्ष यात्रा में भटकने की संभावनाएं रहेंगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

कैसे तय होगी वास्तविक स्थिति

इसके बाद जैसे जैसे यान सौरमंडल से दूर जाता है वह दूसरे तारों की दूरी मापेगा. जब तारा किसी सुदूर तारे के पास आएगा तो वह तारा अपनी पिछली जगह से अलग दिखाई देगा जबकि सुदूर के तारे स्थिर ही दिखाई देंगे. बहुत से तारों के जोड़ों के दूरी और उसके पृथ्वी के आधारित नक्शों से तुलना करने पर अंतरिक्ष यान यह पता लगा सकता है कि वह उन तारों से कितनी दूर है. इससे अंतरिक्ष यान की गैलेक्सी में सटीक 3 डी स्थिति का पता चल जाएगा.

पृथ्वी पर हुए अनोखे शोध ने बताया, क्या हुआ था बिगबैंग के फौरन बाद पदार्थ का?

फिलहाल इस पद्धति का होता है उपयोग

फिलहाल अंतरग्रहीय अंतरिक्ष यान संचालन के लिए पृथ्वी के आधार पर बने सिस्टम पर निर्भर होते हैं. जब हम रेडियो संकेत अंतरिक्ष यान को भेजते हैं वह कुछ देरी से इस संकेत का जवाब भेजता है. रेडियो संकेत के बीच के अंतर से ही यान और पृथ्वी के बीच की दूरी की गणना होती है. यह पद्धति धरती के राडार सिस्टम नेटवर्क पर निर्भर करता है. लेकिन यह पद्धति केवल हमारे सौरमंडल के अंदर संचार के लिए काम करती है.

Space, Space Exploration, Space Navigation, Map of Stars, Interstellar missions, Interstellar Space,
एक गैलेक्सी (Galaxy) में ही अभी तक उपयोग में लाई जा रही नेविगेशन तकनीक काम नहीं आएगी.(प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

अंतरतारकीय अभियानों में

वहीं अंतरतारकीय अभियान में हमें नए तरीके से काम करना होगा. और यानों को खुद ही अपनी यात्रा संचलान को संभालना होगा. सैद्धांतिक रूप से ये अंतरिक्षयान घड़ी और जायरोस्कोप जैसे सिस्टम का उपयोग तो कर सकते हैं, लेकिन ये अभियानों कम से कम दशकों तक चलेंगे और एक छोटी गलती और अनिश्चितताएं उन्हें आसानी से भटका सकती है.

बिग बैंग के बाद के अंधकार युग की जानकारी देगा चंद्रमा से नासा का टेलीस्कोप

इसका एक विकल्प पल्सर का उपयोग है. पल्सर घूमते पिंड हैं जो नियमित अंतराल पर चमक बिखेरते हैं. हर पल्सर का एक खास घूर्णन काल होता है , ये पिंड लंबे गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए एक विश्वस्नीय प्रकाश स्तंभ की तरह काम कर सकते हैं. लेकिन ये भ हमारे सौरमंडल केबार एक छोटे हिस्से में काम करता है.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज