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    सौरमंडल के बाहर बढ़ रहा है अंतरिक्ष में घनत्व, जानिए कैसे मिली यह जानकारी

    सौरमंडल (Solar System) के बाहर अंतरिक्ष (Space) में बढ़ते धनत्व (Density) के बारे में वॉयजर यानों (Voyager Probes) ने जानकारी दी..  (तस्वीर: Pixabay)
    सौरमंडल (Solar System) के बाहर अंतरिक्ष (Space) में बढ़ते धनत्व (Density) के बारे में वॉयजर यानों (Voyager Probes) ने जानकारी दी.. (तस्वीर: Pixabay)

    नासा (NASA) के दो वॉयजर यानों (Voyager Probe) ने सौरमंडल (Solar System) के धनत्व (Density) के बारे में रोचक जानकारी दी है जिससे वैज्ञानिक अचरज में हैं.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 20, 2020, 6:55 PM IST
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    नासा (NASA) ने हमारे सौरमंडल (Solar System) के ग्रहों की जानकारी हासिल करने के लिए बहुत से अंतरिक्ष यान (Spacecraft) भेजे हैं. इसमें में एक वॉयजर 2 (Voyage 2) ने 41 साल के विशाल सफर के बाद सौरमंडल की सीमा पार कर ली है और अब भी वह जानकारियां भेज रहा है. वॉयजर 2 ने अब हमें बहुत सी नई जानकारी दी है. इनमें से सबसे अहम जानकारी यह है कि जैसे जैसे हम सूर्य से दूर जाते हैं, अंतरिक्ष का धनत्व (Density) बढ़ता जा रहा है.

    पहली बार नहीं मिले हैं ऐसे संकेत
    यह पहली बार नहीं हैं कि अंतरिक्ष में बढ़ते घनत्व के बारे में जानकारी मिली हो. वॉयजन 1 भी इससे पहले साल 2012 में तारों के बीच के अंतरिक्ष में घुसा था और उसने भी धनत्व में इस तरह के बदलाव एक दूसरी जगह पर अवलोकित किए थे. वॉयजर 2 के नए आंकड़े बताते हैं कि वॉयजर 1 की जानकारी सही थी और यूं तारों के बीच में घनत्व का बढ़ना एक बहुत ही स्थानीय अंतरतारकीय माध्यम (VLIM) का बड़ा हिस्सा है.

    हेलियोपॉज की अहमियत
    हमारे सौरमंडल के किनारे कुछ अलग अलग सीमाओं से परिभाषित किया जा सकता है. इनमें से एक को वॉयजर प्रोब यानों ने पार किया है जिसे हेलियोपॉज कहते हैं और इसे सौर पवनें परिभाषित करती हैं. सूर्य के आयनीकृत प्लाज्मा से हर दिशा में निकलने वाली की सतत सुपरसोनिक पवन का एक जगह पर जाकर बल इतना कमजोर हो जाता है कि वे आगे नहीं बढ़ पाती है. इसी बिंदु को हेलियोपॉज कहते हैं.



    अलग तरह का है आकार
    हेलियोपॉज के भीतर का इलाका ही हेलियोस्फियर होता है और उसके बाहर का हिस्से को VLIM कहा जाता है. हेलियोस्फियर वृत्ताकार नहीं होता है. यह एक छोर पर ओवल के आकार के जैसा है और दूसरे छोर पर एक पूंछ की तरह है. इसकी नाक या आगे का हिस्सा सौरमंडल की मिल्की वे गैलेक्सी की परिक्रिमा करने वाली कक्षा की दिशा में है.

    Heliosphere, Voyager 2,
    हेलियोस्फियर को पार करना वॉयजर के लिए अहम घटना रही. (तस्वीर: @NASAJPL)


    दो अलग जगहों पर किया पार
    हाल ही में एस्ट्रोफिजिक्ल जर्नल लैटर्स में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक दोनों ही वॉयजर ने सौरमंडल के हेलियोपॉज को उसकी नाक के पास पार किया था, लेकिन दोनों में 67 डिग्री हेलियोग्राफिक अक्षांश और 43 डिग्री देशांतर का फर्क था.

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    अंतरिक्ष का धनत्व और निर्वात
    अंतरिक्ष के बारे में आम लोग यह समझते हैं कि यह निर्वात है, लेकिन यह पूरी तरह से निर्वात नहीं है. पदार्थ का घनत्व आमतौर पर बहुत ही कम होता है लेकिन फिर भी होता है. सौरमंडल में ही सौर पवानों के कारण प्रोटोन और इलेक्ट्रॉन का घनत्व 3 से 10 कण प्रति घन सेमी होता है और सूर्य से दूर होने पर यह कम होता जाता है.

    इलेक्ट्रॉन का घनत्व
    हमारी मिल्की वे गैलेक्सी के अंतरतारकीय माध्यम में इलेक्ट्रॉन के धनत्व का औसत लगभग 0.0037 कण प्रति घन सेमी आंका गया है. वहीं बाहरी हेलियोस्फियर में प्लाज्मा का धनत्व 0.002 इलेक्ट्रॉन प्रति धन सेमी है. जैसे ही वॉयजर ने हेलियोपॉज को पार किया उसके प्लाज्मा वेव साइंस उपकरण ने प्लाज्मा के इलेक्ट्रॉनिक धनत्व का पता लगाया.

    इतनी दूरी पर नापा घनत्व
    वॉयजर 1 ने हेलियोपॉज को 25 अगस्त 2012 को हमसे सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी का 121.6 गुना दूरी पर पार किया था. यह दूरी 18.1 अरब किलोमीटर है. वॉयजर 1 ने जब प्लाज्मा स्पंदन (Oscillation) को नापा, उस समय वह 18.3 अरब किलोमीटर की दूरी पर था और उसने प्लाज्मा का घनत्व 0.055 इलेक्ट्रॉन प्रति क्यूबिक सेमी नापा था.

    Solar System, Voyager 2,
    वॉयजर 2 (Voyager 2) गुरू, शनि, यूरेनस और नेप्च्यून ग्रहों (Planets) के पास से गुजरा था.


    2018 में वॉजयर 2 ने
    वॉयजन 2 ने गुरू, शनि यूरेनस और नेप्च्यून का चक्कर लगाते हुए  5 नवंबर 2018 को 17.8 अरब किलोमीटर की दूरी पर हेलियोपॉज को पार किया और  17.9 अरब किलोमीटर की दूरी पर उनसे प्लाज्मा का घनत्व 0.039 इलेक्ट्रॉन प्रति घन सेमी नापा जो कि वॉयजन 1 के मापन के करीब था.

    बढ़ रहा है धनत्व
    दोनों ही वॉयजर ने घनत्व के बढ़ने की जानकारी दी.  अगले 2.9 अरब किलोमीटर और आगे की यात्रा के बाद वॉयजर 1 ने धनत्व में 0.13 इलेक्ट्रॉन प्रति घन सेमी की बढ़त दिखाई तो वहीं वॉयजर 2 ने ज्यादा तेजी से धनत्व बढ़ने के संकेत दिए जो 18.5 अरब किलोमीटर की दूरी पर 0.12 इलेक्ट्रॉन प्रति घन सेमी की दर से बढ़ा.

    पृथ्वी पर है यह हाल
    पृथ्वी पर इलेक्ट्रॉन  का धनत्व करीब एक हजार घन सेमी का है जिसके मुकाबले में यह धनत्व बहुत ही कम है, लेकिन यह हमारे वैज्ञानिकों का ध्यान खींचने के लिए काफी है खास तौर पर तब जब इसकी वजह हमें पता न हो.

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    शोधकर्ताओं के मुताबिक इसकी वजह एक शक्तिशाली मैग्नेटिक फील्ड का होना  या फिर सौर पवनों के धीमे होने के कारण एक तरह के ट्रैफिक जाम के जैसी स्थिति सकती है. लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि सही कारण जानने में काफी समय लग सकता है.
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