Space X की यह उड़ान है भविष्य में होने वाली अंतरिक्ष होड़ का संकेत

Space X की यह उड़ान है भविष्य में होने वाली अंतरिक्ष होड़ का संकेत
स्पेस एक्स का यह प्रक्षेपण अंतरिक्ष अनुसंधान इतिहास में एक टर्निंग प्वाइंट साबित होगा. (प्रतीकात्मक फोटो)

स्पेस एक्स (SpaceX) की नासा (NASA) अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर ISS के लिए उड़ान भविष्य में होने वाली अंतरिक्ष होड़ का संकेत साबित होगी.

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नई दिल्ली:  30 मई का दिन अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Research) में ऐतिहासिक दिन के तौर पर दर्ज हो गया है. पहली बार एक निजी कंपनी (Private enterprise) ने अंतरिक्ष यात्रियों को अपने बनाए अंतरिक्ष यान में सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा. अरबपति एलन मस्क (Elon musk) की कंपनी स्पेस एक्स (SpaceX) ने यह उपलब्धि हासिल की. इसके अलावा कई ऐसी गतिविधियां देखने को मिल रही हैं जिससे अंतरिक्ष के लिए एक तेज प्रतियोगिता होना निश्चित लग रहा है.

निजी क्षेत्र का दखल केवल एक शुरूआत है
स्पेसएक्स के इस यान में नासा के दो अमेरिकी वैज्ञानिक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए रवाना हुए. अमेरिका पिछले कई सालों से इसकी तैयारी कर रहा था कि उसके द्वारा अनुमोदित कंपनियां इस तरह के अभियान शुरू करें और वह अपना ध्यान केवल अनुसंधान और अन्य गतिविधियों पर केंद्रित कर सके.

अंतरिक्ष कार्यक्रमों का व्यवासायिक दोहन करना चाहता है नासा



इस महीने की शुरूआत में ही नासा के प्रशासक जिम ब्रिडेनस्टाइन ने घोषणा की थी कि स्पेस एजेंसी मशहूर हॉलीवुड एक्टर टॉम क्रूस के साथ स्पेस में पहली मूवी शूट करने के लिए काम कर रही है. इससे भी साफ हो गया कि नासा अंतरिक्ष कार्यक्रमों के व्यवसायिक दोहन के लिए कितनी गंभीर हैं.



चांद पर बेस कैम्प की गंभीर तैयारी
इसके अलावा नासा का अब ध्यान साल 2024 तक चांद पर पहली महिला अंतरिक्ष यात्री और अगले पुरुष यात्रियों को उतारने की योजना पर है जहां उसे एक बेस कैंप बनाना है. इसमें भी अमेरिकी निजी स्पेस कंपनियों की उल्लेखनीय भूमिका रहने वाली है. यानी अब हमें एक तेजी से बढ़ने या कहें पनपने वाली अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था देखने को मिलने वाली है.

SpaceX
अमेरिकी उद्यमी एलन मस्‍क की कंपनी स्‍पेस एक्‍स का रॉकेट आज नासा के दो अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर आईएसएस के लिए रवाना हुआ है.


ISS का व्यवसायिक दोहन पर विचार
नासा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की व्यवसायिक उपयोग करने पर विचार कर रहा है. अभी तक वह केवल दवाओं  और बिना ग्रैविटी के माहौल में चीजें बनाने के प्रयोगों से आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है. इस स्टेशन के अमेरिकी हिस्से के रखरखाव में कई देशों की भागीदारी है. वहीं इसका एक प्रमुख ऑपरेटर रूस भी है. नासा की साल 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक के शोधकर्ता इस स्टेशन में वैज्ञानिक और व्यवसायिक शोध करते हैं जिसका अमेरिकी करदाताओं पर 3-4 अरब डॉलर भार पड़ता है.

कुछ महत्वाकांक्षी योजनाएं भी हैं
अमेरिकी कंपनी अमेजन के संस्थापक जैफ बेजोस की दीर्घकालिक योजना है कि वे अंतरिक्ष में खरबों लोगों के लिए कॉलोनियां बनाएंगे. इसके लिए उनका एक छोटा कदम चंद्रमा पर एक लैंडर बनाना होगा. पिछले साल बेजोस ने कहा था कि वे अंतरिक्ष के लिए सड़क बनाएंगे जिसके बाद बहुत सी अनोखी चीजों की शुरुआत होगी.

दूसरे देश भी हैं दौड़ में
ऐसा नहीं है कि केवल अमेरिका में ही इस तरह की योजना बन रही है. चीन क्षुद्रग्रहों के अध्ययन के लिए अपने अभियान शुरू करने वाला है, वह चांद के पिछले हिस्से में रोवर पहले ही भेज चुका है. इसके अलावा रूस भी चांद पर अपना एक बेस बानने की तैयारी में हैं जिसका प्रमुख उद्देश्य हीलियम का उत्खनन है. यह अभियान वह 2025 के बाद कभी भी शुरू कर सकता है.

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आने वाले सालों में अंतरिक्ष उद्योग में जबर्दस्त होड़ देखने को मिलने वाली है. (प्रतीकात्मक फोटो)


अंतरिक्ष उद्योग में आने वाली है बहुत तेजी
रीयूजेबल रॉक्टेस् यानि वे प्रक्षेपण यान जिनका फिर से उपयोग सके, तैयार हो रहे हैं. सैटेलाइट्स को छोटा करने और उनकी प्रति प्रक्षेपण की लागत घटना की तैयारियां जोरों पर हैं. अंतरिक्ष का क्षेत्र केवल एरोस्पेस और डिफेंस से आगे बढ़कर आईटी हार्डवेयर और टेलीकॉम में व्यवासायिक संभावनाएं खोल रहा है. अनुमान है कि साल 2040 तक दुनिया भर में अंतरिक्ष उद्योग 11 खरब डॉलर या इससे भी अधिक हो सकता है.

कानून भी बनने लगे हैं
नासा और अमेरिकी सरकार अंतरिक्ष अभियानों और उत्खनन संबंधी कानून बनाने और उसे लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं. नासा ने इन कानूनों का एक प्रस्ताव भी पेश कर दिया है. जबकि रूस इस पर अपनी आपत्तियां जाहिर कर चुका है.  इससे पहले 1967 में अंतरिक्ष गतिविधियों  के सिद्धांतों को लेकर एक आटर स्पेस ट्रीटी पर विभिन्न देशों ने हस्ताक्षर किए थे. भारत सहित अब तक 109 देश इसका हिस्सा बन चुके हैं.

फिलहाल तकनीकी विकास और भविष्य में प्रतियोगिताएं अंतरिक्ष गतिविधियों में बहुत ज्यादा तेजी लाने वाली हैं, इतना तय है. इससे आर्थिक,व्यासायिक और सामाजिक बदलाव देखने को भी मिलेगा.

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