Satellite को फिर से जीवन देता है यह मिशन, जानिए कैसे होता है यह मुमकिन

बहुत से सैटेलाइट ईंधन खत्म होने के कारण बेकार हो गए हैं. (प्रतीकात्मक फोटो)
बहुत से सैटेलाइट ईंधन खत्म होने के कारण बेकार हो गए हैं. (प्रतीकात्मक फोटो)

MEV ऐसा मिशन है जो ऐसे सैटेलाइट (Satellite) को जीवन देता है जिनका ईंधन (Fuel) खत्म होने को है. यह खास तकनीक से कई साल तक ईंधन दे सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 22, 2020, 12:25 PM IST
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नई दिल्ली: अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले उपग्रहों (Satellite) की संख्या पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ गई है. कई सैटेलाइट बेकार हो कर अंतरिक्ष में कचरा बढ़ा रहे हैं. लेकिन एक स्पेसक्राफ्ट (Spacecraft) अंतरिक्ष में ऐसा काम कर रहा है जिससे वह ईंधन समाप्त हो चुके उपग्रहों को वापस क्रियाशील कर उन्हें अपनी कक्षा में पुनः स्थापित करने का काम करने में सक्षम है और ऐसा कर भी रहा है.

मिशन एक्सटेंशन वीकल
एक उपग्रह स्वस्थ रहकर पूरी तरह से क्रियाशील रहता हो, लेकिन कभी न कभी वह रिटायर हो हो जाता है, आमतौर पर ऐसा उसके ईंधन के खत्म होने से हो जाता है. इसी तरह के सैटेलाइट को फिर से क्रियाशील करने के लिए मिशन एक्सटेंशन वीकल (MEV) बनाया गया है.

खास सैटेलाइट की कर सकता है मदद
हर साल करीब 20 सैटेलाइट ऐसे होते हैं जो ईंधन के खत्म होने के कारण बेकार हो जाते हैं.  चूंकि यह संख्या बहुत बड़ी है, नॉर्थरोप ग्रूमैन सैटेलाइट सर्विसिंग प्लान और तकनीक विकसित करने पर काम कर रहा है. अब MEV ने इस समस्या के समाधान में मदद की है. यह ऐसा स्पेसक्राफ्ट है जो जियोसिंक्रोनस इक्योटोरियल ऑर्बिट ( geosynchronous equatorial orbit, GEO) में सैटेलाइट से जुड़ता है जिनका ईंधन खत्म हो गया है.



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MEV के पास 15 साल से ज्यादा का ईंधन है.


कैसे बढ़ जाती है सैटेलाइट की जिंदगी
एक बार क्लाइंट सैटेलाइट से यह जुड़ने के बाद एमईवी सैटेलाइट्स में ईंधन भरता है और सैटेलाइट का जीवनकाल बढ़ा देता है. क्लाइंट को एमईवी सेवाओं की जरूरत नहीं होने पर वह उस सैटेलाइट से हटकर दूसरे क्लाइंट के सैटेलाइट से जुड़ने निकल जाएगा.

15 साल से ज्यादा का रहता है इसमें ईंधन
नॉर्थरोप ग्रुमैन सैटेलाइट सर्विसिंग ऑपरेशन यूनिट के जो एंडरसन का कहना है, “हमारा एमईवी एक बहुउपयोगी वीकल है. इसकी 15 साल का डिजाइन जीवन है, लेकिन इसमें 15 साल से भी कहीं ज्यादा समय का ईंधन हैं. “

9 महीने से कर रहा है काम
एमईवी पिछले साल 9 अक्टूबर को प्रक्षेपित किया गया था. इसने इंटेलसैट के 901 सैटेलाइट को उसकी जियो स्टेशनरी कक्षा में पुनः स्थापित किया था.  इस पूरी प्रक्रिया में साढ़े तीन महीने लगे थे. एमईवी सीधे डिस्पोजल कक्षा में गया जो GEO के 180 मील ऊपर हैं. यह पृथ्वी से करीब 22 हजार मील ऊपर स्थित है.

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MEV सैटेलाइट को उसकी कक्षा में भी वापस लाने का काम करता है. (सांकेतिक तस्वीर)


इस उपग्रह को किया फिर सक्रिय
जब आईएस 901 डिस्पोजल कक्षा की ओर जाने लगा तब एमईवी -1 वहां पहुंचा और वह फरवरी 2020 में उससे जुड़ा और उसने आईसएस 901 को सफलतापूर्वक अपनी निर्धारित जगह पर वापस ला दिया. इस दौरान दोनों की गति 7 हजार मील प्रति घंटा थी. इसकी वजह से आएस 901 इस 2 अप्रैल को फिर से पूरी तरह से सफलतापूर्वक क्रियाशील हो गया.

अगले पांच साल तक देता रहेगा ईंधन
एमईवी-1 आईएस 901 को अपनी जगह पर लाकर उसके साथ अगले  5 साल तक उसे ईंधन देता रहेगा. इसके बाद एमईवी-1 उसे वापस डिस्पोजल ऑर्बिट जिसे ग्रेवयार्ड ऑर्बिट भी कहते हैं, में छोड़ आएगा. यहां से वह दूसरे सैटेलाइट को ईंधन देने निकल पड़ेगा.

क्या सभी सैटेलाइट से जुड़ सकता है एमईवी-1
 ज्यादातर. ऐसा इसलिए मुमकिन है क्योंकि दुनिया के 80 प्रतिशत GEO सैटेलाइट  लिक्विड एपोजी इंजन (LAE) तकनीक का उपयोग करते हैं. एमईवी क्लाइंट सैटेलाइट के LAE से ही जुड़ जाते हैं. यह प्रक्रिया पूरी तरह से मैकैनिकल होती है. इसमें इलेक्ट्रिक या डेटा कनेकशन का उपयोग नहीं होता है.

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