किसलिए नेपाल के राजा ने भारत के खिलाफ चीन की मदद मांगी थी?

किसलिए नेपाल के राजा ने भारत के खिलाफ चीन की मदद मांगी थी?
नेपाल इन दिनों उत्तराखंड के तीन इलाकों पर अपनी दावेदारी दिखा रहा है (Photo-firstpost)

नेपाल के आखिरी राजा ज्ञानेंद्र शाह (Nepal monarchy last king Gyanendra Shah) ने अपने ही देश में खुद को बनाए रखने के लिए चीन (China) से मदद मांगी. तब भारत की खुफिया एजेंसी रॉ (RAW) ने बेहद गुप्त तरीके से नेपाल में राजशाही खत्म कर लोकतंत्र बहाल करने का काम किया. 

  • Share this:
नेपाल इन दिनों उत्तराखंड के तीन इलाकों पर अपनी दावेदारी दिखा रहा है. साथ ही भारतीय बहुओं के लिए उसके नागरिकता कानून में भी बदलाव की बात हो रही है. माना जा रहा है कि नेपाल ये सब चीन के प्रभाव में आकर कर रहा है क्योंकि उसके यहां चीन ने भारी इनवेस्टमेंट किया हुआ है. इसके पीछे चीन का इरादा किसी न किसी तरह से भारत को नुकसान पहुंचाना है. वैसे भारत पहले भी नहीं चाहता था कि नेपाल में चीन की पैठ बढ़े. यहां तक कि तत्कालीन राजशाही के जरिए चीन की घुसपैठ रोकने के लिए भारत की खुफिया एजेंसी रॉ ने काफी काम किया और सफल भी रहा.

घटना 1989-90 के दौर की है. तब नेपाल की जनता के बीच लोकतंत्र की मांग धीरे-धीरे उठने लगी थी. पड़ोसी देश और खुद लोकतांत्रिक देश होने के नाते भारत भी यही चाहता था कि नेपाल में भी लोकतंत्र आ जाए. हालांकि नेपाल का आंतरिक मामला होने के कारण हमारा देश तब किसी चीज में सीधे दखल नहीं दे रहा था लेकिन कूटनीतिक स्तर पर इस तरह के संकेत देने लगा था कि नेपाल में राजशाही का अंत होना चाहिए. राजीव गांधी सरकार भी उस दौरान जन-आंदोलन का अप्रत्यक्ष तौर पर समर्थन कर रही थी.

राजा ज्ञानेन्द्र शाह ने लोकतंत्र न आने देने की काफी कोशिशें कीं




राजशाही के खात्मे की बात उठती देख नेपाल का राजपरिवार परेशान हो उठा. उसने चीन की मदद मांगी ताकि राजसी परिवार का शासन बना रहे. ये बात खुफिया तरीके से भारत को पता चला. नेपाल में चीन का दखल भारत के लिए कई मामलों में और यहां तक सुरक्षा के लिए भी खतरा है. इस बात को समझते हुए भारत ने कूटनीतिक तरीके के साथ दूसरे कई तरीके भी आजमाने शुरू किए ताकि नेपाल के राजपरिवार पर दबाव बने. जैसे नेपाल में भारत की ओर से फूड सप्लाई को डिस्टर्ब कर दिया गया. ये सब काफी गुप्त तरीके से हुआ ताकि राजतंत्र को संकेत भी चला जाए और देश के बीच रिश्ते भी खराब न हों.
ये भी पढ़ें: क्या चीन ने दलाई लामा के उत्तराधिकारी को कैद कर रखा है?

इस तरीके से भी बात नहीं बनी. इधर नेपाल में चीन का दखल बढ़ता दिख रहा था. अब मामला ज्यादा गंभीर हो चुका था. यही वो वक्त था जब मामले में रॉ ने दखल दिया. तब इस खुफिया एजेंसी के तत्कालीन चीफ ने इस काम के लिए अपने सबसे अच्छे अफसर को चुना. जीवनाथन नाम के इस रॉ एजेंट ने वो काम शुरू किया जो देश की डिप्लोमेटिक लॉबी नहीं कर पाई थी.

नेपाल में चीन का दखल भारत के लिए कई मामलों में और यहां तक सुरक्षा के लिए भी खतरा है


राजतंत्र के खात्मे और लोकतंत्र की बहाली के लिए रॉ एजेंट ने नेपाल के तत्कालीन माओवादी नेता पुष्पकमल दहल की मदद ली. ये वही नेता थे, जो आगे चलकर दो बार नेपाल के पीएम बने. अब हाल में नेपाल में चल रही राजनैतिक उठापटक में भी दहल की बड़ी भूमिका है. वे कथित तौर पर नेपाल के पीएम ओपी शर्मा ओली और चीन की मिलीभगत को खत्म करना चाहते हैं. उस वक्त भी रॉ के साथ मिलकर पुष्पकमल दहल ने काम किया. रणनीति के तहत ये माओ नेता दूसरी पार्टियों के साथ मिल गया ताकि राजतंत्र का पलड़ा हल्का हो सके.

ये भी पढ़ें: क्या है विंटर डीजल, जो लद्दाख में भारतीय सेना की मदद करेगा

चीन के मंसूबे नाकामयाब करने में रॉ की कोशिश रंग लाई. साल 2008 में भारत के इस पड़ोसी देश ने राजशाही खत्म करके खुद को लोकतांत्रिक देश घोषित कर दिया. रॉ के जरिए भारत की मदद करने वाले प्रचंड लोकतांत्रिक नेपाल के पहले पीएम बने. इन सारी बातों का जिक्र खुद रॉ के फॉर्मल स्पेशल डायरेक्टर अमर भूषण ने अपनी किताब Inside Nepal में किया है.

लोकतंत्र की बहाली के लिए रॉ एजेंट ने नेपाल के तत्कालीन माओवादी नेता पुष्पकमल दहल की मदद ली- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


वैसे राजशाही के अंत के बीच नेपाल के राजपरिवार में एक बड़ा हादसा हुआ. साल 2001 के जून में यहां रॉयल पैलेस के भीतर ही नरसंहार हुआ, जिसमें परिवार के 9 सदस्य मारे गए. इसके बाद बने राजा ज्ञानेन्द्र शाह ने अगले 7 सालों तक सत्ता संभाली. साल 2008 में लोकतंत्र आने के बाद से वे नेपाली राजनीति से लगभग गायब हो गए. राजगद्दी से हटने के बाद ज्ञानेंद्र नारायणहिति राजमहल छोड़कर नागार्जुन पैलेस में शिफ्ट हो गए. ये वो महल है, जहां राजपरिवार छुट्टियां बिताने आया करता था.

ये भी पढ़ें: आखिर ब्रिटेन को हांगकांग से क्यों है इतना मतलब? 

सत्ता से हटने के बाद भी ज्ञानेंद्र के पास अच्छी-खासी प्रॉपर्टी है. माना जाता है कि पूरी दुनिया में उनके कई बिजनेस चल रहे हैं, जिनकी कीमत सैकड़ों अरब डॉलर में होगी. साल 2008 में केवल Soaltee Hotel में उनका इनवेस्टमेंट 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा का था. कई बड़ी कंपनियों जैसे Himalayan Goodricke, Surya Nepal Tobacco और Annapurna Hotel में उनके भारी शेयर्स हैं. इसके साथ ही नेपाल में ही उनकी चाय की बागानें हैं, मालदीव में एक पूरा द्वीप उन्होंने खरीद रखा है और नाइजीरिया में तेल कंपनी में शेयर हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading