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    तारों के निर्माण प्रक्रिया समझने के लिए खगोलविदों ने ली भारी धातुओं की ली मदद

    खगोलविदों (Astronomers) ने एक ऐसा तरीका निकाला है जिससे वे तारों की निर्माण (Formation of Stars) प्रक्रिया सहित उनके पूरे इतिहास (History) के बारे में सब कुछ जान सकते हैं.(प्रतीकात्मक तस्वीर: ESO Twitter)
    खगोलविदों (Astronomers) ने एक ऐसा तरीका निकाला है जिससे वे तारों की निर्माण (Formation of Stars) प्रक्रिया सहित उनके पूरे इतिहास (History) के बारे में सब कुछ जान सकते हैं.(प्रतीकात्मक तस्वीर: ESO Twitter)

    तारों के निर्माण (Formation of Star) की प्रक्रिया की व्याख्याएं अवलोकनों (observation) से मेल नहीं खा रही थीं, लेकिन गैलेक्सियों (Galaxies) में भारी धातुओं (Heavy Metals) की जानकारी से शोधकर्ताओं का सफलता मिली.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 8, 2020, 11:17 AM IST
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    शुरू से ही हमारे खगोलविद (Astronomers) पूरे ब्रह्माण्ड (Universe) के निर्माण की प्रक्रिया को समझने की कोशिश कर रहे हैं. इसमें वैसे तो सबसे अहम पृथ्वी (Earth) के निर्माण और वहां पर जीवन के विकास की प्रक्रिया कैसे विकसित हुए यह समझना है, लेकिन इसके लिए वैज्ञानिकों को यह भी लगता है कि तारों के निर्माण (Formation of Stars) को समझने से पृथ्वी और ब्रह्माण्ड के निर्माण के रहस्य भी सुलझ सकेंगे. अब खगोलविदों ने तारों की निर्माण प्रक्रिया को समझने के लिए नया तरीका विकसित किया है.

    तारे और तत्वों का निर्माण
    यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के इंटरनेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोनॉमी रिसर्च (ICRAR) के खगोलविदों का यह तरीका तारों के निर्माण के शुरू से होने वाली प्रक्रिया को समझने में मददगार हो सकता है. ICRAR से इस अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता डॉ सैबीन बेल्स्टेड ने बताया, “तारों को बहुत ही ज्यादा ताकत वाले न्यूक्लियर पॉवर प्लांट्स की तरह माना जा सकता है. वे हाइड्रोजन और हीलियम जैसे हल्के तत्व लेते हैं और अरबों सालों में उससे पीरियोडिक टेबल वाले भारी तत्वों को निर्माण करते हैं जो आज के ब्रह्माण्ड में हर तरफ फैले हैं.”

    तत्वों के निर्माण करने वाली फैक्ट्री
    डॉ बेल्स्टेड ने कहा, “आज जो हमारे शरीर में कार्बन, कैल्शियम, लोहा है, जो ऑक्सीजन हमें सांस के जरिए अंदर ले रहे हैं और कम्प्यूटर में जो सिलिकॉन है, वह सब इसलिए हैं क्यों इन्हें किसी तारे ने बनाकर छोड़ा था. तारे ही सभी तत्वों के निर्माण करने वाली फैक्ट्री हैं.



    कठिन काम है यह
    अरबों साल पहले तारों और गैलेक्सी का निर्माण कैसे हुआ यह समझने के लिए हमें बहुत ही शक्तिखाली टेलीस्कोप के जरिए उन गैलेक्सियों का अवलोकन करने का कठिन काम करना होगा जो आज हमारे ब्रह्माण्ड में हमसे अरबों प्रकाशवर्ष दूर स्थित हैं.

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    खगोलविदों (Astronomers) के लिए पास की गैलेक्सी (Galaxy) का अवलोकन (observation) करना आसान होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


    पास की गैलेक्सियों का अध्ययन आसान
    पास की गैलेक्सियों का अवलोकन करना तुलनात्मक रूप से आसान है. इन गैलेक्सियों से खगोलविद इनके पहले के जीवन का आंकलन करते हैं जिसे तारों के निर्माण के इतिहास (star-formation history) कहा जाता है. इससे शोधकर्ताओं का पता चलता है कि कैसे वे अरबों साल पहले पैदा हुए हैं. इसके लिए उन्हें सुदूर स्थित गैलेक्सियों का अध्ययन करने की जरूरत नहीं पड़ती.

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    अभी तक कैसे होता था अध्ययन
    परंपरागत तौर पर खगोलविद तारों के निर्माण के इतिहास का अध्ययन करते समय यह मानते हैं कि गैलेक्सी में भारी तत्वों की मात्रा जिसे मेटलिसिटी (metallicity) कहा जाता है, समय के साथ नहीं बदलती. लेकिन जब उन्होंने अपने मॉडल्स के आधार पर यह जानने की कोशिश की कि ब्रह्माण्ड में तारे कैसे बने होंगे तो उनके नतीजे उससे मेल नहीं खाते दिखे जो उन्होंने टेलीस्कोप से देखा.

    क्या छूट रहा था फिर
    बेल्स्टेड ने का कहना है कि नतीजों का अवलोकनों से मेल न खाना एक बड़ी समस्या है. उन्होंने कहा, “यह बताता है कि हमसे कुछ चूक हो रही है. हमसे कुछ छूट रहा है. यह छूटने वाला तत्व गैलेक्सियों में समय के साथ बनने वाले भारी तत्व थे.”

    अब मेल खाने लगे नतीजे
    आसपास की करीब सात हजार गैलेक्सियों से आने वाली ऊर्जा और प्रकाश की तरंगों के मॉडल में नए एल्गॉरिदम का उपयोग कर शोधकर्ताओं ने सफलता पूर्वक यह पता लगा लिया कि ब्रह्माण्ड में तारे कैसे बनते हैं. और उनके नतीजे पहली बार टेलीस्कोप के नतीजों से भी मेल खाते दिखे.

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    खगोलविदों (Astronomers) ने पास की सात हजार गैलेक्सियों (Galaxies) का अध्ययन किया. . (प्रतीकात्मक तस्वीर)


    यह कर सके शोधकर्ता
    इस एल्गोरिदम के कोड को बनाने वाले ICRAR के एसोसिएट प्रोफेसर एरोन रोबोथम ने कहा, “हम पहली बार यह तय करने में सफल रहे कि कैसे गैलेक्सियों के भारी तत्वों में समय के साथ बदलाव आया.”

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    इससे शोधकर्ता अब यह भी जान सकेंगे के ब्रह्माण्ड में तारे कैसे बने और यह भी कि कौन सा तारा कब बना. अब शोधकर्ताओं का लक्ष्य यह पता लगाना है कि किसी गैलेक्सी में तारे कब बनना बंद होंगे या वह गैलेक्सी कब खत्म हो जाएगी. यह शोध मंथली नोटिसेस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी में प्रकाशित होने वाला है.
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