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जानिए क्यों खास है सूर्य से दुगने बड़े तारे का प्लैनेट सिस्टम

यह ग्रहीय सिस्टम (Planetary System) के बारे में हबल टेलीस्कोप से भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

यह ग्रहीय सिस्टम (Planetary System) के बारे में हबल टेलीस्कोप से भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

नासा (NASA) के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) से वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि वह हमारे सूर्य से दोगुने बड़े तारे के सिस्टम की जानकारी जुटा सकेगा जिससे ग्रह निर्माण (Planet Formation) की जानकारियां मिल सकेंगी.

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    हमारे ब्रह्माण्ड में बहुत से ऐसे पिंड हैं जिनकी रोशनी तो पृथ्वी तक पहुंचती है, लेकिन उनके बारे में सही और पूरी जानकारी एक अच्छे टेलीस्कोप की कमी के कारण नहीं मिल पाती है. पिछले कुछ दशकों में उन्नत टेलीस्कोप ने इस समस्या का कुछ हद तक समाधान किया  है, लेकिन साथ ही ऐसे कई तारों और ग्रहों की भी खोज हुई है जिन्हें बेहतर अध्ययन के लिए और उन्नत टेलीस्कोप का इंतजार है. इस साल प्रक्षेपित होने जा रहा नासा (NASA) का जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) से ऐसी ही अपेक्षाएं हैं. वह ऐसे तारे के सिस्टम (Planetary System) का अध्ययन करने में मदद करेगा जो हमारे सूर्य से दोगुना है.

    यह तारा हमसे केवल 63 प्रकाशवर्ष दूर है और इसका ग्रहीय तंत्र यानि प्लैनेटरी सिस्टम बहुत खास है जो हमारे वैज्ञानिकों को ग्रह निर्माण के बारे में बहुत सी जानकारी दे सकता है. इस अजीब और युवा ग्रह तंत्र में कम से कम दो ग्रह हैं जिनके साथ छोटी चट्टानी पिंड और धूल भरी डिस्क भी है.

    पहेली बना हुआ है यह सिस्टम
    बीटा पिक्टोरिस नाम के ग्रह तंत्र हमारे वैज्ञानिकों के लिए पहेली बना हुआ है कि क्योंकि इसकी डिस्क की वजह से यहां से आने वाली जानकारी स्पष्ट नहीं हो पा रही है और इसके हबल टेलीस्कोप काफी नहीं हैं. शोधकर्ता इस सिस्टम की गतिविधियों को समझने के लिए यहां की धूल की संरचना और विशेषताओं का अध्ययन करना चाहते हैं. इसके लिए वे जेम्स वेब टेलीस्कोप का इंतजार कर रहे हैं.

    इस सिस्टम का हो खास तौर से अध्ययन
    नासा का जेम्स वेब टेलीस्कोप बीटा पिक्टोरिस के बहुत से अध्ययन करेगा. जिसकी अगुआई नासा और बाटिमोर में स्पेस टेलीस्कोप साइंस के वैज्ञानिक करेंगे. वैज्ञानिक इस सिस्टम की तारे की रोशनी को रोकेंगे और फिर उस सिस्टम की तस्वीर लेंगे जिससे वे डिस्क की धूल के बारे में नई जानकारी हासिल कर सकें.

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    नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) से ब्रह्माण्ड के बहुत से रहस्यों पर से पर्दा उठ सकता है. (तस्वीर: Northrop Grumman)


    क्यों खास है यह सिस्टम
    बीटा पिक्टोरिस सिस्टम 1980 में खोजा गया था. इस सिस्टाम का तारा बीटा पिक्टोरिस कहा जाता है जिसका आकार हमारे सूर्य से दो गुना है और यह काफी गर्म तारा भी है. अब तक इसका अध्ययन रेडियो, इंफ्रारेड, प्रकाश के जरिए किया गया था. इस तारे की खासियत है कि यह केवल 2 करोड़ साल पुराना है जबकि हमारा सूर्य 4.6 अरब साल पुराना है.

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    यह हो सकती है इसकी अवस्था
    अवलोकनों के आधार पर वैज्ञाननिकों का मानना है कि इस स्थिर तारे के कम से कम दो ग्रह और एक अवशेषों की डिस्क होनी चाहिए जिसमें धूमकेतु, क्षुद्रग्रह, अलग अलग आकार की चट्टानें भी होनी चाहए जैसा की हमारे सौरमंडल के साथ था जब वह युवावस्था में था. अवशेषों की डिस्क भी काफी युवा है और यह हमारे सौरमडंल कूपर बेल्ट से भी भारी हो सकती है.

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    इस सिस्टम की खासियत यह है कि यह हमारे सौरमंडल की तुलना में बहुत युवा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


    यह जानने की कोशिश
    नासा के जेम्स वेब टेलीस्कोप के कोरोनाग्राफ तारों के प्रकाश को रोकेंगे जिससे उस सिस्टम के अवशेषों की डिस्क साफ दिख सकेगी जो पूरे सिस्टम को घेरे हुए है. शोधकर्ता यह भी जानना चाहते हैं कि  धूल के कण ग्रहों से कैसे अंतर क्रिया कर रहे हैं. अभी तक हमें यह पता है कि इस सिस्टम में दो भारी ग्रह हैं उनसे भी दूर छोटे पिंडों वाली एक बेल्ट है. लेकिन बीच में क्या है यह हमें पता नहीं हैं.

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    वेब टेलीस्कोप ब्रह्माण्ड के लिए अब तक का सबसे शक्तिशाली टेलीस्कोप साबित होगा.  यह सुदूर पिंडों से आने वाली इफ्रारेड किरणों का उच्च विभेदन क्षमता से अध्ययन कर सकेगा. वहीं पृथ्वी से बाहर स्थित होने पर यहां अंतरिक्ष से आने वाले तरंगों में कोई व्यवधान नहीं होगा. वेब टेलीस्कोप से ब्रह्माण्ड के बहुत सारे रहस्यों पर से पर्दा उठने की संभावाना है.

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