इस एक सवाल का जवाब दे देंगे तो मिल जाएगी बढ़िया नौकरी

HR को पसंद होते हैं नए प्रयोग करने वाले कर्मचारी

एक बड़ी कंपनी की HR ने बताया नौकरी पाने के लिए आपके पूरे रेज्यूमे से ज्यादा यह सवाल मायने रखता है.

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    स्टारबक्स की पूर्व HR ने बताया है कि इंटरव्यू के दौरान क्या चीजें मायने रखती हैं? इस पूर्व HR का नाम है ट्रेसी विल्क. वे स्टारबक्स की पूर्व HR चीफ हैं और पीपल एट द लर्निंग एक्सपीरियंस की पूर्व वाइस प्रेसीडेंट रह चुकी हैं. ट्रेसी कहती हैं कि मैं किसी ऐसे व्यक्ति को कंपनी में नौकरी दूंगी जो कि खतरे उठाता हो, भले ही वह उसमें फेल हो जाता हो बजाए किसी ऐसे व्यक्ति के जो सेफ रास्ता लेना पसंद करता हो.

    मसलन अगर आप ट्रेसी विल्क के साथ इंटरव्यू में बैठे हों तो हो सकता है कि वे पूछें, "अपने सबसे चैलेंजिंग प्रोजेक्ट के बारे में बताइए और यह भी बताइए कि आपने इससे क्या सीखा?" वे कहती हैं कि किसी कठिन काम से जुड़े अनुभव जानने से पता चल सकता है कि जिस व्यक्ति का इंटरव्यू लिया जा रहा है, वह अपनी गलतियों से सीखना चाहता है या नहीं?

    वे कहती हैं कि उनके यह पूछने का मतलब यह नहीं होता कि वे लोग बताएं कि कैसे वे अपनी डेडलाइन मिस कर देते हैं या फिर कैसे किसी बात के बारे में फिर से बॉस करना उनके लिए मुश्किल होता है?

    वे कहती हैं कि अगर सामने बैठा शख्स इसके बाद तुरंत इस बारे में बताने लगे कि कैसे उसने किसी काम को अलग तरह से किया तो इसका मतलब होता है कि वह अपने बारे में जागरुक है और यह एक अच्छी बात होती है. क्योंकि इससे ट्रेसी देखना चाहती हैं किसी कठिन परिस्थिति से शख्स कैसे निपटा और भविष्य में वह इसका प्रयोग किस तरह से कर सकता है?

    ट्रेसी चाहती हैं कि किसी ऐसे व्यक्ति का सलेक्शन किया जाए जिसके दिमाग में तेजी से बिजनेस को बढ़ाने की सबूत मिलें. या जिसमें कड़ी मेहनत के जरिए इसे पैदा किए जाने के निशान मिलें.

    किसी जॉब इंटरव्यू में अपनी कमियों और गलतियों के बारे में बात करना सबसे कठिन होता है. कई बार इसे सीधे पूछ लिया जाता है कि आपकी सबसे बड़ी कमी क्या है? और कई बार यह सवाल थोड़ा घुमाकर किया जाता है, आपको अपनी आखिरी जॉब से क्यों निकाला गया?

    ट्रेसी कहती हैं कि किसी इंसान के रेज्यूमे से ज्यादा वे इस बात पर ध्यान देती हैं कि उसमें सीखने की कितनी क्षमता है? मैं यह देखना चाहती हूं कि पहले से बने-बनाए तरीके से चलने वाले संस्थान में क्या वह शख्स निभा पाएगा और क्या वह फिर भी थोड़ा सा नएपन के साथ अपने काम को करने के लिए तैयार है?

    'ग्रोथ माइंडसेट' शब्द का सबसे पहले प्रयोग साइकोलॉजिस्ट कैरोल ड्वेक ने किया था. वे मानते थे कि कड़ी मेहनत के जरिए टैलेंट को डेवलप किया जा सकता है. माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्य नडेला भी इस कैरोल ड्वेक की किताब 'माइंडसेट: द न्यू साइकोलॉजी' ऑफ सक्सेस के प्रशंसक हैं और इस थियरी में विश्वास करते हैं. माइक्रोसॉफ्ट की चीफ पीपुल ऑफिसर कैथलीन होगन कहती हैं कि माइक्रोसॉफ्ट के कर्मचारी कभी यह साबित करने का प्रयास नहीं करते कि कमरे में वही सबसे स्मार्ट हैं बल्कि इसके बजाए वे सीखकर अपना सबसे बेहतरीन देने का प्रयास करते हैं.

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