स्टीफन हॉकिंग के सिद्धांत जो बनाते हैं उन्हें हीरो..

स्टीफन हॉकिंग अपनी मजबूत इच्छाशक्ति के लिए दुनिया के हीरो थे. लेकिन ब्रह्मांड को जानने में उनका क्या योगदान था, उसे समझे बगैर उन्हें दी गई श्रद्धांजलि अधूरी मानी जाएगी. हमने यहां उनके सिद्धांतों को थोड़ा सरल तरीके से पेश करने की कोशिश की है. हालांकि यूनिवर्स एक ऐसी पहेली है जिसकी कई परते हैं, हॉकिंग ने उन्हीं में से कुछ पर से पर्दा उठाने का प्रयास किया है. आपके साथ साथ हम भी उसे समझने की कोशिश कर रहे हैं.

News18Hindi
Updated: March 14, 2018, 6:24 PM IST
स्टीफन हॉकिंग के सिद्धांत जो बनाते हैं उन्हें हीरो..
स्टीफन हॉकिंग का फिज़िक्स की दुनिया में अहम योगदान रहा
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Updated: March 14, 2018, 6:24 PM IST
स्टीफन हॉकिंग ने ब्रह्मांड से जुड़े कुछ अहम सवालों के जवाब देने की कोशिश की थी. ऐसे सवाल जो कई बार शायद छत पर लेटे आसमान को ताकते हुए आपके दिमाग में भी उमड़ते हैं लेकिन फिर कुछ और दुनियावी विचारों के साथ मिलकर उड़न छू हो जाते हैं. हॉकिंग ने ब्रह्मांड से संबंधित ऐसे ही सवालों की गहराई में जाने का काम किया. उनकी बहुचर्चित किताब ‘द ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ हॉकिंग के उन अनुमान, दावे और जवाबों को सामने रखती है जो समय और कायनात के होने को लेकर हमें और ज्यादा जिज्ञासु बना देती हैं.

हालांकि यहां यह साफ कर देना जरूरी है कि हॉकिंग ने न ही ब्लैक होल्स का आविष्कार किया और न ही वह बिग बैंग को पहले पहल लेकर आए. हॉकिंग ने तो इन थ्योरी की तह में जाने और उनकी परते उघाड़ने का काम किया. ब्लैक होल, बिग बैंग और सिंगुलैरिटी जैसे विचारों को 1939 में अमेरिकी भौतिकशास्त्री रॉबर्ट ओपेनहायमर ने अपने पेपर में जगह दे दी थी. लेकिन फिर 1959 में हॉकिंग और उनके साथियों ने इन अलसाए पड़े सिद्धांतों को हवा देने का काम किया.

ब्लैक होल के बीचोंबीच क्या है – ब्लैक होल्स एक भारी भरकम वस्तु की तरह है जिसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र बेहद शक्तिशाली है. इतना शक्तिशाली कि ब्रह्मांड की कोई भी वस्तु उसके मुंह में जाने से बच नहीं सकती, यहां तक कि रोशनी भी ब्लैक होल के भूखे पेट का भोजन बन जाती है. जब कोई बड़ा तारा बूढ़ा होने लगता है तो उसके अंदर खुद का वजन सहन करने की ताकत नहीं बचती. वह धीरे धीरे अपने ही अंदर सिमटने लगता है और एक एटम जितना छोटा हो जाता है. ऐसा होते हुए वह एक ब्लैक होल में तब्दील हो जाता है और जो कुछ भी उसके पास से गुज़रता है (आप भी) वो उसे निगल जाता है. आप उससे बचकर निकलने की कोशिश नहीं कर सकते क्योंकि उसका गुरुत्वाकर्षण इतना ज्यादा है कि हम खुद ब खुद उसमें खिंचते चले जाएंगे.

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ब्लैक होल्स - ब्रह्मांड का सबसे भूखा पदार्थ जो रोशनी को भी निगल जाता है


हॉकिंग ने अपने साथी वैज्ञानिक रोजर पेनरोज़ के साथ यह पता लगाने की कोशिश की कि अगर आप इस ब्लैक होल के बीचोंबीच पहुंचेंगे तो आप को क्या मिलेगा. सिंग्युलैरिटी –  ब्लैक होल का केंद्र जहां निगला हुआ सारा सामान मिलकर मानो एक छोटी सी गोली में सिमट जाता है. यही वो जगह है जहां ब्लैक होल का गुरुत्वाकर्षण सबसे ज्यादा होता है. एक होल के अंदर आपको कायनात के न जाने कौन कौन से अंश मिलेंगे, तारे, हाथी, टेबल, रोटी, धूल, मिट्टी और न जाने क्या क्या. इस गोली नुमा तत्व में फिज़िक्स के वे सारे नियम कायदे फेल हो जाते हैं जो स्पेस और टाइम की बात करते हैं. कोई नहीं जानता कि यहां पहुंचकर हमारा क्यो होगा..कोई कहता है यहां एक अलग ब्रह्मांड है तो कोई कहता है कि व्यक्ति इसमें जाकर सब कुछ भूल जाता है. कुल मिलाकर ब्लैक होल में हमारा हश्र एक पहेली ही है.

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सिंगुलैरिटी, ब्लैक होल के बीचोंबीच जहां ग्रैविटी सबसे ज्यादा होती है और एक छोटी सी गोली में कायनात के न जाने कितने तत्व मिल जाएंगे


ब्लैक होल के किनारे पर क्या होता है – इसके बाहरी हिस्से को इवेंट हॉराइज़न कहते हैं जहां उर्जा भारी मात्रा में पाई जाती है. हॉकिंग का मानना था कि क्वांटम इफेक्ट की वजह से किनारे पर गर्म कण टूट-टूट कर ब्रह्माण्ड में फैलते हैं.  इसे ही हॉकिंग रेडिएशन कहते हैं. कोई कण किरण की तरह ब्रह्मांड में फैल जाता है और कोई गढ्ढे में ही रह जाता है. कण के पास अपने ‘दोस्त’ को बचाने का कोई रास्ता नहीं होता, गुरूत्वाकर्षण जो इतना तेज़ होता है. हॉकिंग की खोज के मुताबिक हॉकिंग रेडिएशन की वजह से एक दिन ब्लैक होल एक दिन पूरी तरह द्रव्य से मुक्त होकर गायब हो जाता है.

जो कण अंदर रह गया उसके अंदर नेगेटिव मास होता है जो ब्लैक होल को वक्त के साथ छोटा, बहुत छोटा करता जाता है. और अच्छे खासा वक्त लेने के बाद यह ब्लैक होल लाखों परमाणु बमों की शक्ति के साथ फट जाता है.

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हॉकिंग रेडिएशन - ब्लैक होल के किनारे होने वाली गतिविधि जिसमें कोई कण बच निकलता है और कोई गढ्ढे के अंदर रह जाता है


स्टीफन हॉकिंग ने हमें इस सोच की तरफ बढ़ाया कि एक वक्त ऐसा था जब ब्रह्मांड में मौजूद छोटे से छोटा कण एक छोटी सी गोली (सिंग्युलैरिटी) में मानो बंद था जो सदियों बाद फटा (बिग बैंग) और तब बना वो ब्रह्मांड जिसके हम वर्तमान में हिस्सा हैं. यह पहाड़, ग्रह, नदियां, सूरज, चांद, सितारे, आप और हम सब कुछ इस बिग बैंग के ही नतीजे हैं. इंसान और दुनिया के अस्तित्व के सिरे को खोजने की कोशिश और अपने दिए गए सिद्धांतों को बार बार चुनौती देना ही हॉकिंग को इतना खास बनाती है.

वैसे यह सब जानने के बाद भी आसमान को ताकना बंद मत कीजिए. जैसा कि हॉकिंग ने कहा है – पैरों को नहीं, ऊपर तारों को देखो. जो देख रहे हो उसका मतलब ढूंढने की कोशिश करो और सोचो कि ब्रह्मांड अस्तित्व में आया कैसे. जिज्ञासु बनो.
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