50 साल बाद भी रहस्य है इस महान भारतीय वैज्ञानिक की मौत

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम (India Space Programme) की बुनियाद रखने वाले वैज्ञानिक को गूगल (Google) सहित पूरी दुनिया याद कर रही है क्योंकि अगर वह आज होते तो 100 साल के होते. पढ़िए एक अनसुनी कहानी कि कैसे उनकी मौत रहस्य बनकर रह गई.

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: August 12, 2019, 5:34 PM IST
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: August 12, 2019, 5:34 PM IST
पिछले दिनों भारत ने चंद्रयान 2 मिशन (Chandrayaan 2 mission) सफलतापूर्वक लॉंच कर अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में फिर अपना रुतबा साबित किया. भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान आज जिस मुकाम पर है, उसके पीछे अस्ल दिमाग विक्रम साराभाई (Vikram Sarabhai) का ही था. साराभाई को ही भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक कहा जाता है. आज यानी 12 अगस्त को उनकी 100वीं जयंती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनकी मृत्यु आज तक एक रहस्य बनी हुई है! अब तक कारणों का कोई पता नहीं चल सका. साराभाई की मौत को आज भी देश की रहस्यमय मौतों (Mysterious Deaths) में गिना जाता है.

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गूगल ने आज एक डूडल (Google Doodle) बनाकर विक्रम साराभाई को श्रद्धांजलि दी और उनकी याद में तमाम कार्यक्रम भी हो रहे हैं. उनकी जन्म शताब्दी (Birth Centenary) पर पढ़िए जीवन नहीं बल्कि उनकी मौत से जुड़ी एक अनसुनी और महत्वपूर्ण कहानी. साराभाई की मौत को लेकर समय समय पर सवाल और चर्चाएं होती रही हैं लेकिन अब भी आलम यही है कि उनकी मौत एक अनसुलझी पहेली बनी हुई है. पढ़ें क्या है पूरी कहानी.

ये विक्रम साराभाई ही थे, जिन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को दुनिया में जगह दिलाई. हालांकि उन्होंने वस्त्र, प्रबंधन, आणविक ऊर्जा, इलेक्ट्रानिक्स और कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण काम किया. कहा जा सकता है कि वो अपने आपमें एक विराट संस्था थे, जिनके अंदर विजनरी साइंटिस्ट के साथ दूरदर्शी उद्योगपति, शिक्षाविद और कला पारसी जैसे पहलू मौजूद थे. जो उनके संपर्क में आता, उनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह पता.

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कोवलम के रिसोर्ट्स में रुके थे
विक्रम तब 52 साल के थे. वो एक कार्यक्रम में केरल के कोवलम गए थे. वहां उन्होंने दिन में पहले एक रूसी राकेट के परीक्षण को देखा और फिर थुंबा रेलवे स्टेशन का उद्घाटन किया. हालांकि वो अक्सर कोवलम जाते थे. ये उनका पसंदीदा समुद्री तट था. यहां वो एक खास रिसोर्ट्स में रुकते थे.
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विक्रम साराभाई जब रात में कोवलम के रिसोर्ट्स में अपने कमरे में सोए तो वो एकदम स्वस्थ थे लेकिन सुबह मृत पाए गए


सुबह कमरे में मृत पाए गए
31 दिसंबर 1971 को जब वो रात में कोवलम के इस रिसोर्ट्स में रुके, तब तक सब कुछ सामान्य था. लेकिन सुबह उन्हें उनके कमरे में मृत पाया गया. निधन की कोई खास वजह सामने नहीं आ सकी.

उन पर किताब विक्रम साराभाई-ए लाइफ की लिखने वाली अमृता शाह से मल्लिका ने बाद में बताया कि पापा, कोई ऐसी बात नहीं थी, जिसे उनके निधन की वजह माना जाए. उनकी मेडिकल रिपोर्ट्स हमेशा ठीक रहती थी. हृदय बेहतर तरीके से काम कर रहा था.

माहौल गमगीन हो गया
दिसंबर 1971 में देश खुशियां बना रहा था, क्योंकि बांग्लादेश युद्ध में पाकिस्तान के खिलाफ जीत के बाद देश का माहौल खुशनुमा था. सभी नए साल के स्वागत में जुटे हुए थे. तभी विक्रम साराभाई के निधन की खबर पूरे देश की सुर्खियां बन गई.

खुशी का वातावरण गमगीन हो गया. कायदे से तो उनके शव का पोस्ट मार्ट्म कराया जाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो सका, अगर ऐसा होता तो उनकी रहस्यमय मृत्यु की वजह पर कोई तो प्रकाश पड़ता. दरअसल विक्रम की मां सरलादेवी नहीं चाहती थीं कि उनके बेटे के शव का पोस्टमार्टम किया जाए.

पत्नी मृणालिनी के साथ विक्रम साराभाई (फाइल फोटो)


उस विमान से लौटा शव 
विक्रम की योजना एक जनवरी को अहमदाबाद आकर परिवार के साथ नया साल सेलिब्रेट करने की थी. विमान में उनकी सीट बुक थी. बगल की सीट सुरक्षा कारणों से खाली रखी गई थी. साथ ही साथ ट्रेन का एक पूरा कूपा उनके आरक्षित था, ताकि वो ट्रेन या विमान जिससे भी सफर करना चाहें, कर सकते हैं. लेकिन दुर्भाग्य देखिए कि जिस विमान से उन्हें खुद लौटना था, उससे उनका शव लाया गया.

अमेरिका और रूस के जासूस रखते थे नजर
अहमदाबाद में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) के स्थापक रहे विक्रम साराभाई की सहयोगी कमला चौधरी ने किताब की लेखिका को बताया, विक्रम कई बार कहते थे कि अमेरिका और रूस के जासूस उन पर नजर रखते हैं. वो उनके टारगेट हो सकते हैं.

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First published: August 12, 2019, 5:34 PM IST
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