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इस अंग्रेजी लेखक से प्रेरित है बालासाहेब के खानदान का 'Thackeray' सरनेम

बाल ठाकरे के पिता भारत में पैदा हुए ब्रिटिश लेखक विलियम मेकपीस थैकरे (William Makepeace Thackeray) के प्रशंसक थे. उन्हीं से प्रेरित होकर उन्होंने अपने नाम में Thackeray जोड़ा.

बाल ठाकरे के पिता भारत में पैदा हुए ब्रिटिश लेखक विलियम मेकपीस थैकरे (William Makepeace Thackeray) के प्रशंसक थे. उन्हीं से प्रेरित होकर उन्होंने अपने नाम में Thackeray जोड़ा.

बाल ठाकरे के पिता भारत में पैदा हुए ब्रिटिश लेखक विलियम मेकपीस थैकरे (William Makepeace Thackeray) के प्रशंसक थे. उन्हीं से प्रेरित होकर उन्होंने अपने नाम में Thackeray जोड़ा.

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    मुंबई. आपने कभी ठाकरे परिवार के सरनेम की अंग्रेजी में स्पेलिंग पर ध्यान दिया है? यह 'ठाकरे' की बजाए 'थैकरे' जैसा है? ठाकरे परिवार जो सरनेम लगाता है उसकी स्पेलिंग Thackeray है. दरअसल ठाकरे परिवार के सरनेम में यह शब्द बाल ठाकरे के पिता केशव सीताराम ठाकरे ने जोड़ा था. बाल ठाकरे के पिता भारत में पैदा हुए ब्रिटिश लेखक विलियम मेकपीस थैकरे (William Makepeace Thackeray) के प्रशंसक थे. उन्हीं से प्रेरित होकर उन्होंने अपने नाम में Thackeray जोड़ा. केशव सीताराम ने इससे पहले भी अपना सरनेम बदला था. दरअसल ठाकरे परिवार के सरनेम की कहानी बड़ी दिलचस्प है.

    बाल ठाकरे के पिता के सरनेम की कहानी
    बाल ठाकरे के पिता का बचपन का नाम था केशव सीताराम पनवेलकर. उनका जन्म महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के पनवेल इलाके में हुआ था. केशव सीताराम की आत्मकथा मांझी जिवनगाथा के मुताबिक उनके एक पूर्वज मराठा शासन में धोड़प किले के किलेदार थे. और शायद यहीं से उनके पूर्वजों का सरनेम धोड़पकर हो गया. केशव सीताराम के परदादा कृष्ण माधव धोड़पकर (अप्पा साहेब) रायगढ़ जिले के ही पाली इलाके में रहते थे.

    बाद में उनके दादा रामचंद्र धोड़पकर पनवेल में बस गए. केशव सीताराम के पिता सीताराम धोड़पकर ने पनवेल इलाके की परंपरा के मुताबिक नाम में पनवेलकर लगाया. शुरुआत में केशव के नाम के साथ भी पनवेलकर सरनेम ही लगा रहा, लेकिन बाद में उन्होंने अपना नाम खुद बदल लिया. उन्होंने अपना सरनेम ठाकरे कर लिया.

    बाल ठाकरे के पिता के नाम पर साल 2002 में भारत सरकार ने डाक टिकट जारी किया था.
    बाल ठाकरे के पिता के नाम पर साल 2002 में भारत सरकार ने डाक टिकट जारी किया था.


    केशव सीताराम के नाम में एक और परिवर्तन हुआ. कलकत्ता विश्वविद्यालय से शिक्षा लेने के बाद उन्होंने प्रबोधनकार के पेन नेम से लिखना शुरू किया. बाद में वो प्रबोधनकार ठाकरे के नाम से मशहूर हुए. भारत सरकार ने उनके नाम पर साल 2002 में एक डाक टिकट भी जारी किया था. बाद में केशव ने अपने नाम की स्पेलिंग अंग्रेजी लेखक थैकरे जैसी कर ली. लेकिन आम-बोलचाल में इसे ठाकरे ही पुकारा जाता रहा. केशव सीताराम ने नाम में जो परिवर्तन किया उसे बाद में बाल ठाकरे और फिर पूरे परिवार ने अपनाया.

    बड़े सामाजिक कार्यकर्ता थे केशव
    केशव सीताराम ठाकरे बड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं में शुमार किए जाते थे. उन्होंने कई सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई थी. जातिवाद और छुआछूत के खिलाफ उन्होंने पूरी जिंदगी लड़ाई लड़ी. उन्होंने कई किताबें लिखीं. केशव भाषाई आधार पर अलग महाराष्ट्र राज्य की मांग रखने वाले संयुक्त महाराष्ट्र समिति आंदोलन के अग्रणी नेताओं में से थे. उन्होंने प्रबोधन के नाम से एक मराठी पत्रिका भी निकाली थी.

    विलियम थैकरे अंग्रेजी के मशहूर उपन्यासकार थे. उनका जन्म भारत में हुआ था.
    विलियम थैकरे अंग्रेजी के मशहूर उपन्यासकार थे. उनका जन्म भारत में हुआ था.


    कौन हैं विलियम थैकरे
    विलियम थैकरे मशहूर ब्रिटिश उपन्यासकार हैं. उन्हें व्यंग्य के लिए याद किया जाता है. उनकी कृति वैनिटी फेयर बेहद  मशहूर है. थैकरे का जन्म 1781 में कलकत्ता में हुआ था. उनके पिता ईस्ट इंडिया कंपनी में राजस्व विभाग में सचिव थे. थैकरे की कहानियों पर कई धारावाहिक और फिल्में भी बनाई जा चुकी हैं साल 2017 में आई अंग्रेजी फिल्म द मैन हू इंवेंटेड क्रिसमस में थैकरे का रोल एक्टर माइल्स जप ने प्ले किया था.

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