खूबसूरत गर्लफ्रेंड्स वाला अरबपति 'ड्रग लॉर्ड' जिससे डरते थे अमेरिका समेत कई देश

अल चापो को अब अमेरिका ने बेशक उम्रकैद के साथ 30 साल के कैद की सजा सुनाई हो लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका की जेलें उसे रोक पाएंगी. क्योंकि दो बार वो मैक्सिको की जेल से फरार हो चुका है

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: July 18, 2019, 9:02 PM IST
Sanjay Srivastava
Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: July 18, 2019, 9:02 PM IST
मैक्सिको के ड्रग लार्ड अल चापो को न्यूयार्क की अदालत ने ताउम्र जेल के साथ और 30 साल की सजा सुनाई है. अल चापो का पूरा नाम जोएक्विन अल चापो गुजमैन है. वो दुनिया के सबसे बड़े ड्रग्स कार्टेल यानि ड्रग्स गैंग सिनालोवा का प्रमुख है. उस पर कई फिल्में बन चुकी हैं और कई किताबें लिखी जा चुकी हैं. उसके ढेर सारे किस्से दुनियाभर में मशहूर हैं. उसे ये सजा हत्या की साजिश के अलावा ड्रग्स स्मगलिंग संबंधी कई आरोप के कारण मिली है.

अमेरिकी जज ब्रियान कोगन ने जब उसे सजा सुनाई तो उन्होंने कहा कि अल चापो के खिलाफ पहाड़ सरीखे सबूत और गवाह हैं. उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि उसकी हरकतें शैतान सरीखी हैं. कोर्ट ने उसे 12.6 बिलियन डॉलर की रकम देने का भी आदेश सुनाया, जो उसने पिछले 25 सालों में तमाम ड्रग्स सौदों में कमाए.

दरअसल अल चापो उस शख्स का नाम है, जिसने स्मगलिंग को मैक्सिको और इसके आसपास के कई देशों में इंडस्ट्री की तरह खड़ा कर दिया. अपने गैंग यानि कार्टेल को तमाम देशों में फैलाकर उसे कारपोरेट स्टाइल में ढाला. अमेरिका की अदालत ने उसे जो सजा सुनाई, उसमें एक अभियोग उस पर ये भी लगा कि उसने अपने कार्टेल में अमेरिका में फैलाया हुआ था, जहां वो सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था.

दुनिया में जितना बड़ा और ताकतवर ड्रग्स कार्टेन अल चापो ने खड़ा किया, उसने उसे किसी किवंदती की तरह बना दिया


अदालत ने कहा कि वो इंडस्ट्री स्टाइल में स्मगलिंग गैंग का चलाने वाला क्रिमिनल मास्टरमाइंड है. मैक्सिको के अधिकारियों ने 2017 में उसे इस शर्त पर अमेरिका प्रत्यर्पित किया था कि उसे मौत की सजा नहीं सुनाई जाएगी. अमेरिका लंबे समय से मैक्सिको से उसे प्रत्यर्पित करने की मांग कर रहा था. जब दूसरी बार उसे मैक्सिको में गिरफ्तार किया गया था, तब उसे अमेरिका प्रत्यर्पित करने की पूरी तैयारी हो ही चुकी थी लेकिन वो फिल्मी स्टाइल में भाग निकला था.

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दो बार से जेल से फिल्मी अंदाज में फरार 
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मैक्सिको में दो बार जेल में गया. दोनों बार अलग अंदाज में जेल की चारदीवारी को चकमा देने में सफल रहा. हालांकि उसके बाद जेल के गार्ड ये भी कहते हैं कि वो अगर सुबह अपनी सेल में नजर आता था तो दिन में गायब हो जाता था और रात में फिर वहां होता था.

अल चापो तीन बार मैक्सिको की जेलों में गया. पहली बार वो 1993 में जेल गया और आठ साल वहां रहा. जब वहां से निकला तो कहीं ज्यादा खूंखार और शातिर हो चुका था. इसके बाद 2001 और 2015 में उसे बंदी बनाकर जेल में डाला गया लेकिन दोनों बार जेल की दीवारें उसे लंबे समय के लिए नहीं रोक पाईं.

वर्ष 2001 में जब वो अदालत की सुनवाई से लौट रहा था, तब एक गार्ड की मिलीभगत के बाद लांड्री की टोकरी में छिपकर भाग निकला. दूसरी बार तो उसने और गजब कर दिया. एक दिन वो चुपचाप गायब हो गया. जब उसकी सेल खोली गई तो नीचे एक किलोमीटर ऐसी सुरंग मिली, जिसमें तेजी से मोटरसाइकिल भी भगाई जा सकती थी. जिसने इसे देखा वो हैरान रह गया. ये दोनों जेलें मैक्सिको की हाई सेक्यूरिटी जेलें थीं.

तीसरी बार तुरंत अमेरिका प्रत्यर्पित 
लिहाजा तीसरी बार जब मैक्सिको की पुलिस ने उसे पकड़ा तो तुरंत अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया. अमेरिका में उसे न्यूयॉर्क के लोअर मैनहट्टन हाई सेक्यूरिटी जेल में रखा गया. हालांकि ये जेल किले सरीखी सुरक्षा वाली है लेकिन कहा जा रहा है कि उसे कहीं ज्यादा सुरक्षित जेल में भेजा जाएगा. ऐसी जेल के तौर पर फ्लोरेंस की सुपरमैक्स जेल का नाम लिया जा रहा है. यहां उसे अकेले कमरे में 23 घंटे गुजारने होंगे. उसे एक्सरसाइज का समय तो मिलेगा लेकिन ज्यादा नहीं. अदालत में उसने एक्सरसाइज के लिए एक्स्ट्रा समय देने की गुजारिश की थी लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया.

वो दो बार मैक्सिको की जेलों से नाटकीय अंदाज में फरार हो चुका है


रखैल समेत पूर्व सहयोगियों ने दी खिलाफ गवाही 
अदालत ने उसे सजा देने से पहले सिनालोआ गैंग के दर्जनभर से ज्यादा उसके पूर्व सहयोगियों की गवाही सुनी, इसमें उसकी एक पूर्व रखैल और एक लेफ्टिनेंट शामिल था. ट्रायल 11 हफ्ते तक चला. इसी ट्रायल में खुलासा हुआ कि वो किस तरह काम करता था, किस तरह उसके कहने पर दूसरे गैंग के लोगों की हत्याएं की जाती थीं और दुनिया के कई देशों में फैले उसकी स्मगलिंग इंडस्ट्री में कितने बड़े जहाजों, बोट्स और विमान का इस्तेमाल किया जाता था, जिनके जरिए वो अपने ड्र्गस की खेप भेजा करता था. एक गवाह ने ये भी बताया कि किस तरह अल चापो ने मैक्सिको के पूर्व राष्ट्रपति एनरिक पेना निएतो को मोटी घूस दी थी.

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अमेरिका-मैक्सिको की सीमा पर सुरंगें बनाकर करता था स्मगलिंग
1980 के दशक में अल चापो का नाम दुनिया में ड्रग्स स्मगलिंग में लिया जाने लगा था. अल चापो ने एक नया प्रयोग किया. उसने अमेरिका तक ड्रग्स स्मगलिंग के लिए अमेरिका और मैक्सिको की सीमा पर की सुरंगें बनवा दीं. इन सुरंगों को इंजीनियर्स की देख-रेख में इस तरह बनाया गया कि उससे तेज रफ्तार वाले वाहन गुजर सकें. ड्रग्स के ट्रांसपोर्ट में तेजी आए. यही नहीं दोनों ओर के सीमा गार्डों को मोटा पैसा दिया जाता था. अदालत ने ये कहा कि अल चापो ने अमेरिका में 200 टन से कहीं ज्यादा कोकिन भेजी है.

अल चापो ने करीब एक दशक तक अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर सुरंगों के जरिए स्मगलिंग करके अमेरिका को दहला दिया था


जब अमेरिकी अदालत में अल चापो पर ट्रायल चल रहा था तब उसने अपने बचाव के लिए बड़े वकील खड़े किये. कोशिश की फैसला आने में देर लगे या हल्की सजा हो.

सबसे धनी और ताकतवर है उसका सिनालोवा कार्टेल
अल चापो के गैंग सिनालोवा कार्टेल को मैक्सिको, अमेरिका और लातीनी अमेरिकी देशों में सबसे धनाढ्य और ताकतवर गैंग माना जाता है. ये भी माना जाता है कि अल चापो ने इसे एकछत्र तरीके से चलाया ही नहीं बल्कि काफी ऊपर तक पहुंचाया भी है. उसने समय समय पर अपने विरोधी गैंग्स का सफाया किया तो गद्दारों को क्रूरता से भरी सजाएं भी दीं. खुद अल चापो को खासा निर्मम माना जाता है, जो कभी किसी को माफ नहीं करता. किसी को नहीं मालूम कि वो कब पैदा हुआ लेकिन माना जाता है कि उसकी उम्र 50 से 58 साल के बीच है.

फोर्ब्स लिस्ट में शुमार हो चुका है उसका नाम
उसके बारे में कहा जाता है कि मैक्सिको में वो एक जमाने में इतना ताकतवर था कि समानांतर सत्ता माना जाने लगा था. उसने अकूत धन-दौलत के बल पर सिस्टम के सारे अहम लोगों को खरीद रखा था. फोर्ब्स ने अपनी सबसे धनी और ताकतवर लोगों की सूची में उसे भी शुमार किया था.

अल चापो का नाम फोर्ब्स की दुनिया के सबसे धनवान लोगों की सूची में शामिल हो चुका है (फोटो- नेटफ्लिक्स में उस पर मूवी से साभार)


अल चापो एक एक गरीब परिवार में पैदा हुआ था. अपने पेरेंट्स की सात संतानों में एक.  परिवार सिनालोवा प्रांत में रहता था, जो मैक्सिको का उत्तरी पश्चिमी प्रांत है. बचपन में उसने संतरे बेचे. फिर कार चुराने लगा. इसी दौरान वो सिनालोवा कार्टेल के अपराधियों के संपर्क में आया और इस गैंग में शामिल हो गया.

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तेज और शातिर दिमाग के कारण चढ़ा सीढियां 
सिनालोवा गैंग में शामिल होने के बाद अपने तेज दिमाग और जाबांजी के कारण उसने तेज तरक्की हासिल की. उसे मैक्सिको के अंडर वर्ल्ड में द गॉड फादर कहे जाने वाले सिनालोवा गैंग के बॉस  फेलिक्स गालार्दो के करीब आने में देर नहीं लगी.

08 अप्रैल 1989 को जब गालार्दो जब गिरफ्तार हो गया तो पूरे गैंग पर अल चापो गुजमैन का कब्जा हो गया. इसके बाद ही उसने अपने कार्टेल के तौरतरीके बदलने शुरू किये.  सिनलोआ गैंग बहुराष्ट्रीय कंपनी में बदल गया, जो कोलंबिया से बड़े बड़े जहाजों में आने वाली कोकीन की खेप को अमेरिका और अन्य देशों को भेजता था. बंदरगाहों पर वो जैसा चाहता था, वैसा ही होता था. वो साथ ही हेरोइन, मारिजुआना और दूसरे ड्रग्स की सप्लाई भी करता था. उसने और उसके कार्टेल ने इससे बहुत पैसे कमाए. अकूत पैसे और ताकत ने उन्हें कई अन्य देशों की अर्थव्यवस्था में घुसने का रास्ता भी दिखाया.

अल चापो पर दुनियाभर में कई फिल्में बन चुकी हैं


ड्रग्स से कमाए धन को तरीके से निवेश किया 
संगठन पर मजबूत पकड़ और शातिर कारोबारी दिमाग उसकी सफलता की कुंजी बन गया. उसने ये भी सीखा कि ड्रग्स में कमाए गए बेशुमार पैसे को कहां लगाया जाए. उसने कभी अपहरण, फिरौती और दूसरे क्राइम की ओर रुख नहीं किया. पूरा ध्यान ड्रग्स पर ही रखा. मैक्सिको में एक जेटास ड्रग कार्टेल भी काम करता है, जो कहीं ज्यादा हिंसक और मैक्सिको के रिटायर्ड सैनिकों द्वारा चलाया जाता है लेकिन अल चापो ने उसे भी अपने तरीके से साफ किया.

अल चापो पर कई किताबें भी लिखी जा चुकी हैं. उसे लेकर लातीनी अमेरिकी देशों, अमेरिका और मैक्सिको में तमाम कहानियां प्रचलित हैं


कई किताबें लिखी गईं और फिल्में भी बन चुकी हैं 
अल चापो पर कई किताबें लिखी जा चुकी हैं. अनाबेल हर्नांडेज नाम की एक महिला पत्रकार ने जब उस पर किताब लिखी, तो वो रिसर्च के सिलसिले में कई लोगों से मिलीं, तब उन्होंने पाया कि अल चापो के बारे में इतने तरह की कहानियां हर जगह पर फैली हुई है कि उसमें बहुत कम सच्चाई है. दरअसल इस शख्स को ढेरों मिथ गढ़े जा चुके हैं. मैक्सिको के तमाम शहरों में इस शख्स को लेकर तमाम कहानियां कही जाती हैं. ये उसकी पर्सनालिटी, क्रूरता, शानोशौकत, सुरक्षा और दौलत से जुड़ी हुई हैं.

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First published: July 18, 2019, 8:53 PM IST
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