लाइव टीवी

पीएम मोदी-शी जिनपिंग मुलाकात: इस पत्थर को न भूकंप हिला पाया- न सुनामी, जानें कृष्णा बटर बॉल का रहस्य

News18Hindi
Updated: October 12, 2019, 12:35 PM IST
पीएम मोदी-शी जिनपिंग मुलाकात: इस पत्थर को न भूकंप हिला पाया- न सुनामी, जानें कृष्णा बटर बॉल का रहस्य
कृष्णा बटर बॉल के सामने शी जिनपिंग और मोदी

जिस पत्थर के सामने खड़े होकर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) और पीएम मोदी (PM Modi) ने तस्वीर खिंचवाई उसे इलाके के लोग कृष्णा बटर बॉल (Krishna Butter Ball) कहते हैं. इस पत्थर की दिलचस्प कहानी है...

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 12, 2019, 12:35 PM IST
  • Share this:
तमिलानाडु (Tamilnadu) के शहर महाबलीपुरम (Mahabalipuram) में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) और प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) की मुलाकात हुई. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को महाबलीपुरम के कई दर्शनीय स्थलों में लेकर गए. पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति को महाबलीपुरम की दक्षिण भारतीय संस्कृति और इसकी समृद्ध विरासत के बारे में बताया. दोनों नेताओं के मुलाकात की एक तस्वीर काफी वायरल हो रही है.

इस तस्वीर में पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक बड़े से पत्थर के आगे दिखाई दे रहे हैं. विशालकाय पत्थर के आगे दोनों नेता अपने हाथ ऊपर कर खड़े हैं. ये विशालकाय पत्थर बहुत ही छोटे से एरिया पर टिका है और खतरनाक रूप से आगे की तरफ झुका है. ऐसा लगता है कि ये पत्थर थोड़ी सी हलचल से कभी भी आगे की तरफ लुढ़क सकता है. लेकिन कहा जाता है कि पिछले 1300 साल से ये पत्थर यहां ऐसे ही पड़ा है.

कैसे टिका है इतना विशालकाय पत्थर?
इस विशालकाय पत्थर का यूं छोटे से स्थान पर टिके रहना अचंभित करने वाला है. इसी अचंभे को चीनी राष्ट्रपति को दिखाने प्रधानमंत्री मोदी उन्हें वहां लेकर गए थे. इसके आगे दोनों ने फोटो भी खिंचवाई और अब ये फोटो वायरल है. सोशल मीडिया पर इस फोटो को खूब शेयर किया जा रहा है. महाबलीपुरम का ये अचंभित कर देने वाला विशालकाय पत्थर लोगों के बीच चर्चा में बना हुआ है. इस पत्थर की कहानी दिलचस्प है.

story of mahabalipuram krishna butter ball infront of which pm modi and xi jinping taken photo
कृष्णा बटर बॉल


महाबलीपुरम के एक पहाड़ी इलाके के उपरी भाग में टिके इस पत्थर को यहां के लोग कृष्णा बटर बॉल के नाम से जानते हैं. दिखने से ऐसा लगता है कि थोड़े से कंपन से ये विशालकाय पत्थर कभी भी पहाड़ से फिसल सकता है. लेकिन ये पत्थर पिछले 1300 साल से यहां ऐसे ही पड़ा है. कई बार इसके खतरनाक स्तर पर आगे की तरफ से झुके होने की वजह से इसे यहां से हटाने की कोशिश की गई लेकिन किसी को इसमें कामयाबी नहीं मिली.

पत्थर को न भूकंप हिला पाया, न सुनामी
Loading...

पिछले 1300 साल में इस इलाके में कई बार भूकंप आए, कई बार सुनामी आई, कई बार चक्रवात और दूसरी आपदाएं आईं लेकिन ये पत्थर टस से मस नहीं हुआ. पिछले 1300 साल में यहां की धरती कई बार हिली लेकिन वो इस पत्थर को यहां से नहीं हिला पाई.

कृष्णा बटर बॉल का वजन 250 टन है. लोगों के लिए ये हैरानी का सबब है कि इतना वजनी पत्थर इतने छोटे से कोने पर टिका कैसे है. इसी को देखने यहां दूर-दूर से लोग आते हैं. महाबलीपुरम के ये मुख्य दर्शनीय स्थलों मे से एक है. लोग यहां इसी तरह से फोटो खिंचवाते हैं जिस तरह से पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खिंचवाई है.

250 टन वजनी पत्थर प्राकृतिक रूप से यहां ऐसे ही पड़ा है. यहां के लोग इसे कृष्णा बटर बॉल या वानिराई काल कहते हैं. वानिराई काल का मतलब होता है- आकाश के भगवान का पत्थर. इसे स्टोन ऑफ गॉड भी कहते हैं. कृष्णा बटर बॉल 20 फीट ऊंचा और 5 मीटर चौड़ा है. ये पत्थर 45 डिग्री के कोण पर झुका है. पत्थर के इतने खतरनाक स्तर पर झुके होने के बावजूद इसके नहीं गिरने को स्थानीय लोग दैवीय कृपा मानते हैं.

क्यों रखा गया कृष्णा बटर बॉल नाम?
इस पत्थर के पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है. स्थानीय हिंदू लोग मानते हैं कि ये भगवान कृष्ण के चुराए गए माखन का पहाड़ है. भगवान कृष्ण अपनी मां के मटके से माखन चुरा लेते थे. स्थानीय हिंदू कहते हैं कि ये उसी माखन का ढेर है, जो सूख चुका है. कुछ लोग इसे स्वर्ग से गिरा पत्थर मानते हैं. स्थानीय लोग मानते हैं कि स्वर्ग का पत्थर होने की वजह से ही ये इस खतरनाक तरीके टिके होने के बावजूद नहीं लुढ़क रहा है.

story of mahabalipuram krishna butter ball infront of which pm modi and xi jinping taken photo
कृष्णा बटर बॉल


इसे यहां से कई बार हटाने की कोशिश की जा चुकी है. कहा जाता है कि जिस वक्त महाबलीपुरम में पल्लव वंश के शासकों का राज था, उस वक्त भी पत्थर को यहां से हटाने की कोशिश की गई थी. महाबलीपुरम को बसाने वाले पल्लव वंश के नरसिंह देव बर्मन ने इस पत्थर को यहां से हटवाने की कोशिश की लेकिन वो नाकाम रहे. इसके बाद अंग्रेजी शासन में भी इस पत्थर को यहां से हटाने की कोशिश की गई.

7 हाथी मिलकर भी पत्थर को हटा नहीं पाए
1908 में मद्रास के गवर्नर आर्थर लावले ने इस पत्थर को यहां से हटवाने की कोशिश की. अंग्रेज सरकार को लगता था कि हल्की सी हलचल से भी ये पत्थर लुढ़कर सामने के गांव पर गिर सकता है. ऐसी स्थिति में जानमाल का नुकसान होता. इससे बचने के लिए अंग्रेज सरकार ने इसे यहां से हटाने का प्रयास किया.

कहा जाता है कि इस पत्थर को हटाने के लिए सात हाथी लगाए गए लेकिन वो पत्थर को टस से मस नहीं कर पाए. उसके बाद ये से पत्थर इलाके में मशहूर हो गया. इसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आने लगे.
अभी तक ये पता नहीं चल पाया है कि इतने छोटे से एरिया में इतना विशालकाय पत्थर कैसे टिका है.

पत्थर सिर्फ 4 फीट के बेस एरिया पर टिका है. विज्ञान इस बात का पता लगाने में नाकाम रहा है कि आखिर इसपर ग्रैविटी फोर्स क्यों नहीं काम कर रही है. ग्रैविटी की वजह से इस पत्थर को लुढ़कर कर आगे निकल जाना चाहिए था. लेकिन सदियों से ऐसा नहीं हुआ है.

ये भी पढ़ें: सिर्फ 12 हजार रुपए के चलते गई थी लोहिया की जान
जानें कितना खास है ITC Grand Chola होटल, जिसमें ठहरे हैं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग
शी जिनपिंग-मोदी मुलाकात: मामल्लपुरम या महाबलीपुरम, कौन सा नाम सही है?
महाबलीपुरम से चीन का ये है कनेक्शन, इसलिए PM मोदी ने जिनपिंग से मिलने के लिए चुना ये शहर

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 12, 2019, 12:12 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...