कश्मीर की सियासत में रसूखदार मुफ्ती खानदान की पूरी कहानी

मुफ्ती मोहम्मद सईद को तीस साल पहले राज्यसभा में डिस्क्वालिफाई किया गया था. उसके बाद मुफ्ती परिवार पिछले 20 सालों में जम्मू कश्मीर के प्रमुख सियासी परिवार के रूप में उभरा. जानें इस परिवार के जो चेहरे खबरों में नहीं रहे, वो कौन हैं और क्या करते हैं.

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जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के राजनीतिक परिवार की कहानी न केवल खासी दिलचस्प है. ये भी जानना रोचक है कि इस परिवार का कौन सा शख्स क्या कर चुका है और क्या कर रहा है, कैसे ये परिवार राज्य का प्रमुख राजनीतिक परिवार बन गया. 28 जुलाई 1989 को राज्यसभा में पहली बार हुआ था, कि किसी सांसद को दलबदल विरोधी कानून के तहत डिस्क्वालिफाई किया गया था. डिस्क्वालिफाई किए गए मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कैसे जम्मू कश्मीर के मुख्य सियासी दल पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की स्थापना की.

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पीडीपी केवल 19 साल पुरानी पार्टी है और अब ये कश्मीर में एक बड़ी ताकत बन चुकी है. 1999 में कांग्रेस से अलग होने के बाद मुफ्ती मोहम्मद सईद ने इस पार्टी की नींव रखी थी. अब उनकी बेटी इस पार्टी की प्रमुख हैं. कश्मीर में दो ही बड़े राजनीतिक परिवार हैं-अब्दुल्ला परिवार और मुफ्ती परिवार. जहां अब्दुल्ला परिवार पिछले करीब 80 सालों से घाटी की प्रमुख फैमिली बना हुआ है. उसके सामने मुफ्ती परिवार का उभरना कमोबेश नया और अहम ही है.



मुफ्ती मोहम्मद का उभरना
मुफ्ती ऐसे परिवार से नहीं थे, जो बहुत अमीर या शोहरतमंद रहा हो. अनंतनाग के बिज्बेहारा में उनके पिता धार्मिक उपदेशक थे और परिवार बहुत गरीब था. दान-दक्षिणा से गुजारा चलता था. ऐसे में सईद का आगे बढ़ना बहुत मायने रखता है. वो श्रीनगर पढ़ने गया. डिग्री हासिल करने के बाद वो आगे पढ़ना चाहते थे लेकिन आर्थिक दिक्कतें थीं. मदद हासिल करने के लिहाज से वो जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन प्रधानमंत्री मुफ्ती गुलाम मोहम्मद के पास पहुंचे. बस मुलाकात ने उनके जीवन को बदल दिया. अचानक वो राजनीति में कूदने के बारे में सोचने लगे.

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पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद के साथ महबूबा


हालांकि इससे पहले उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में एमए की. सियासी पारी में उनकी शुरुआत उस पार्टी से हुई जो अब करीब करीब जम्मू-कश्मीर से खत्म हो चुकी है. इसका नाम है डेमोक्रेटिक नेशनल कांफ्रेंस. इसके बाद उन्होंने कई पार्टियां बदलीं. हालांकि सबसे ज्यादा सुर्खियां उन्हें तब हासिल हुईं जबकि वो 1989 में विश्वनाथ सिंह सरकार में केंद्रीय गृह मंत्री बने. इसके पांचवें दिन ही डॉक्टरी की पढाई कर रही उनकी बेटी रुबैया सईद का जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट ने अपहरण कर लिया. इसके बदले केंद्र सरकार ने पांच आतंकवादियों को रिहा किया.
मुफ्ती के सियासी करियर का वो बड़ा मोड़ था जब उन्होंने अपनी खुद की पार्टी बनाई. इसके बाद उनका ग्राफ ऊपर चढने लगा. और देखते ही देखते उनका परिवार घाटी का जाना माना राजनीतिक परिवार बन गया.

मुफ्ती मोहम्मद सईद (फाइल फोटो)


व्हिस्की मुफ्ती के नाम से भी जाने जाते थे
जम्मू कश्मीर की पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद को उनके समर्थक व्हिस्की मुफ्ती के नाम से भी जानते थे. इसके पीछे दिलचस्प किस्सा है. वो हर शाम व्हिस्की का सेवन जरूर करते थे. ये बात किसी से छिपी भी नहीं थी. लिहाजा उनके समर्थक उन्हें व्हिस्की मुफ्ती भी कहने लगे. गुप्तचर एजेंसी रॉ के पूर्व निदेशक एएस दुलत ने एक इंटरव्यू में कहा, एक जमाना था जब वो व्हिस्की खूब पसंद करते थे. हालांकि बाद में उन्होंने इसे छोड़ दिया.

फारुक अब्दुल्ला से क्या समानता है
मुफ्ती और फारुक में जम्मू-कश्मीर में कट्टर प्रतिद्वंद्वी रहे. दोनों में एक बात को छोड़कर शायद ही कोई समानता रही हो. ये समानता ये थी कि दोनों को गोल्फ खेलने का शौक था. दोनों अपना काफी समय गोल्फ में गुजारते थे.

महबूबा मुफ्ती (फाइल फोटो)


तीन बहनों में केवल मेहबूबा राजनीति में आईं
मुफ्ती मोहम्मद के दो भाई और एक बहन है. लेकिन इनमें से कोई राजनीति में नहीं आया. उनके बड़े भाई धार्मिक उपदेशक बने तो छोटे वन विभाग में अफसर. बहन श्रीनगर में हाउसवाइफ हैं. मुफ्ती के तीन बेटियां और एक बेटा था लेकिन मेहबूबा को छोड़कर किसी की राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं रही. बेटे तस्दीक सईद ने उनसे साफ कह दिया कि उसे राजनीति पसंद नहीं. वो हॉलीवुड जाकर सिनेमेटोग्राफर बन गया. बाद में बॉलीवुड में कई बढिया फिल्में कीं.हालांकि पिता के निधन के बाद तस्दीक ने जरूर राजनीति में कदम रखा लेकिन बहुत सीमित दायरे में.

मुफ्ती मोहम्मद के बेटे तस्दीक एक जमाने में राजनीति में नहीं आना चाहते थे लेकिन अब उन्होंने भी सियासत में कदम रख लिया है


बेटे ने फिल्मों में नाम कमाया
तस्दीक को बॉलीवुड में लोग सबसे टैलेंटेड वाले तकनीक जानकारी वाला सिनेमेटोग्राफर मानते हैं. हालांकि जब उनकी बहन मेहबूबा जम्मू कश्मीर में मुख्यमंत्री बनीं तो उन्हें पहले पीडीपी की ओर से एमएलसी बनाया गया. फिर मंत्री भी बनाया गया. लेकिन तस्दीक ना तो पार्टी के कार्यकर्ताओं से ज्यादा मेलजोल रखते हैं और ना ही खांटी सियासतदां है. उनका परिवार बेंगलूर में रहता है. दो बेटे हैं. पत्नी राधिका कपूर लेखिका हैं.

1989 में रुबैया सईद तब पूरे देश में चर्चित हुईं थीं, जब उनका अपहरण हो गया था


दो बेटियां लोप्रोफाइल जिंदगी गुजारती हैं
मेहबूबा की दो बहनें हैं. रुबैया सईद का नाम तो हर कोई उनके अपहरण के चलते जानता है. रुबैया अपहरण के समय डॉक्टरी की पढाई पूरी करके श्रीनगर के एक अस्पताल में इंटर्न का काम कर रही थीं. निकाह के बाद अब वो पति शरीफ अहमद के साथ चेन्नई में रहती हैं. चेन्नई के पॉश इलाके में वो सुरक्षा के बीच एक अपार्टमेंट में रहती हैं. उनके पति का वहां आटोमोबाइल शोरूम है. रुबैया के दो बेटे हैं.
दूसरी बहन महमूदा अमेरिका में रहती हैं. जब वर्ष 2016 में मुफ्ती मोहम्मद की तबीयत गंभीर तौर पर खराब हुई तो वो लगातार अमेरिका से भारत आती रहीं. वो अब वहीं बस गई हैं.

महबूबा की उथल-पुथल वाली मैरिड लाइफ
मेहबूबा ने रिश्ते में पिता के कजिन जावेद इकबाल से शादी की थी. लेकिन ये शादी ज्यादा चल नहीं पाई. कुछ साल बाद दोनों तल्खियत के बीच अलग हो गए. उनका तलाक हो गया. जावेद ने नेशनल कांफ्रेंस की ओर चुनाव भी लड़ा लेकिन अब उन्होंने राजनीति से किनारा कर लिया है. वो राज्य में एनिमल एक्टिविस्ट के तौर पर जाने जाते हैं.

महबूबा की दोनों बेटियों का सियासत से कोई लेना देना नहीं है लेकिन दोनों अपनी मां की जबरदस्त प्रशंसक हैं


बेटियां क्या करती हैं 
मेहबूबा की दो बेटियां हैं. बड़ी बेटी इर्तिका इकबाल लंदन में भारतीय उच्चायोग में काम करती है तो छोटी बेटी इतिजा अपना मामा की मदद से फिल्मोउद्योग से जु़ड़ी हुई है. हालांकि ये भी कहा जाता है कि मुफ्ती परिवार ने अपने कई रिश्तेदारों को पिछले कुछ सालों में पार्टी से जोड़ा है.

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