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मैं प्याज हूं, कम मत समझिए मेरी सियासी हैसियत!

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: September 24, 2019, 7:05 PM IST
मैं प्याज हूं, कम मत समझिए मेरी सियासी हैसियत!
केंद्र सरकार ने प्याज के निर्यात पर रोक लगाया

अगर आपने प्याज की कहानी नहीं जानी तो क्या जाना. करीब 5000 साल पहले मैं भारत पहुंची, तब से यहीं की होकर रह गई. मेरे कई रंग हैं और कई वैराइटी. इस बात को लेकर कई बार भ्रम की स्थिति भी बनी है कि भारत में प्याज कहां से आई

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  • Last Updated: September 24, 2019, 7:05 PM IST
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मैं प्याज हूं. एक बार फिर मैं चर्चाओं में हूं. वैसे हर साल इस महीने में मैं चर्चाओं में ही आ ही जाता हूं. उस समय मेरी सियासी अहमियत भी इतनी बढ़ जाती है कि हर सियासतदां मुझको लेकर फिक्रमंद हो जाता है. सरकारी मशीनरी में मुझको लेकर हलचल शुरू हो जाती है. अगर मेरी कीमतों में उछाल आ गया हो और चुनाव का समय करीब हो तो मैं फिर एक हस्ती बन जाता हूं. लोग कहते हैं कि फिर मैं सरकारों का भविष्य भी तय करने लगता हूं.

वैसे असल में मेरी अहमियत ही इसलिए है, क्योंकि मैं हर उस शख्स के खानपान का हिस्सा हूं, ऊंची हैसियत वाले से गरीब तक. गांवों में तो अब भी लोग रोटी और प्याज खाकर तृप्त हो जाते हैं. रोटी-दाल-चावल की तरह लोग मेरे बगैर भी जिंदा नहीं रह सकते.

मैं जब भारत आया तो यहीं ऐसा रचा-बसा कि यहां के जीवन में शामिल हो गया, ऐसा दुनिया में कहीं नहीं हो पाया. ये तब है जबकि प्राचीन भारत में ऋषि मुनियों में हमेशा मुझको शक की नजर से देखा. ये कहा जाता था कि कई बार मुझको ब्रह्मचर्य के मिथकों से भी जोड़ा गया. ये माना गया कि अगर पूजा-पाठ करने वाला प्याज को खा ले तो उसका संयम और चेतना डोलने लगती है, उसके योग में खलल पड़ने लगता है.

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हजारों साल पहले मैं आ गया था यहां 
खैर मैं अपनी कहानी शुरू करता हूं. मुझको लेकर वैज्ञानिकों का मानना है कि करीब 5500 साल पहले मध्य एशिया के घरों में मेरा इस्तेमाल शुरू हुआ. लेकिन कुछ अन्य वैज्ञानिक मानते हैं कि मेरा मूल संबंध मध्य पूर्व के बेबीलोन संस्कृति से था यानि मेरी पैदाइश ईरान और पश्चिमी पाकिस्तान के आसपास की है. हालांकि पुराने ग्रंथ और किताबें ये बताती हैं कि मिस्र में 5500 साल पहले मेरी खेती होने लगी थी. भारत और चीन में 5000 साल पहले मेरी खेती की कला आ चुकी थी.

माना जाता है कि भारत में प्याज 5500 साल पहले मिस्र और ईरान से आया


शवों के संरक्षण में भी होता था उपयोग 
ये कहना तो बिल्कुल ही गलत है कि पुर्तगाली व्यापारी मुझको यहां तक मिर्ची, टमाटर और आलू के साथ लेकर आए थे. हालांकि आय़ुर्वेद के ग्रंथ मुझको हमेशा राजसिक और तामसिक मानते आए हैं लेकिन आयुर्वेद के ग्रंथ भावप्रकाश निघंटु में पलांडु नाम से प्याज़ का वर्णन हुआ है. पश्चिमी विद्वान मानते हैं कि मैं ईसा मसीह से पुराना हूं और ईसा के जन्म से तीन हज़ार साल पहले इसके सूराग पिरामिडों में मिले हैं. मेरा  उपयोग केवल खाने में नहीं राजसी शवों के संरक्षण में भी होता था.

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वो लोग जो प्याज को हाथ भी नहीं लगाते
वैसे हिंदू धर्म और जैन धर्म में प्याज और लहसुन के निषेध की बात बहुत कही जाती रही है. कृष्ण भक्त प्याज को हाथ नहीं लगाते. वैष्णवी भी दूर रहते हैं. ब्राह्मणों से भी कहा गया कि सात्विक भोजन ग्रहण करें यानि बगैर मुझको इस्तेमाल किए बना भोजन. ये भी हिदायत दी जाती रही है कि प्याज और लहसुन से दूर रहो.

मैं ये भी कहूंगा कि मेरे अंदर कुछ ऐसे खास गुण भी हैं, जिसके चलते मैं कई आयुर्वेद की औषधियों में इस्तेमाल होता रहा हूं. हां ये जरूर है कि जब पहली बार मुझको खानपान के तौर पर प्रयोग किया गया, तो मैं ऐसा हिट हुआ कि मेरे बगैर कोई जायका बनता ही नहीं.

मुगल सल्तनत ने प्याज का इस्तेमाल करके खाने का जायका और बढा दिया. शाही रसोई में प्याज को लेकर खासे प्रयोग हुए


मुगल सल्तनत ने मुझे और लजीज बनाया 
हालांकि इतिहासकार और खानपान विशेषज्ञ कहते हैं भारत में हिंदुस्तानियों की जुबान पर प्याज की लिज्जत का काम सल्तनत काल ने किया, जिनके दस्तरख्वान में मुझको लेकर तमाम प्रयोग होते रहे. शुरू में प्याज को जो लोग उपयोग करते थे, वो खास लोग होते थे यानि शासक वर्ग, अमीर व्यापारी और अफसरान लेकिन धीरे धीरे जब इसकी पैदावार बढ़ी तो ये नीचे तक आ पहुंचा. अब इसके बगैर गुजर नहीं होती. प्याज हमेशा से हिन्दुस्तान खाने का अनिवार्य हिस्सा रहा है.

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क्या है मुल्ला दो प्याजा का मामला 
मुल्ला दो प्याज़ा के बारे में कहा जाता है कि वो हर खाने में दो प्याज़ खाते थे. दो प्याज़ा नामक व्यंजन उन्हीं की फ़रमाइश के बाद हकीकत का जामा पहन पाया. मुल्ला दो प्याजा अकबर के नवरत्नों में शामिल थे, उन्हें तिकड़मी उस्ताद माना जाता था.

लोग अक्सर हैरान होते हैं कि दो प्याजा का मतलब क्या होता है. वो मांसाहारी व्यंजन, जिसमें मांस से दोगुना प्याज़ डाला जाता है या दो तरह का (हरा और लाल) प्याज़ इस्तेमाल होता है या पकाने के दौरान दो बार प्याज डाला जाता है.

ये पनीर कोरमा है, जो बगैर प्याज के बना है. वैसे बहुत से ऐसे व्यंजन हैं, जो बगैर प्याज के भी खासे लजीज बनाए जाते हैं


बगैर प्याज भी बनते हैं शानदार व्यंजन
वैसे आपको ये बता दूं कि मेरे बगैर भी खाना बनता है, सब्जियां बनती हैं. इस्कॉन वालों ने एक पूरी रेसिपी बुक ही लिख दी है कि किस तरह प्याज के बगैर भी लजीज खाना बनता है. इस्कॉन के मुंबई के जुहू इलाके स्थित मुख्यालय में हर रविवार एक खास बफै होता है, जिसमें सौ से ऊपर व्यंजन होते हैं और किसी में प्याज या लहसुन का इस्तेमाल नहीं होता लेकिन स्वाद लाजवाब होता है.
चूंकि पश्चिमी पाकिस्तान में प्याज खूब होता था. इसीलिए यहां के खाने में जमकर मेरा इस्तेमाल होता है, लिहाजा विभाजन के बाद जब पंजाबी यहां आए और ढाबा कल्चर देश में बढ़ा तो प्याज़ का बेहिसाब चलन भी. हालांकि मुझको कहना चाहिए कि प्याज का जितना चलन उत्तर और मध्य भारत में है उतना दक्षिण भारत में नहीं.

मुझसे बनती है आइसक्रीम और स्वीट डिश भी 
खैर मेरे चटखारे को ढंग से महसूस करना हो तो पुदीने, हरी धनिया और लहसुन के साथ मेरी चटनी तो बनाकर देखिए. चटकियां तमाम तरह की होती हैं लेकिन उनका स्वाद तभी रंग लेता है, अगर उसमें मेरी उपस्थिति आ जाए. वैसे आप हैरान होंगे कि कई देशों में मेरे स्वीट मफीन, मीठी डिशेज और आइसक्रीम भी तैयार होती हैं.

कुछ देशों में प्याज की उम्दा आइसक्रीम भी बनाई जाती है


कई वैरायटी और कई रंग
वैसे शायद आप लाल प्याज से ही वाकिफ होंगे लेकिन मेरी कई वैरायटी है. मुख्य तौर पर 21 के आसपास. मैं लाल रंग में हूं तो पीले, सफेद और हरे रंग में भी. दुनिया में प्याज का सबसे बड़ा उत्पादक चीन है. उसके बाद भारत. इसके बाद अमेरिका, पाकिस्तान, मिस्र, ईरान, तुर्की और रूस का नंबर आता है.

भारत में प्याज का सबसे ज्यादा उत्पादन महाराष्ट्र में होता है


कई बार गद्दी पर आती है मेरे कारण आंच
जब शरद पवार खाद्य मंत्री थे तब प्याज़ की क़ीमतें चढ़ने का ठीकरा उनके सर फोड़ा गया. उन पर आरोप लगा कि वो महाराष्ट्र में अपने लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए निर्यात को बढावा देकर प्याज़ मंहगी करवा देते थे. दिल्ली में अक्सर प्याज के दाम बढने पर मुख्यमंत्रियों को अपनी गद्दी सरकती हुई लगती रही है. आपको ये भी बताता चलूं कि सबसे ज्यादा मेरी पैदावार महाराष्ट्र में ही होती है. इसके बाद भारतीय राज्यों में कर्नाटक, गुजरात, बिहार, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और राजस्थान का नंबर आता है.

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First published: September 24, 2019, 5:32 PM IST
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