हैरानी भरा दावा: 40 डिग्री अक्षांश वाले देशों में कोरोना का कहर ज्यादा

क्यों 40 डिग्री लेटिट्यूड वाले देशों में कोरोना का कहर ज्यादा
क्यों 40 डिग्री लेटिट्यूड वाले देशों में कोरोना का कहर ज्यादा

कांग्रेस के नेता और जाने माने वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने एक हैरानी भरा ट्वीट किया है कि कोरोना का कहर 40 डिग्री लेटिट्यूड पर देशों पर ज्यादा है. ये संयोग है या इसकी कोई वजह

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 12, 2020, 1:31 PM IST
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कांग्रेस के नेता और जाने-माने वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने एक ट्वीट किया है. जिसमें उन्होंने दावा किया कि कोरोना जिन देशों में ज्यादा कोहराम मचा रहा है, उनमें एक बड़ी समानता है. वो सभी 40 डिग्री लेटीट्यूड पर हैं. क्या वाकई ये सही है और अगर है तो ऐसा क्यों है.

हमने यही जानने की कोशिश की कि दुनिया में 40 डिग्री अक्षांश पर कौन से देश स्थित हैं और वहां कोरोना का क्या हाल है. 40 डिग्री का मतलब ये है कि आमतौर पर वो देश जो दुनिया के नक्शे पर मध्य रेखा से कुछ नीचे हैं.

पृथ्वी के तल पर स्थित किसी स्थान की भौगोलिक स्थिति बताने के लिए उस स्थान के अक्षांश (latitude) और deshantar (Longitude) का उपयोग किया जाता है. पृथ्वी पर किसी भी देश या जगह की स्थिति का निर्धारण उस स्थान के अक्षांश और देशांतर से ही होता है. दो अक्षांशों के बीच की दूरी 111 किमी होती है.




क्या वाकई ऐसा है
अब देखते हैं कि जिन देशों में कोरोना का सबसे ज्यादा कहर है, वो क्या 40 डिग्री अक्षांश पर हैं या नहीं. वैसे तो 40 डिग्री लेटीट्यूड पर दुनियाभर के 40 से ज्यादा देश हैं. लेकिन ये सही है कि कोरोना की सबसे ज्यादा मार इसी अक्षांश कु कुछ देशों पर पड़ी है. कुछ देश ऐसे भी हैं, जो 40 डिग्री लेटीट्यूट पर तो नहीं हैं लेकिन इसके आसपास जरूर हैं.

चीन, जापान, अमेरिका, इटली और स्पेन जैसे देश दुनिया के नक्शे पर 40 डिग्री लेटिट्यूड पर ही आते हैं


40 डिग्री अक्षांश वाले देश ये हैं 
हैरानी की बात है चीन, स्पेन, इटली, दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका जैसे देशों पर कोरोना का सबसे ज्यादा असर हुआ है. यहां कोरोना के रोगी भी सबसे ज्यादा हैं. ये वो देश भी हैं जहां कोरोना से सबसे ज्यादा लोग मरे हैं. ये सारे देश 40 डिग्री लेटिट्यूड पर ही आते हैं.  ईरान और दक्षिण कोरिया 40 डिग्री लेटिट्यूड पर नहीं हैं लेकिन दोनों का लेटिट्यूड 35 और 36 है.

क्यों है इन देशों पर कोरोना का असर 
ऐसे में ये कहा जा सकता है कि वाकई 40 डिग्री लेटिट्यूड वाले इलाकों पर कोरोना का कहर ज्यादा है. ऐसा क्यों है, इसका विश्लेषण तो अब तक नहीं हुआ है लेकिन इस अक्षांश पर आने वाले देश शीत उष्ण कटिबंध वाले इलाके माने जाते हैं.

40 डिग्री लेटिट्यूड पर दुनियाभर में 40 से ज्यादा देश आते हैं. इनका तापमान ना तो बहुत ज्यादा ठंडा होता है और ना ही बहुत ज्यादा गरम


भारत की स्थिति क्या है
जहां तक भारत का सवाल है तो ये देश बहुत बड़ा है. ये अलग अलग इलाके अलग लेटिट्यूड में आते हैं. इसका कश्मीर की ओर का उत्तरी हिस्सा जरूर 40 डिग्री लेटिट्यूड से गुजरता है. कोरोनावायरस मीटर संबंधी एक वेबसाइट https://www.worldometers.info/ कोरोना की गतिविधियों को रियल टाइम में अपडेट कर रही है.

क्या कहते हैं आंकड़े
https://www.worldometers.info/ के अनुसार दुनिया के 124 देश कोरोना से प्रभावित हैं. इसमें यूरोपीय देशों में भी कोरोना के मरीजों की संख्या सैकड़ों में है. दोपहर 1.00 बजे तक ये दुनिया में 126,386 लोगों को संक्रमित कर चुका था जबकि 4,635 लोग इससे मारे जा चुके हैं. जबकि 68,313 हजार लोगों को इससे ठीक भी किया जा चुका है.

क्या होते हैं शीत उष्ण कटिबंध वाले इलाके 
40डिग्री अक्षांश वाले इलाके आमतौर पर शीत उष्ण कटिबंध माने जाते हैं. शीतोष्ण कटिबन्ध या समशीतोष्ण कटिबन्ध (temperate zone) ऊष्णकटिबन्ध और शीत कटिबन्ध के बीच का क्षेत्र कहलाता है. इस क्षेत्र की विशेषता यह है कि यहाँ गर्मी और सर्दी के मौसम के तापमान में अधिक अन्तर नहीं होता. लेकिन यहाँ के कुछ क्षेत्रों में, जैसे मध्य एशिया और मध्य उत्तरी अमेरिका, जो समुद्र से काफ़ी दूर हैं, तापमान में काफ़ी परिवर्तन होता है और इन इलाकों में महाद्वीपीय जलवायु पाया जाता है.

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