डार्क मैटर के प्रयोग में वैज्ञानिकों को मिले अजीब संकेत, बदल सकती है भौतिकी

डार्क मैटर के प्रयोग में वैज्ञानिकों को मिले अजीब संकेत, बदल सकती है भौतिकी
अंतरिक्ष में डार्कमैटर की मौजूदगी पर यह प्रयोग खास तरह से धरती पर किया गया था. (सांकेतिक तस्वीर)

डार्क मैटर (Dark Matter) के प्रयोग में वैज्ञानिकों को अजीब संकेत (Singnals) मिले हैं. अनुमान है कि अगर यह नए कणों की वजह से हुआ तो भौतिकी (Physics) में बड़े बदलाव आ सकते हैं.

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नई दिल्ली: आमतौर पर भी वैज्ञानिकों को प्रयोगों में हैरान करने वाले नतीजे नहीं मिलते है. यह कहा जा सकता है कि ऐसा ज्यादातर नहीं तो बहुत कम भी नहीं होता है. हाल ही में इस तरह का एक प्रयोग देखने को मिला जब दुनिया का सबसे संवेदनशील डार्क मैटर प्रयोग (Dark Matter Experiment) किया जा रहा था. जिनोन 1टी (XENON 1T) नाम के इस प्रयोग के आंकड़ों ने वैज्ञानिकों को चौंकाने वाली गतिविधियां दिखाई.

उम्मीद से कुछ अलग दिखे तो ये कहते हैं उसे वैज्ञानिक
फिलहाल शोधकर्ताओं ने यह दावा नहीं किया है कि उन्होंने डार्क मैटर का पता लगा लिया है. लेकिन उन्हें कुछ ऐसे संकेत मिले हैं जो समझाए नहीं जा सकते हैं. उनके पीछे कई कारण हो सकते हैं. जब किसी प्रकार के अवलोकन में उम्मीद से ज्यादा कोई घटना दिखाई दे जाए तो वैज्ञानिक इसे एक्सेस (Excess) का नाम देते हैं. ऐसी एक्सेसेस का सांख्यकीय नजरिए से अध्ययन होता है और यह पता लगाया जाता है कि नई भौतिकी में इस तरह के नतीजे आने कि कितनी निश्चित संभावना थी और यह भी कि कहीं यह किसी चूक की वजह से तो नहीं हुआ.

कारण स्पष्ट नहीं हो सका अभी
जिनोन 1टी (XENON 1T) प्रयोग में शामिल वैज्ञानिकों को ऐसे नतीजे देखने को मिले जिनकी उन्हें उम्मीद नहीं थी. इस घटना का स्रोत उन्हें अभी तक समझ में नहीं आया है. फिर भी इस मामले में उनका कहना है कि संभव है कि यह किसी नए कण की उपस्थिति का संकेत हो जिसे सोलर एक्सियोन (Solar Axion) कहते हैं.



कारणों की तीन संभावनाओं की चर्चा
वैज्ञानिकों की ओर जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि इस एक्सेस के बारे में लगता है कि यह शायद कुछ मात्रा में ट्रीटियम हो जोकि एक प्रोटोन और दो न्यूट्रॉन वाला होइड्रोजन होता है, लेकिन यह उससे भी ज्यादा रोचक हो सकता है जैसे नए कण सोलर एक्सियोन के अस्तित्व का संकेत.

Universe
माना जाता है कि ब्रह्माण्ड में मौजूद पदार्थ का 85 प्रतिशत डार्क मैटर है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


कहां हुआ था यह प्रयोग
इस जिनोन 1टी (XENON 1T) प्रयोग में करीब 150 वैज्ञानिक शामिल थे जो डार्क मैटर पर एक शोध प्रोजेक्ट रर काम कर रहे हैं. यह प्रयोग इटली की INFIN लैबोरेटरी की जमीन से गहराई में स्थित रिसर्च फैसिलिटी में किया जा रहा था. इस प्रोजेक्ट में कई प्रयोग शामिल हैं जिनका उद्देश्य वीकली इंटरएक्टिंग मासिव पार्टिकल (WIMP) का अध्ययन करना है. इस प्रयोग में में एक कण को जीनोन अणु के न्यूक्लियस से टकराव करना था जिससे प्रकाश के संकेत पैदा होने थे और उससे जीनोन अणु के इलेक्ट्रान मुक्त होने थे.
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जिनोन 1टी (XENON 1T) डिटेक्टर इसी सिद्धांत पर काम करता है और जिनोन 100 (XENON 100) और जिनोन 10 (XENON 10) सीरीज के पहले का ही डिटेक्टर है. इस प्रयोग में जिनोन 1टी को 3.2 टन की अति शुद्ध तरल जीनोन से भरा गया जिसमें से दो टन वाली जीनोन को कणों का अंतरक्रिया के लिए उपयोग होना था. इनमें से ज्यादातर अंतरक्रिया ज्ञात कणों से ही होना था.

जीनोन को तरल कर इस पर कणें फेंक कर यह प्रयोग किया गया. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


क्या पाया प्रयोग के बाद
इसके बाद वैज्ञानिकों ने इस बात का अनुमान लगाया कि पृष्ठभूमि में कितनी घटनाएं होनी चाहिए. लेकिन प्रयोग के बाद उन्हें यह देख हैरानी हुई की उन्हें 232 घटनाओं की उम्मीद थी लेकिन प्रयोग में 53 ज्यादा घटनाएं हुईं. इन अतिरिक्त घटनाओं यानि एक्सेसेस के होने से सवाल उठा की ये कैसे हो गईं और इनका स्रोत क्या था. कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि जो एक्सेसेस प्रयोग में अवलोकित किए गए हैं उनके एनर्जी स्पैक्ट्रम देखन पर पता चला है कि वे सूर्य में पैदा होने वाले एकसियोन के जैसे हैं.

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एक्सियोन के बारे में कहा जाता है की सूर्य उनका सबसे बड़ा स्रोत हो सकता है. इन्हें डार्क मैटर की श्रेणी में नहीं रखा गया है. लेकिन इन्हें अभी तक देखा या अवलोकित नहीं किया जा सका है. यह इस तरह का पहला मामला होगा अगर साबित हो सका तो. इसका भौतिकी और अंतरिक्षभौतिकी पर गहरा असर हो सकता है जो भौतिकी के मूल सिद्धांतों को समझने में मददगार भी हो सकता है. इससे अलावा एक मत यह भी है कि जिनोन 1 टी डिटेक्टर में ट्रीटियम की उपस्थिति के कारण भी ये एक्सेसेस हो सकते हैं. तो एक मतानुसार ये न्यूट्रीनों की वजह से भी हो सकता है.
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