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हमें हादसे क्यों रहते हैं लंबे समय तक याद, इस रहस्य को सुलझाने की जगी उम्मीद

हमें हादसे क्यों रहते हैं लंबे समय तक याद, इस रहस्य को सुलझाने की जगी उम्मीद

शोधकर्ताओं का अभी तक इस मानसिक तथ्य (Mental fact) का वैज्ञानिक कारण नहीं मिल पाया था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

शोधकर्ताओं का अभी तक इस मानसिक तथ्य (Mental fact) का वैज्ञानिक कारण नहीं मिल पाया था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

याद्दाश्त (Memory) पर हुए एक अध्ययन नतीजों से वैज्ञानिकों लगता है कि उन्होंने इसका कारण पता लगा लिया है कि इंसान (Humans) को दुखद घटनाएं (Stressful Events) लंबे समय तक क्यों याद रहती हैं.

    इंसान (Humans) के जीवन ने हुई दर्दभरी घटनाएं (Painful memories) उसे ज्यादा याद रहती हैं. हमारे मनोवैज्ञानिक भी इस बात को मानते हैं कि “हादसे भुलाए नहीं जा पाते हैं” केवल एक कहावत ही नहीं हैं, बल्कि सच्चाई है. लेकिन इसकी वजह पर बरसों से शोध हो रहा है. हाल ही में एक अध्ययन में वैज्ञानिकों का लगता है कि अब इस बात के कारण पता चल सकते है कि तनावपूर्ण हालात हमारी याद्दाश्त (Memories) पर इतना गहरा असर क्यों डालते हैं कि वे लंबे समय तक याद रह जाते हैं. इस अध्ययन में वैज्ञानिकों को शुरुआती नतीजे उत्साह जनक मिले हैं.

    दो विचारधाराओं में से एक का समर्थन
    इस मामले में दो तरह के विचारधाराएं हैं. या तो इस तरह की यादें बिलकुल ही अलग तरीके से सहेजी जाती हैं या फिर मस्तिष्क में एक ही तरह से सहेजी जाती हैं. यह नया अध्ययन दूसरी विचारधारा का समर्थन करता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसा लगता है कि तनाव में पास पास जुड़ी याद्दाश्त के बनने की इन यादों को यादगार बनाने में प्रमुख भूमिका है.

    तनावपूर्ण अनुभवों की विस्तृत तस्वीरें
    ये यादें एक साथ उन यादों से बहुत ही अलग और विशिष्ठ नजर आती हैं, जो इन तनावपूर्ण घटनाओं से नहीं बनीं. जर्मनी के रूर यूनवर्सिटी बोचुम (RUB) के न्यूरो मनौवैज्ञानिक ओलिवर वोल्फ का कहना है, “हमारे दिमाग में आम तौर पर तनावपूर्ण अनुभवों की विस्तृत तस्वीरें बनती हैं, जैसे ड्राइविंग टेस्ट लेना. ये कई सालों तक कायम रहती हैं. जबकि किसी पार्क में टहलने की घटना दिमाग जल्दी ही भुला देता है.

    क्या किया गया अध्ययन में
    ऐसा क्यों होता है कि यह जानने के  लिए शोधकर्ताओं ने एक जॉब इंटरव्यू सिम्यूलेट किया जिसमें दो साक्षात्कारकर्ता थे. इसे ट्रयर सोशल स्ट्रेस टेस्ट कहते हैं और यह व्यक्ति में तनाव पैदा करने की प्रतिष्ठित तकनीक मानी जाती है. इस अध्ययन में 33 प्रतिभागियों का तनाव पैदा करने वाला साक्षात्कार लिया गया जबकि 31 प्रतिभागियों को मित्रवत माहौल वाला साक्षात्कार लिया गया.

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    शोधकर्ताओं ने पाया कि भावनात्मक आवेग यादों (Memories) को दिमाग के दूसरे हिस्से से जोड़ देते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    स्कैन से दिमागी प्रतिक्रिया का अध्ययन
    करंट बायोलॉजी में प्रकाशित इस शोध में प्रतिभागियों का फंक्शनल मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (fMRI) स्कैन लिया गया और दिमाग के उस हिस्से पर गौर किया गया जो भावनात्मक सीख से संबंधित है. तनावपूर्ण परीक्षा वालों के मामले में पाया गया कि पहले से देखी गई और पहली बार देखी गई वस्तुओं को देख कर जो मस्तिष्क एक तरह की न्यूरोन के स्तर की प्रतिक्रियाएं होती हैं.

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    भावनात्मक याद्दाश्त
    शोधकर्ताओं ने पाया कि ऐसा लगता है कि वस्तुओं और तनाव पैदा करने वाली घटना का संबंध याद्दाश्त बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है. अध्ययन ने सुझाया कि भावनात्मक याद्दाश्त को यादगार बनाने में संबंधित पहलू दिमाग की भावनाओं से ज्यादा मजबूती से संबंधित हैं, यानि वह दिमाग के डर, आदि से संबंधित हिस्सों को नियंत्रित करने वाले तंत्र, एमिग्डाल (Amygdala) से संबंधित है.

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    हादसों की यादें (Traumatic Memory) से संबंधित तंत्रिकाओं का मजबूत संबंध होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    अलग अलग हिस्सों से जुड़ाव
    शोधकर्ताओं ने बताया कि तटस्थामक भावनात्मक अवस्था में होने वाले  चीजों और संदर्भों के अनुभव दिमाग के हिप्पोकैम्पस (सीखने और याद करने से जुड़ा दिमागी हिस्सा) से जुड़ते हैं लेकिन उच्च भावनाओं में यही अनुभव एमिग्डाल से जुड़ते हैं. सीमित हालातों में हुए इस अध्ययन के नतीजे शोध को और व्यापक बनाने के लिए प्रेरित करते हैं.

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    यह अध्ययन कई तरह की मानसिक व्याधियों में उपयोगी साबित हो सकता है जहां याद्दाश्त की भूमिका होती है. इससे दिमाग की यादों की जटिल संबंधों का बारे में और ज्यादा गहराई से पता चल सकता है. यह शोध भावनात्मक और हादसों की यादों को बेहतर समझने में मददगार होगा.

    Tags: Brain, Health, Research, Science

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