कोरोना वायरस कितना खतरनाक हो सकता है ट्रेन में?

माना जा रहा है कि 12 अगस्त के बाद और भी कई ट्रेनें शुरू हो सकती हैं

माना जा रहा है कि 12 अगस्त के बाद और भी कई ट्रेनें शुरू हो सकती हैं

जानिए, कोरोना के दौरान ट्रेन से सफर करना पड़े तो कहां और कैसे बैठना होगा सबसे सेफ (how to be safe from coronavirus while traveling by train) .

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 3, 2020, 2:23 PM IST
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कोरोना के बीच अनलॉकिंग का दायरा बढ़ाया जा रहा है. ट्रे्नें भी इसमें शामिल हैं. त्योहारों को देखते हुए कई स्पेशल ट्रेनें चल रही हैं और माना जा रहा है कि 12 अगस्त के बाद और भी कई ट्रेनें शुरू हो सकती हैं. इससे लंबे समय से यहां-वहां फंसे लोगों के लिए आनाजाना आसान हो सकेगा. हालांकि ट्रेन में लंबी या छोटी दूरी का सफर भी कोरोना के खतरे से खाली नहीं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रेनों में 8 फीट की दूरी तक भी कोरोना का खतरा बना रहता है.

क्या कहती है स्टडी

अनलॉकिंग के दौर को ध्यान रखते हुए ये स्टडी हुई. इसमें ये देखा गया कि कितनी लंबी दूरी की ट्रेन में कितनी दूरी के बाद भी कोरोना संक्रमण फैला. इस दौरान अलग-अलग चीजों को ध्यान में रखा गया. जैसे हर सीट पर बैठे यात्री के प्रभावित होने का कितना डर होता है. इसमें निकलकर आया कि कोरोना के मरीज से पांच सीट आगे-पीछे लोगों से लेकर आजू-बाजू की तीन सीटों तक पर बैठे यात्रियों में संक्रमण का औसत 0.32 प्रतिशत होता है. वहीं अगर कोई यात्री बीमार के बगल में ही बैठा हो तो उसे संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा 3.5 प्रतिशत तक होता है.

कोई यात्री बीमार के बगल में ही बैठा हो तो उसे संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा 3.5 प्रतिशत तक होता है

क्या निकला नतीजा

स्टडी में इस बात को भी अनदेखा नहीं किया गया कि अगर किसी सीट पर पहले बीमार और फिर स्वस्थ यात्री बैठे तो क्या हो सकता है. इसमें पाया गया कि खतरा तो तब भी है लेकिन ये 0.075% रह जाता है. साथ ही जो यात्री कोरोना मरीज की कतार में बैठे हुए हैं तो उन्हें संक्रमण का खतरा 1.5 प्रतिशत रहता है.

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चीनी वैज्ञानिकों ने की जांच

ये स्टडी चीन में कोरोना का लॉकडाउन खुलने के बाद वहां की हाईस्पीड ट्रेनों पर की गई. इसमें चाइनीज सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के साथ चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंस ने भी काम किया. इसमें पाया गया कि स्वस्थ लोगों से मरीज की दूरी के अलावा ये बात भी संक्रमण की दर कम या ज्यादा कर सकती है कि मरीज और दूसरों ने हाइजीन का कितना ध्यान रखा है. अगर मास्क न पहना जाए या हाथों को नाक, कान या आंखों के पास ले जाया जाए तो संक्रमण का खतरा काफी ज्यादा हो सकता है.

मास्क न पहना जाए तो संक्रमण का खतरा कई गुना हो जाता है- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


8 फीट में भी खतरा

स्टडी में जो सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात निकलकर आई, उसके मुताबिक अगर मरीज किसी ट्रेन में है, तो उसके साथ सफर करने वाले दूसरे यात्री तब तक सुरक्षित नहीं है, जब तक वे 8 फीट से ज्यादा दूरी न रखें. दो घंटे की यात्री के दौरान भी इतनी दूरी में संक्रमण फैल सकता है. चूंकि लक्षण न होने के कारण बहुतों को अपने बीमार होने का पता ही नहीं होता, इसलिए एक्सपर्ट ट्रेन में अतिरिक्त सतर्कता की बात कर रहे हैं.

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क्या फ्लाइट की यात्रा सेफ है?

ट्रेन की तरह ही फ्लाइट में भी कोरोना संक्रमण का खतरा रहता है. हालांकि ये अपेक्षाकृत सेफ मानी जा रही है. इसके पीछे अमेरिका की वो स्टडी है जो प्रतिशत में खतरे का आकलन करती है. Emory University और Georgia Tech की ये स्टडी साइंस जर्नल PNAS में आई. ये बताती है कि जैसे तमाम एहतियात के बाद भी कोई मरीज फ्लाइट में दाखिल हो गया तो उससे बीमारी कितनी दूर तक और कितने प्रतिशत तक असर कर सकती है.

हवा संतुलित है तो आइल यानी किनारे की सीट पर बैठे लोगों को ज्यादा खतरा रहता है- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


जैसे मान लें कि 14वें सीट नंबर पर कोई मरीज है तो उसके खांसने-छींकने पर वायरस के फैलने का सबसे ज्यादा खतरा उसके आगे और पीछे की दो-दो सीटों पर होगा. इससे दूर बैठे यात्रियों तक पहुंचते हुए खतरा 1% हो जाएगा. वहीं फ्लाइट क्रू, जो फ्लाइट में यात्रियों की मदद के लिए लगातार घूमते रहते हैं, उन्हें 5% से 20% तक खतरा होता है. वहीं हर मिनट के साथ वायरस के फैलने का खतरा 1.8% रहता है.

कौन सी सीट सुरक्षित?

क्या मिडिल, विंडो या आइल सीट में भी खतरा कम या ज्यादा होता है? ये सवाल भी बार-बार उठ रहा है. यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न फ्लोरिडा के वैज्ञानिक अशोक श्रीनिवासन के मुताबिक ये हवा के बहाव यानी एयरफ्लो पर निर्भर करता है. अगर केबिन में हवा का बहाव तेज है तो किसी भी सीट पर खतरा हो सकता है. लेकिन हवा संतुलित है तो आइल यानी किनारे की सीट पर बैठे लोगों को ज्यादा खतरा रहता है, जबकि विंडो सीट सबसे सुरक्षित होती है.

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क्यों है खतरा?

हालांकि इसके बाद भी हवाई यात्रा में कोरोना का खतरा बना हुआ है. ऐसा इसलिए है क्योंकि हम फ्लाइट में बैठने से पहले और उससे बाहर आने के दौरान या एयरपोर्ट पर ही बहुत से लोगों के संपर्क में आते हैं. सिक्योरिटी चेक या टर्मिनल में लोगों का संपर्क होता ही होता है. इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पाता है. साथ ही पूरी तरह से भरी हुई फ्लाइट्स में अगर कोई भी संक्रमित है तो खतरा कहीं न कहीं रहता ही है.
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