क्यों नहीं मिल पा रहे हैं मंगल पर जीवन रहे होने के संकेत, खुल गया रहस्य

मंगल (Mars) पर जीवन (Life) होने के संकेत तो मिले लेकिन वे मिट्टी (Soil) में नहीं मिल सके हैं जिसका कारण वैज्ञानिकों ने पता लगाने की कोशिश की है. (तस्वीर: Pixabay)
मंगल (Mars) पर जीवन (Life) होने के संकेत तो मिले लेकिन वे मिट्टी (Soil) में नहीं मिल सके हैं जिसका कारण वैज्ञानिकों ने पता लगाने की कोशिश की है. (तस्वीर: Pixabay)

मंगल (Mars) पर कभी जीवन (Life) के होने के प्रमाण तमाम प्रयासों के बाद भी नहीं मिल पाए हैं. शोधकर्ताओं ने एक खास प्रयोग (Experiment) कर इसकी वजह पता लगाई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 18, 2020, 1:34 PM IST
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मंगल (Mars) पर जीवन (Life) था या नहीं इस बारे में बहुत तरह की बातें सुनने को मिली हैं. वैज्ञानिकों को भी कई तरह के संकेत देखने को मिले हैं और अब तक के प्रमाण (Evidences) इस बात के स्पष्ट प्रमाण तो नहीं ही दे सके हैं कि यहां जीवन कभी नहीं था.  ऐसे में अगर वाकई मंगल पर जीवन कभी था तो इसके प्रमाण क्यों नहीं मिल रहे हैं. ऐसा लगता है कि ताजा शोध ने इस सवाल का जवाब दे दिया है. शोधकर्ताओं को ऐसे संकेत मिले हैं जिनसे  पता चलता है कि मंगल पर जीवन के प्रमाण कैसे नष्ट (Destroyed) हुए होंगे.

इन तरल पदार्थों ने नष्ट किए प्रमाण
स्पेन के सैंट्रो डि एस्ट्रोबायोलोजिया में कोर्नेल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक मंगल पर लोहे से संपन्न मिट्टी में छिपे जैविक प्रमाण कभी वहां की सतह पर बहने वाले अम्लीय द्रव्यों के कारण नष्ट हो गए होंगे.

इस प्रयोग किया पता
शोधकर्ताओं ने मिट्टी और अमीनो एसिड से संबंधित सिम्यूलेशन्स किए जिससे वे मंगल पर बायोलॉजिकल पदार्थों के खत्म होने से संबंधि निष्कर्षों तक पहुंच सकें.  उनका कॉन्सट्रेनिंगद प्रिजर्वेशन ऑफ ऑर्गेनिक कम्पाउंड्स इन मार्स एनालॉग नॉनट्रोनाइट्स आफ्टर एक्सपोजर टू एसिड एंड अलकलाइन फ्ल्यूड्स 15 सितंबर को नेचर साइंटिफिक रिपोर्ट में प्रकाशित हुआ है.



मंगल पर ये अभियान करें मिट्टी की पड़ताल
गौर करने वाली बात है कि नासा का पर्सिवियरेंस रोवर अगले साल फरवरी में मंगल के जरीरो क्रेटर पर उतरेगा तो वहीं यूरोपीय स्पेस एजेंसी को रोसालिंद फ्रैंकलीन रोवर साल 2022 के अंत तक प्रक्षेपित होगा.

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नासा (NASA) का पर्सिवियरेंस (Perseverance) रोवर मंगल (Mars) पर से मिट्टी के नमूने (Soil Samples) जमा करेगा जो पृथ्वी पर जाए जाएंगे. (फोटो: @NASA)


पृथ्वी पर भी लाए जाएंगे नमूने
पर्सिवयिरेंस अभियान में मंगल की मिट्टी के नमूनों का जमा किया जाएगा जिन्हें साल 2030 तक पृथ्वी तक लाया जाएगा. वही रोसालिंद फ्रैंकलीन रोवर मंगल की सतह से नमूने जमा करके वहीं उनका अध्ययन करेगा.

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मिट्टी ही क्यों
मंगल पर जीवन की तलाश में लाल ग्रह की मिट्टी के नमूने अहम माने जा रहे हैं क्योंकि आणविक जैविक पदार्थ मिट्टी में ही सुरक्षित रह जाते हैं. लेकिन अगर पहले मिट्टी में एसिड की मौजूदगी रही हो तो इससे मिट्टी की जीवन के प्रमाणों को सहेजने की क्षमता पर बहुत बुरा असर पड़ा होगा.

इन द्रव्यों ने किया होगा मिट्टी में बदलाव
कॉर्नेल में कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेस में एस्ट्रोनॉमी विभाग के विजिटिंग वैज्ञानिक एल्बर्टो जी फेयरेन इस अध्ययन के कोरोस्पॉन्डिंग लेखक हैं. उनका कहना है, “हम जानते हैं कि अम्लीय तरल पहले मंगल की सतह पर बहा करते थे. इससे उन्होंने मिट्टी और उसकी जैविक सहेजने की क्षमता में बदलाव किया होगा. मिट्टी की आंतरिक संरचना परतों में बनी होती है जहां जैविक जीवन के प्रमाण जदैसे कि लिपिड्स, न्यूक्लिक ऐसिड, पेप्टाइड्स और अन्य जैविकपॉलीमर जमा होकर सुरक्षित रह जाते हैं.

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मंगल (Mars) की मिट्टी (Soil) पर अंतरिक्ष विकिरिण (Space Radiation) और अम्लीय द्रव्यों (Acidic Fluids) पर सबसे बुरा असर पड़ा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर, NASA @MAVEN2Mars)


मंगल के जैसे हालात बना कर किया प्रयोग
शोधकर्ताओं ने लैबोरेटरी में ही मंगल की सतह के हालातों को सिम्यूलेट किया. उनका लक्ष्य मिट्टी में ग्लाइसिन नाम के अमीनो एसिड को सुरक्षित रखना था जिसका पहले अम्लीय द्रव्यों से सामना हुआ था. शोधकर्ताओं  बताया कि उन्होंने ग्लाइसिन का उपयोग इसलिए किया क्योंकि वह मंगल के वातावरण में बहुत जल्दी खत्म हो जाता है. वहा उनके प्रयोगों के लिए एक आदर्श जानकारी देने वाला पदार्थ था.

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मंगल की तरह लंबे विकिरण का सामना करने के बाद प्रयोगों से यह पता चला कि मिट्टी में ग्लाइसिन अणुओं का फोटोडिग्रेडेशन हो गया. वहीं अम्लीय द्रव्यों ने मिट्टी की परतों का हटा दिया जिससे वह जेल जैसी सिलिका में बदल गई. इसका सीधा नतीजा यह हुआ कि मिट्टी में छिपे जैविक पदार्थ नष्ट हो गए. इसीलिए वैज्ञानिकों को मंगल पर जैविक पदार्थ मिलने में परेशानी हो रही है.
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