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कैसे और कब आया था पृथ्वी पर पानी, जानिए क्या कहता है इस पर ताजा शोध

पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत के अनेक मत हैं और उनके भी अपने वैज्ञानिक आधार हैं पर पूरी तरह से प्रमाणित नहीं हैं.

पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत के अनेक मत हैं और उनके भी अपने वैज्ञानिक आधार हैं पर पूरी तरह से प्रमाणित नहीं हैं.

पृथ्वी (Earth) पर पानी (Water) कैसे आया सहित उसकी पृथ्वी के जन्म को लेकर कई गुत्थियां हैं जिन्हें वैज्ञानिक सुलझाने की कोशिश में अहम जानकारी मिली है कि पृथ्वी पर पानी शुरू से ही था.

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नई दिल्ली:  पृथ्वी पर जीवन कैसे आया. यहां जीवन के अनुकूल परिस्थितियां कैसे बनी. ऐसे कई सवाल हैं जिनका जवाब स्पष्ट तौर पर वैज्ञानिकों को नहीं मिला है. इन सवालों के जवाब जानने के लिए वैज्ञानिक पृथ्वी ही नहीं सौरमंडल के दूसरे ग्रहों का भी अध्ययन कर रहे हैं.  अब वैज्ञानिकों को ताजा शोध में पृथ्वी पर पानी की उत्पत्ति संबंधी अहम सवाल से संबंधित सुराग मिले हैं.

वैज्ञानिक क्या सोचते थे अब तक पृथ्वी पर पानी के बारे में
आज भले ही पृथ्वी की सतह पर पानी की मात्रा बहुतायात में हो, लेकिन अब तक वैज्ञानिक मानते रहे कि हमेशा ऐसा नहीं था. लेकिन ताजा शोध के मुताबिक पृथ्वी पर इस तरह पानी शुरू से यानी उसके निर्माण के समय से ही था. हाल ही में नेचर जियो साइंस जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक वैज्ञानिकों को इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए शुक्र ग्रह का अध्ययन करने के दौरान मिला.

किन बातों पर के आधार किया गया शोध
वैज्ञानिकों में इस बात पर एकमत हैं कि दूसरे ग्रहों की सतह पर पानी नहीं हैं. और यह कि जब ग्रह बन रहे थे तब मंगल के पृथ्वी से टकराने पर  चंद्रमा का उदय हुआ था. अगर उस समय पृथ्वी पर पानी था तो इस घटना के बाद पृथ्वी की सतह से पानी उड़ गया होगा यह निश्चित है.

Earth, Life on Earth
फिलहाल पृथ्वी की तरह जीवन के अनुकूल परिस्थितियां किसी दूसरे ग्रह पर नहीं हैं.


दो ही कारण से पृथ्वी पर आ सकता है पानी
इस घटना के बाद पृथ्वी पर पानी कैसे आया इस बारे में दो मत हो सकते हैं. या तो हमारे ग्रह पर पानी बाहर से आया. पृथ्वी से कोई ऐसा क्षुद्रग्रह टकराया हो जिसमें बर्फ या पानी की प्रचुरता हो और वह पृथ्वी पर आ गया हो.  या फिर मंगल और पृथ्वी का टकराव ही इतना बड़ा न हुआ हो जिससे पूरा पानी वाष्प बनकर उड़ जाए.

क्यों ज्यादा रूचि है वैज्ञानिकों की इस सवाल में
चूंकि पानी पृथ्वी पर जीवन का आधार है इसलिए वैज्ञानिकों की इस बात में गहरी दिलचस्पी है कि यहां पानी आया कहां से. इस सवाल का जवाब ढूंढने में सबसे बड़ी समस्या यह है कि पृथ्वी के निर्माण के सारे चिन्ह उसके पूर्ण ग्रह बनने के बाद मिट चुके हैं.

किन अनुमानों के आधार पर किया गया शोध
इसी चुनौती के बीच बेल्जियम में फ्री यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रुसेल्स (ULB) के सेरिक गिलमैन के नेतृत्व में जियोकेम्सिट और न्यूमेरिकल मॉडलर्स की एक टीम ने शुक्र ग्रह का अध्ययन करना शुरू किया. माना जाता है कि पृथ्वी और शुक्र ग्रहों की भूगर्भीय बनावट और जलवायु हालात एक जैसे रहे होंगे.  अध्ययन में माना गया कि चूंकि पृथ्वी और शुक्र ग्रह बहुत पास हैं तो दोनों को अपने निर्माण के समय एक ही तरह का पदार्थ मिले होंगे.

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किसी ग्रह पर जीवन प्रक्रिया शुरू होने में लाखों साल लग सकते हैं. (प्रतीकात्मक फोटो)


क्या कह रही थी क्षुद्रग्रह से टकराने पर पानी मिलने की संभावना
शोधकर्ताओं ने शुक्र ग्रह पर  विभिन्न कुछ पानी वाले क्षुद्रग्रहों का उस पर टकराने के असर का अध्ययन किया. उसके बाद उन्होंने अपने न्यूमेरिकल सिम्यूलेशन गणना से यह पता लगाया कि इसी तरह का असर पृथ्वी से टकराने पर कैसा रहा होगा. वैज्ञानिकों ने पाया कि पानी से समृद्ध क्षुद्रग्रहों के शुक्र ग्रह से टकराने से और उससे पानी के वाष्प बनकर उड़ने से यह  पता नहीं  चलता कि इससे आज के  शुक्र ग्रह के वायुमंडल की व्याख्या नहीं हो पा रही है.

ज्यादा प्रभावी नहीं था क्षुद्रग्रहों का टकराना
इससे एक बात तय हो गई कि जो पदार्थ शुक्र ग्रह पर आए और पृथ्वी पर आए, खास तौर पर मंगल पृथ्वी के टकराने के बाद, उसका असर सूखा ही रहा होगा. इससे पृथ्वी पर क्षुद्र ग्रह से पानी आने की संभावना खारिज हो जाती है.

पहले रहा होगा पानी तो वह बचा कैसे
इससे एक ही संभावना बच जाती है कि आज जो हम पानी पृथ्वी पर देख रहे हैं वह काफी समय से पृथ्वी के बहुत ही भीतर रहा होगा. जिससे उस बड़े टकराव के बाद भी वाष्पित होकर उड़ा नहीं होगा. इस अध्ययन का पृथ्वी, शुक्र और यहां तक कि मंगल पर भी जीवन संबंधी हालातों की पड़ताल पर असर पड़ेगा.  यह अध्ययन यह सलाह देता है कि हमारे आस पास के ग्रहों के अंदर भी भरपूर मात्रा में पानी रहा होगा जो समय के साथ धीरे धीरे खत्म हो गया होगा.

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पृथ्वी और शुक्र ग्रह में काफी समानताएं होने से नतीजों पर पहुचने में मदद मिली. (प्रतीकात्मक फोटो)


मंगल और शुक्र पर क्या हुआ होगा
चूंकि मंगल ग्रह छोटा है इस लिए संभावना है कि उसने अपना पानी तब तक खो दिया होगा जब पृथ्वी पर जीवन आकार ले रहा होगा. इन नतीजों से शुक्र ग्रह के बारे में इस धारणा को बल मिलता है कि कभी शुक्र पर भी समुद्र रहा होगा. हो सकता है वहां अब भी सतह के नीचे पानी हो.

इस शोध के नतीजे शुक्र ग्रह पर हमारे अगले अंतरिक्ष अभियानों के लिए तैयारी में मददगार साबित हो सकते हैं.

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