घर में कितनी आसानी से फैल सकता है कोरोना संक्रमण, क्या है इस पर ताजा शोध

घर में कितनी आसानी से फैल सकता है कोरोना संक्रमण, क्या है इस पर ताजा शोध
घरेलू माहौल में सोर्स कोव-2 अन्य कोरोना वायरयस की तुलना में तेजी से फैलता है.

एक शोध में इस बात की पड़ताल की गई कि घरेलू वातावरण में कोविड-19 (Covid-19) संक्रमण फैलने की कितनी संभावना होती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 20, 2020, 2:02 PM IST
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नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Corona virus)का असर भारत सहित दुनिया में बढ़ता ही जा रहा है. जहां इससे होने वाली बीमारी कोविड-19 (Covid-19) का इलाज अभी तक तलाशा जा रहा है, वहीं इसके संक्रमण को रोकने की कोशिशें भी जारी हैं. शोधकर्ता इसके प्रसार को लेकर भी शोध अभी तक कर रहे हैं. ऐसे ही एक शोध में पता यह जानने की कोशिश की गई कि कोरोना घरेलू माहौल में किस तरह से फैलता है.

घरेलू वातावरण में कोरोना प्रसार का अध्ययन
चीन के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक क्लीनक इन्फेक्शियस डिसीज जर्नल में यह शोध प्रकाशित हुआ है जिसमें यह जांच की गई कि सार्स कोव-2 घर में कैसे फैलता है. इसमें संक्रमण के दूसरे क्रम के हमले की दर को देखा गया जो मरीज से सीधे संक्रमण के बजाए दूसरे संपर्कों के जरिए हुए संक्रमण को दर्शाता है.

काफी कम रहा घरेलू संक्रमण



अध्ययन में पाया गया कि वायरस घरेलू वातावरण में यह दूसरे क्रम का हमला 16.3 प्रतिशत की दर से ही कर रहा है. इस अध्ययन में 392 घरेलू संपर्कों और 105 इंडेक्स मरीजों का अध्ययन किया गया. इंडेक्स मरीज परिवार में इकलौते मरीज का कहा जाता है. वहीं संक्रमण का जोखिम संपर्क में आने वाले की उम्र, उसका संक्रमित व्यक्ति से संबंध, आदि पर निर्भर करता है.



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सार्स कोव 2 घरेलू माहौल में संक्रमण ज्यादा फैलाता है


कैसे जुटाए गए आंकड़े
इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने चीन के दो स्थानीय अस्पतालों से एक से 20 फरवरी 2020 तक के आंकड़े जुटाए. इसमें उन्होंने उन घरों के आंकड़ों का अध्ययन किया जिन परिवारों में केवल एक ही मरीज था और परिवार वाले उसके साथ ही रह रहे थे जब मरीज संक्रमित पाया गया था.शोध में पाया गया कि दूसरे क्रम के हमले की दर सार्स,मर्स और 2009 के इंफ्लूएंजा ए के मुकाबले ज्यादा थी. शोधकर्ताओं ने पाया कि इस वजह से संक्रमित लोगों की संख्या ज्यादा हो सकती है.

घर में संक्रमित होने की संभावना ज्यादा
 यह भी पाया गया कि कम्यूनिटी संक्रमण की तुलना में घरेलू  संक्रमण होने की संभावना ज्यादा है और इसी लिये घरेलू संक्रमण ज्यादा होगें. दूसरे क्रम के हमले की दर व्यस्कों में बच्चों के मुकाबले कहीं ज्यादा पाई गई. यानि एक ही स्रोत के संपर्क में आने से व्यस्क के संक्रमित होने की संभावना 18 साल से कम्र उम्र के बच्चों के मुकाबले ज्यादा होगी.

किसी भी उम्र के लोग हो सकते हैं संक्रमित
वायरस को लेकर शोध जारी हैं और वायरस के होने वाले प्रभावों पर नतीजे अपडेट हो रहे हैं. अब यह भी पाया जा रहा है कि सभी उम्र के लोग में संक्रमण होने की संभावना है. उम्र के हिसाब से उनमें बीमारी की गंभीरता को लेकर अंतर हो सकता है. इसके अलावा उनमें पहले से ही रही बीमारियां जैसे हाइपरटेंशन, डाइबिटीज या हृदय रोग जैसी समस्या भी अंतर ला सकती हैं.

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पति पा पत्नि को कोरोना संक्रमण का खतरा कहीं ज्यादा होता है.


और शोध की भी जरूरत है अभी
शोधकर्ताओं ने माना कि व्यस्कों और बच्चों के बीच दूसरे क्रम के हमले की दर के कारण अलग हो सकते हैं और इस पर अभी और भी अध्ययन किए जाने की जरूरत है. इसमें घर के सदस्यों का संक्रमित व्यक्ति से व्यवहार, सदस्यों का कामकाज जैसे कारक भी इस दर को प्रभावित कर सकते हैं.

पति या पत्नि के संक्रमित होने की संभावना अधिक
इसके अलावा मरीज की पत्नी या उसके पति के संक्रमित होने की संभावना घर के अन्य सदस्यों की तुलना में अधिक होती है. ऐसा होना इसलिए संभव है कि पति या पत्नी के मरीज के संपर्क में आने की संभावना कहीं अधिक होती है, खास कर यदि वे एक ही कमरे में रह रहे हों.

क्या खुद को घर पर क्वारेंटीन करने का भी होता फायदा
शोधकर्ताओं ने पाया की जैसे ही 105 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई और उन्होंने खुद को घर में 14 दिन के क्वारेंटीन कर दिया, घर के बाकी सदस्य संक्रमित नहीं हुए यदि उन्होंने मास्क पहना और मरीज से दूर रहे.  इससे साफ होता है कि संक्रमण का पता चलते ही खुद को घर में क्वारेंटीन करना सार्स कोव 2 का संक्रमण रोकने के लिए प्रभावी होता है.

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