ESO टेलीस्कोप ने खींची अंतरिक्ष में तितली के आकार की खूबसूरत तस्वीर

ESO टेलीस्कोप ने खींची अंतरिक्ष में तितली के आकार की खूबसूरत तस्वीर
तितली के आकार के इस प्लैनेटरी नेबुला की इतनी साफ और खूबसूरत तस्वीर पहली बार ली गई है. (फोटो : ESO/ Twitter)

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 1, 2020, 9:59 PM IST
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कई बार अंतरिक्ष में ऐसी घटनाएं भी हो जाती है जो एक कौतूहल भरा नजारा पैदा कर देती है. ऐसी ही एक विलक्षण और दुर्लभ घटना की तस्वीर यूरोपीय साउदर्न ऑबजर्वेटरी (ESO) के विशालकाय टेलीस्कोप ने हमारी गैलेक्सी मिल्कीवे में एक तितली के आकार के गैस के गुब्बारे की ली है. ESO के चिली स्थित वेरी लार्ज टेलीस्कोप (VLT) ने इस खास तस्वीर को तब लिया जब एक NGC 2899 नेबुला प्लैनेटरी (Planetary Nebula) अंतरिक्ष में तैरता सा दिखाई दिया.

इससे पहले ऐसी तस्वीर नहीं ली गई
एक प्लैनेटरी नेबुला (Planetary Nebula) अंतरिक्ष में तब बनता है जब तारे का सारा ईंधन खत्म हो जाता है वह अपनी गैस की बाहरी परतों को बाहर फेंकता है. NGC 2899 को इससे पहले कभी इतने विस्तार से तस्वीर में कैद नहीं किया गया. इस तस्वीर में पीछे के तारों की पृष्ठभूमि में गैस छोड़ते हुए चमकते पिंड की बाहरी सीमाएं साफ दिखाई रही हैं.

क्यों दिख रहा है नीला और लाल रंग
यह पिंड पृथ्वी से 6500 प्रकाशवर्ष दूर स्थित है जिसका नीला हिस्सा ऑक्सीजन से बना है जबकि उसके आसपास का लाल रंग उसके किनारे पर मौजूद हाइड्रोजन की वजह से दिखाई दे रहा है. ESO ने अपने बयान में कहा, “इस पिंड की इतने विस्तार से पहले कभी तस्वीर नहीं ली गई. इसका धुंधला बाहरी किनारा भी पीछे के तारों की पृष्ठभूमि में चमक रहा है.”





कब होता है ऐसे पिंडों का निर्माण
मजेदार बात यह है कि इन पिंडों को नाम तो प्लैनेटरी नेबुला दिया गया है जो गैस और धूल के गोले ही होते हैं जो एक मरते तारे से निकलते हैं, लेकिन इनका ग्रहों से कोई लेन-देना नहीं है. इनका निर्माण तब होता है जब हमारे सूर्य से छह गुना वजन तक वाले तारे अपने जीवन के अंतिम समय में सिकुड़ कर ढेर हो जाते हैं और गैस के गोले बाहर की तरफ फेंकते हैं. इन गोलों से तीव्र पराबैगनी और प्रकाश की किरणें जिसके कारण वे हजारों साल तक तेजी से चमकते रहे हैं.

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बहुत ही कम होते हैं इस तरह के पिंड
प्लैनेटरी नेबुला अंततः अंतरिक्ष  में छितरते जाते हैं इसका मतलब यह हुआ के ये कम समय के लिए और बहुत कम संख्या में होते हैं. हार्वर्ड स्मिथसन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजक्स के अनुमान के अनुसार हमारी गैलेक्सी में ही अब तक केवल 1500 इस तरह के ज्ञात पिंड हैं.

Neutron star
इस पिंड का निर्माण तारे के मरने के बाद गैसों के निकलने से होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


कितना बड़ा है यह पिंड
NGC 2899 अंग्रेज खगोलविद जॉन हर्षेल ने 1835 में खोजा था.  यह वेला (Vela) के दक्षिणी तारा समूह में स्थित है जो यहां से 3,000 से 6,500 प्रकाशवर्ष दूर है. इसके केंद्र से गैसे के गोलों के किनारे करीब दो प्रकाशवर्ष की दूरी पर हैं. इसके केंद्र में दस हजार डिग्री सेल्सियस तक का तापमान है. NGC 2899 में इतना अधिक तापमान नेबुला के पूर्व तारे से निकला विशाल मात्रा में निकले विकिरण के कारण है. इसी वजह से इसकी हाइड्रोजन गैस लाल रंग की और ऑक्सीजन गैस नीले रंग की दिखाई देती है.

पृथ्वी की वह जगह जहां से दिखता है तारों का सबसे अच्छा नजारा

वास्तव में NGC 2899 पूर्व में एक तारा नहीं बल्कि दो तारों का समूह था. इसके केंद्र में स्थित ये दो मरते हुए तारे ही इसे एक सा स्वरूप देते लगते हैं. एक तारे का जीवन जब खत्म होता है तो उसकी बाहरी परतों से गैसें निकलने लगती है. दूसरा तारा गैसों के प्रवाह में इस तरह से दखल देता है जिससे पूरा पिंड तितली के आकार सा आभास देता लगता है. ESO का कहना है कि केवल 10 से 20 प्रतिशत प्लेनेटरी नेबुला इस तरह का द्विध्रुवीय आकार दिखाते हैं.
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