नाकामी के बाद एक किसान ने कैसे खड़ा कर दिया बहुत बड़ा अंपायर

हालत ये थी कि ना तो उसको पिता पसंद कर रहे थे. ना पड़ोसी और साथ में काम करने वाले. सभी को लगता था कि उसके दिमाग को कोई स्क्रू ढीला है. लेकिन उसी शख्स ने फोर्ड जैसा ब्रांड खड़ा करके दिखाया.

News18Hindi
Updated: April 28, 2019, 1:00 PM IST
नाकामी के बाद एक किसान ने कैसे खड़ा कर दिया बहुत बड़ा अंपायर
हालत ये थी कि ना तो उसको पिता पसंद कर रहे थे. ना पड़ोसी और साथ में काम करने वाले. सभी को लगता था कि उसके दिमाग को कोई स्क्रू ढीला है. लेकिन उसी शख्स ने फोर्ड जैसा ब्रांड खड़ा करके दिखाया.
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Updated: April 28, 2019, 1:00 PM IST
बेशक पढ़ाई-लिखाई जरूरी है लेकिन दुनिया में ऐसे तमाम लोग हुए हैं, जिन्होंने पढ़ाई के बगैर ही ऐसा कुछ करके दिखा दिया है कि हर कोई उन पर फख्र कर सकता है. क्या आपको मालूम है कि दुनिया के सबसे बड़े ब्रांडो में एक फोर्ड को एक ऐसे किसान ने खड़ा किया था, जो पढ़ा-लिखा तो ज्यादा नहीं था लेकिन मशीनों में उसकी बहुत रुचि थी.

गांव का वो मामूली किशोर था, हैरीसन फोर्ड. खेतों में काम करना पड़ता था. ज्यादा पढ़ाई-लिखाई नहीं हो सकी थी. जब वो स्कूल गया तो टीचर्स ने उसको खारिज कर दिया. ये कह दिया गया कि उसकी बुद्धि बहुत मोटी है.



हालांकि ऐसी बात थी नहीं. बस बात इतनी थी कि पढ़ाई के समय भी उसका दिमाग मशीनों में घूमता रहता था. इस कारण पढ़ाई में वो फोकस नहीं कर पाता था. टीचर्स की डांट से तंग आकर उसने स्कूल छोड़ ही दिया. इसे उसकी पहली नाकामी माना गया. पिता को कतई अच्छा नहीं लगा कि वो स्कूल छोड़ घर बैठ गया. इस बात से पिता खासे खफा हुए. 12-13 साल की उम्र में वो गांव का सबसे बढ़िया घड़ीसाज बन गया. लेकिन पिता के साथ अनबन के चलते उसने घर छोड़ भी दिया.

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शहर में उसे एक फैक्ट्री में सहायक मैकेनिक की नौकरी मिली. पैसे बहुत मामूली थे. दिनभर फैक्ट्री में काम करता और रातभर अपनी मशीनों पर ठोका-पीटी करता. सारे पैसे मशीनों के लिए सामान खरीदने में खर्च कर देता. उसको सनकी माना जाने लगा, नतीजा ये हुआ कि नौकरी से निकाल दिया गया.harrison ford

सालों तक तिरस्कार का शिकार रहे हैरीसन फोर्ड
अब हालत ये थी कि ना तो उसको पिता पसंद कर रहे थे. ना पड़ोसी और साथ में काम करने वाले. सभी को लगता था कि उसके दिमाग को कोई स्क्रू ढीला है.
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कई साल वो यूं ही तिरस्कार में जीता रहा. उसकी जिंदगी उस कमरे में सिमटती जा रही थी, जिसे उसकी वर्कशाप कहना ज्यादा ठीक होगा. उनको सबने कहा कि क्यों अपनी जिंदगी खराब कर रहे हो, मशीनों के साथ ज्यादा पागलपन छोड़ो, क्योंकि इससे उन्हें कोई फायदा नहीं होने वाला.

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हालात उल्टे ही उल्टे थे लेकिन कोई उन्हें डिगा नहीं पाया. आर्थिक तंगहाली में भी. शुक्र है कि इन हालात में पत्नी ने भरपूर साथ दिया. फिर एक दिन वो आया जब उसने अपने हाथों से जो मोटर बनाई, उसे दौड़ा कर भी दिखाया.harrison ford

ये था उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट
बस ये टर्निंग प्वाइंट था, यहां से सबकुछ बदल गया. उन्होंने दुनिया की सबसे सस्ती कारें बनाईं. हर कोई इसे खरीद सकता था. बाद में उन्होंने दुनियाभर के उद्योगों को आटोमेशन का मंत्र भी दिया. जब उनकी मृत्यु हुई तो उस समय तक वह दुनिया के सबसे शोहरतमंद और धनी शख्स थे. कहा जाता है कि उनके इरादे लौहपुरुष की तरह पक्के थे.

कहा जाता है जो खराब हालात में जो सबसे ज्यादा धैर्य रखता है और खुद की बुलंदी को बुलंद रखता है, उसके रास्ते से बाधाएं हटती ही हटती हैं. बेशक देर लग जाए. अगर पत्थर पर लगातार रस्सी की रगड़ से निशान उभर आते हैं तो अकूत संभावनाओं से भरी इस दुनिया में क्या नहीं हो सकता, जहां सभी के लिए पर्याप्त अवसर और पर्याप्त रास्ते हैं.

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