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वो देश, जहां इस्लाम छोड़ने की सजा मौत थी, गर्भवती महिलाओं तक को नहीं मिली छूट

वो देश, जहां इस्लाम छोड़ने की सजा मौत थी, गर्भवती महिलाओं तक को नहीं मिली छूट

अफ्रीकी देश सूडान में हाल ही में इस्लामी शासन का खात्मा हुआ- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

अफ्रीकी देश सूडान में हाल ही में इस्लामी शासन का खात्मा हुआ- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

इस्लामिक देश रहे सूडान में धर्म बदलने की बात या ऐसी किसी भी हरकत पर पत्थरों से मारकर मौत की सजा (apostasy death by stoning in Sudan) दी जाती थी. ये नियम पिछले ही साल बदला.

  • News18Hindi
  • Last Updated :
    उत्तरी अफ्रीकी देश सूडान में हाल ही में एक ऐतिहासिक फैसला हुआ, जिसके तहत वहां 30 साल पुराने इस्लामी शासन का खात्मा हुआ. इसके साथ ही वहां लोकतांत्रिक व्यवस्था अपनाई जाने वाली है. सरकार ने आश्वस्त किया है कि वो राजनीति को धर्म से अलग रखेगी. वैसे अब तक यहां कट्टरपंथियों का दबदबा रहा. यहां तक कि इस्लाम छोड़ने के कारण मौत की सजा सुनाई जा चुकी है. पत्थर मार-मार मौत देने वाले ऐसे कई मामले इंटरनेशनल सुर्खियां भी बने.

    क्यों है चर्चा में
    दरअसल यहां साल 1989 में सैन्य शासक उमर अल बशीर (Omar al-Bashir) ने कब्जा कर लिया था. इसके तुरंत बाद पूरे सूडान का इस्लामीकरण हो गया. यहां तक कि दूसरे धर्म के लोगों को धर्म बदलने पर मजबूर किया गया और न मानने पर यातनाओं से लेकर मौत की सजा तक दी गई. इसी सैन्य शासक बशीर पर पिछले साल कई गंभीर आरोप लगे, जिनमें से कई साबित भी हो चुके हैं. बता दें कि बशीर पर कई आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं, जिनमें से एक सूडान के संघर्षग्रस्त दारफुर क्षेत्र में मासूम लोगों की मौत है.

    Omar al-Bashir
    लगभग 3 दशक तक सूडान पर सैन्य शासक उमर अल बशीर की सत्ता रही


    लगा नरसंहार का आरोप
    इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में बशीर पर नरसंहारों का आरोप भी लगा है. यही देखते हुए बशीर को पिछले ही साल अप्रैल में अपदस्थ किया गया था और शासन की कमान सेना ने ले ली थी. अब वहां सैन्य शासन खत्म होकर लोकतंत्र की बहाली होने जा रही है. इसी 3 सितंबर को हुई इस बात के बाद सूडान में हिंसा थमने की उम्मीद की जा रही है.

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    क्यों हुआ विद्रोह
    बता दें कि सूडान में कई संगठन बन चुके हैं, जो अल बशीर के इस्लामिक शासन के खिलाफ रहे. वे लोकतंत्र की मांग के लिए पूर्व सरकार और सेना से लड़ाई करते रहे. यही वजह रही कि सूडान को अफ्रीका के कुछ सबसे ज्यादा हिंसाग्रस्त देशों में गिना जाता रहा. वैसे सूडान में बशीर के खिलाफ विद्रोह की बड़ी वजह देश का जबरन इस्लामीकरण रहा. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक बशीर ने सत्ता पर कब्जा करते ही वहां शरिया कानून लगा दिया था.

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    इसके तहत कड़े कानून थे
    जैसे इनमें खतना (FGM) की परंपरा. इसके तहत महिलाओं के प्राइवेट पार्ट का एक हिस्सा काट दिया जाता था. ये काफी खतरना प्रक्रिया होती है, जिसमें कई बार छोटी बच्चियों की जान भी चली जाती थी. संक्रमण होना वहां आम बात थी. सैन्य तख्तापलट के बाद इसी साल वहां महिलाओं के खतने पर प्रतिबंध का कानून आया. साथ ही गैर मुस्लिमों के शराब पीने से प्रतिबंध भी हटा. बता दें कि बशीर से पहले से ही सूडान में साल 1983 में ही गैर-मुस्लिमों के भी शराब पीने पर प्रतिबंध लगा हुआ था.

    पत्थर मार-मार मौत देने वाले ऐसे कई मामले इंटरनेशनल सुर्खियां भी बने- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


    धर्म परिवर्तन पर मौत की सजा
    इन सारे कानूनों के साथ सबसे अजीबोगरीब और खतरनाक कानून था वहां पर धर्म परिवर्तन पर सजा का. साल 1991 में तत्कालीन अल- बशीर सरकार के राज में एक कानून लाया गया, जिसके तहत मुस्लिम अगर धर्म परिवर्तन करना चाहें तो उन्हें मौत की सजा दी जाती थी. मौत की सजा भी फांसी नहीं, बल्कि पत्थरों से तब तक मारा जाता था, जब तक मौत न हो जाए. सूडानीज क्रिमिनल लॉ 126 के तहत ये नियम था. ये नियम इतना सख्त था कि अगर कोई मुसलमान धर्म न छोड़े, लेकिन ऐसा कोई भी काम करे जो इस्लाम के खिलाफ हो, तो उसे तुरंत मौत की सजा दे दी जाती थी.

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    गर्भवती तक को रियायत नहीं थी
    ऐसा ही एक मामला काफी उछला था, जब सूडान की एक अदालत ने एक प्रेगनेंट महिला को इस्लाम छोड़कर ईसाई से शादी करने पर मौत की सजा सुनाई थी. मरियम यहया इब्राहिम इशाग नाम की महिला को 3 दिनों के भीतर ईसाई धर्म छोड़कर वापस इस्लाम अपनाने को कहा गया. ऐसा न होने पर मौत की सजा तय हुई. तब महिला ने तर्क करते हुए कहा था कि वो कभी मुस्लिम रही ही नहीं, बल्कि हमेशा से ईसाई धर्म ही मानती रही. महिला के मुताबिक उसकी मां ईसाई थी, जबकि पिता मुस्लिम थे. बच्ची की जन्म के बाद ही पिता उसे छोड़कर चले गए थे और बच्ची ईसाई धर्म के साथ ही बड़ी हुई.

    सूडान के अलावा कई दूसरे देशों में भी पत्थर मारकर मौत की सजा का प्रावधान चला आ रहा है- सांकेतिक फोटो


    गर्भवती को मौत की सजा देने पर ह्यूमन राइट्स संगठनों ने काफी बवाल भी किया था लेकिन मामले का क्या हुआ, इसका कुछ पता नहीं चला. अब इस कानून में बदलाव हो चुका है और अंतरिम सरकार दूसरे बदलावों पर भी काम कर रही है.

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    कई देशों में पत्थर मारकर जान लेने का कानून 
    वैसे सूडान उन चुनिंदा देशों में है, जहां मौत की सजा के तहत पत्थर मारकर मौत दी जाती है. दक्षिण पूर्वी एशिया के देश ब्रुनेई में भी सालभर पहले ही समलैंगिक सेक्स के मामले में पत्थर मारकर मौत की सजा को मंजूरी दी. वहां समलैंगिक संबंध पहले से ही अपराध की श्रेणी में आता था लेकिन इतनी सख्त सजा नहीं थी. मानवाधिकार संगठनों ने ब्रुनेई के इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा था कि ऐसे कदमों से विदेशी संगठन और लोग ब्रुनेई के बहिष्कार पर मजबूर हो जाएंगे.

    इन दो देशों के अलावा संयुक्त अरब अमीरात, ईराक, कतर, मॉरितेनिया, सऊदी अरब, यमन, नाइजीरिया और अफगानिस्तान में भी कई अपराधों पर दोषी को पत्थरों से मार मौत दी जाती है. यहां तक कि पड़ोसी देश पाकिस्तान की कुर्रम घाटी में भी आदिवासी बहुल इलाकों में इस सजा के कई उदाहरण मिलते रहे हैं.

    Tags: Africa, Islam, Islamic state, Religion

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