कुछ लोगों को बार बार खुदकुशी के ख्याल क्यों आते हैं

खुदकुशी का ख़्याल उसी को आता है जो स्ट्रेस में हो या ड्रिप्रेशन से गुजर रहा हो

News18Hindi
Updated: November 10, 2018, 10:23 AM IST
कुछ लोगों को बार बार खुदकुशी के ख्याल क्यों आते हैं
सांकेतिक तस्वीर
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Updated: November 10, 2018, 10:23 AM IST
खुदकुशी का ख़्याल आना आम बात है. ये ख्याल उसी व्यक्ति को आता है जो स्ट्रेस में हो या ड्रिप्रेशन से गुजर रहा हो. स्ट्रेस भी उस लेवल का जिसमें व्यक्ति जिंदगी से इस कदर परेशान हो कि मर जाना बेहतर लगे. रिसर्च बताती हैं कि ड्रिप्रेशन के शिकार ज्यादातर केस में मरीज का इलाज किया जा सकता है. जिन्हें सही वक्त पर इलाज नहीं मिलता वे सुसाइड करते हैं.

स्ट्रेस और डिप्रेशन से जूझ रहा व्यक्ति, सिर्फ खुशी के मौके पर खुश नहीं हो पाता. और दुख के मौके पर गमगीन नहीं होता.

आत्महत्या के लिए अवसाद, मानसिक विकार, बायोपलर डिसऑर्डर, शिजोफ्रेनिया, पर्सनैलिटी डिसऑर्डर और स्बसटेंस एब्यूज़ को जिम्मेदार ठहराया जाता है. इसमें एल्कोहल और ड्रग्स लेना भी शामिल है.

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कुछ सुसाइड 'इम्पल्सिव एक्ट्स' जिसमें स्ट्रेस, फाइनेंनशियल परेशानियां, रिलेशनशिप की तकलीफ शामिल हैं, की वजह से होते हैं.

कारण
-सुसाइड करने से साइकोलॉजिकल कारणों में मेंटल इलनेस माना जाता है. जिसकी वजह ऊपर बताए डिसऑर्डर हैं. जैसे- डिप्रेशन, मानसिक विकार, बायोपलर डिसऑर्डर, शिजोफ्रेनिया, पर्सनैलिटी डिसऑर्डर हैं.
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-कुछ केस में थोड़े और कारण शामिल होते हैं. जैसे- substance abuse, childhood abuse or trauma, परिवार में सुसाइड करना, previous suicide attempts, chronic disease.
-सुसाइड के कारणों में कुछ एनवायरमेंटल फेक्ट भी शामिल होते हैं. जिसमें सोशल नुकसान जैसे एक जाना-पहचाना रिश्ता टूटना. मेंटल या शारीरिक शोषण होना.

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-एक कारण सोशल कल्चर भी माना जाता है. जिसमें वो व्यक्ति पीड़ित माना जाता है, जिसे दूसरों की तरफ अपनाया न जाए. इसकी वजह जेंडर या धर्म भी हो सकती है.
-परेशानी में मदद न मिलने पर भी सुसाइड का ख्याल आता है.
-किसी ऐसी बात या विचार पर विश्वास करना, जिसमें परेशानी का हल खुदकुशी माना हो.

लक्षण
-परेशानियों में इस कद्र घिरा महसूस करना कि आशा खो देना.
-असहनीय भावनात्मक दर्द से गुजरना.
-जल्दी जल्दी मूड बदल जाना. ये अच्छा और खराब दोनों हो सकते हैं.
-किरदार में बहुत ज्यादा बदलाव, जिसमें डेली रूटीन से लेकर सोने का वक्त बदलना भी शामिल है.
-ज्यादातर वक्त में बदले, अपराध बोध और शर्मिंदा होने से जुड़ी बातें करना.



-उत्तेजित होना, और बहुत ज्यादा परेशान रहना.
-नशीली चीज़ें ज्यादा से ज्यादा लेना. डिप्रेशन में वो व्यक्ति भी शराब पी सकता है, जिसने कभी न पी हो.
-बंदूक या ऐसी चीज़ें छूने की उत्तेजना होना, जिससे जान ली जा सकती है.
-दूसरों की परेशानी बहुत ज्यादा परेशान हो जाना.

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इलाज
डिप्रेशन और स्ट्रेस का इलाज करने वाला डॉक्टर साइकोलॉजिस्ट कहलाता है. वो सबसे पहले मरीज के सेसुसाइड से जुड़े लक्षण जानता है. फिर पर्सनल और परिवार की जानकारी लेता है. उसके बाद ये जानता है कि इसके लक्षण कब से दिखे और आपने उन्हें कब नोटिस करना शुरू किया. मरीज की परेशानी की हद जानने के बाद उसका ईलाज दो तरह से किया जाता है. पहला, टॉक थेरेपी और दूसरा, मेडिकेशन.

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एनसीआरबी के डेटा के मुताबिक पिछले 10 सालों में देशभर में आत्महत्या के मामले 17.3 प्रतिशत तक बढ़े हैं. खुदकुशी करने के तरीकों पर विचार करना, या करने के बारे में सोचना भी स्ट्रेस या ड्रिप्रेशन के संकेत हैं.
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