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सल्फर के संकेत बता सकते हैं पृथ्वी के बाहर जीवन के बारे में, शोध ने बताया कैसे

पृथ्वी के बाहर जीवन की संभावना तलाशना बहुत चुनौती पूर्ण काम है.

पृथ्वी के बाहर जीवन की संभावना तलाशना बहुत चुनौती पूर्ण काम है.

वैज्ञानिकों ने सल्फर (Sulfur) के बर्ताव को लेकर एक खास शोध किया है जिससे पता चलता है कि वजह किसी ग्रह के वायुमंडल (Atmosphere) में जीवन की संभावनाओं का पैदा करने में अहम भूमिका निभा सकता है.

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नई दिल्ली: पिछले कुछ वर्षों में वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष के बारे में नई जानकारियां मिल रही हैं.  दुनिया के वैज्ञानिकों अब नए स्पेसशिप अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहे हैं जो उन्हें और ज्यादा जानकारी देंगे. वैज्ञानिकों का ब्रह्माण में पृथ्वी के बाहर जीवन होने की संभावना को भी बल मिल रहा है. ताजा शोध में पता चला है कि सुदूर बाह्यग्रह (Exoplanet) में पाया जाने वाला सल्फर जीवन ढूंढने में अहम भूमिका निभा सकता है.

अब सल्फर की उपस्थिति खोलेगी बड़े राज
जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि सल्फर इन बाह्यग्रहों में जीवन होने की संभावनाओं की पुष्टि में निर्णायक भूमिका निभा सकता है. वह इन ग्रहों के वायुमंडल के बारे में भी अहम जानकारी दे सकता है.

शोध में पता चला सल्फर की मौजूदगी का जादू
नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित लेख में इस शोध के नतीजे बताए गए हैं. यूनिवर्सिटी के एसिस्टेंट रिसर्च साइंटिस्ट चाओ ही का कहना है, “हम जब वायुमंडल में केवल थोड़ी ही मात्रा में सल्फर पाते हैं, जैसे की दो प्रतिशत से भी कम, तो इसका बहुत प्रभाव पड़ता है. जब इन बाह्यग्रहों के वायुमंडल का हम अध्ययन करते हैं तो ये परिवर्तन बहुत मददगार होते है.

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किसी ग्रह पर जीवन प्रक्रिया शुरू होने में लाखों साल लग सकते हैं. (प्रतीकात्मक फोटो)


पृथ्वी के वायुमंडल में है सल्फर की खास भूमिका
वैज्ञानिक ये  तो जानते हैं कि सल्फर की वायुमंडल में उपस्थिति पृथ्वी, शुक्र, गुरू जैसे ग्रहों पर क्या भूमिका होती है, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि बाह्यग्रहों के वायुमंडल में सल्फर की क्या भूमिका होती है. सल्फर की पृथ्वी पर जीवन में अहम भूमिका है. कई पौथे और बैक्टीरिया इसका उत्सर्जन करते हैं. यह कई अमीनो एसिड और एंजाइम्स में मिलता है. वैज्ञानिक सल्फर उत्पादों का उपयोग पृथ्वी के बाहर जीवने खोजने के लिए करना चाहते हैं.

अब सल्फर की उपस्थिति होगी अहम सुराग
वैज्ञानिक यह जानने की कोशिश करेंगे कि क्या सल्फर किसी ग्रह पर मौजूद है और वह वहां के वायुमंडल को कितना प्रभावित कर रहा है. ही के मुताबिक इससे वैज्ञानिकों को यह पता चल सकेगा कि क्या सल्फर गैस उस ग्रह पर जीवन की उत्पत्ति का कारण हो सकते हैं कि नहीं.

लैब में आसान नहीं सल्फर के प्रयोग
लैब में सल्फर बहुत ही जल्दी प्रतिक्रिया कर जाता है और प्रयोग के बाद उससे ज्यादा जानकारी नहीं निकाली जा सकती. यहां तक कि यह लैब के उपकरणों तक से प्रतिक्रिया कर जाता है  इस वजह से लैब में नियंत्रित हालातों में प्रयोग करने में वैज्ञानिकों को कई व्यवहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

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हर ग्रह पर अंतरिक्ष यान भेजना संभव नहीं है. (सांकेतिक तस्वीर)


इस तकनीक ने प्रयोग बनाए मुमकिन
 ऐसे में वैज्ञानिकों ने सिम्युलेशन  तकनीकों का उपयोग कारगर हो सकती है. ही के मुताबिक अब तक केवल सिम्युलेटेड सल्फर कैमिस्ट्री में केवल तीन अध्ययन हो सके हैं, लेकिन वे सभी पृथ्वी के वायुमंडल के अध्ययन के लिए हैं. यह पहला ऐसा लैब सिम्युलेशन अध्ययन है जो बाह्यग्रहों के वायुमंडल के लिए बनाया गया है.

क्या किया गया प्रयोग में
चाओ और उनके साथियों ने दो प्रयोग किए जिसमें उन्होंने कार्बन डाइ ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, नाइट्रोजन, हाइड्रोडन, पानी और हीलियम के मिश्रण का उपयोग किया. एक प्रयोग में 1.6 प्रतिश सल्फर को मिश्रण में शामिल किया गया और दूसरे में सल्फर नहीं था.

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किसी ग्रह पर अनुकूल जीवन की परिस्थितियों केलिए वहां के वायुमंडल की अहम भूमिका होती है.


क्या पाया गया प्रयोग में
वैज्ञानिकों ने इन दोनों मिश्रण को खास चैम्बर, जिसे प्लैनटरी हेज चैम्बर कहते हैं  में  डाल  जहां उन्हें दो ऊर्जा के स्रोत दिए. एसी करेंट से बना प्लाज्मा और फिर अल्ट्रावॉयलेट किरणें. प्लाज्मा बिजली चमकने जैसी विद्युतीय गतिविधि पैदा कर सकता है. जबकि अल्ट्रावॉयलेट प्रकाश पृथ्वी, शनि औ रप्लूटो ग्रह के वायुमंडल में रासायनिक क्रियाएं करवाती है. चैम्बर में बने ठोस कणों और गैसों का अध्ययन करने के पर ही और उनके साथियों ने पाया कि सल्फर वाले मिश्रण की गैसों में तीन गुना ज्यादा ठोस कण थे और इनमें से ज्यादातर ऑर्गैनिक तत्व थे.

क्या मायने थे शोधकर्ताओं के लिए इन नतीजों से
इन बातों से शोधकर्ताओं को कई बातों की पुष्टि मिली. जब बाह्यग्रहों के तत्वों का स्पैक्ट्रम का अध्ययन करते समय इस तरह के ऑर्गेनिक पदार्थ की अपेक्षा की जा सकती है जो पहले नहीं की जाती थी. अब उनके स्पैक्ट्रम को अध्ययन करने का नजरिया बदलेगा.

तो फिर क्या होगा अगर ग्रह पर सल्फर के होने के मिले संकेत
अगर वैज्ञानिकों को इन ग्रहों पर सल्फर होने के संकेत मिलते हैं तो वे वहां के वायुमंडल में ज्यादा ठोस कणों की अपेक्षा कर सकते हैं. सल्फर की उपस्थिति से वैज्ञानिकों को उससे बनने वालों अन्य पदार्थों के बारे में अच्छे से परखना होगा. यह जीवन के संकेत की पुष्टि करने से पहले करना बहुत जरूरी है.

यह शोध बाह्यग्रहों से आने वाली जानकारियों को देखने के नजरियों को बेहतर बनाने में मददगार होगा. और इन ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं को बनाए रखेगा.

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